नकली का कारोबार: पूर्वांचल के जिलों में नकली मोबिल ऑयल की सप्लाई, नेटवर्क तोड़ने में जुटी पुलिस
खंदौली में यमुना एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज पर पुलिस ने चेकिंग में एक टेंपो पकड़ा था। इसमें नकली मोबिल ऑयल के डिब्बों से भरे कार्टन मिले थे।
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आगरा में खंदौली के पीलीपोखर इलाके में मंगलवार रात को पुलिस ने नकली मोबिल ऑयल की फैक्टरी पकड़ी थी। 12 आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि सरगना नकली मोबिल ऑयल की सप्लाई पूर्वांचल के जिलों में कर रहा था।
दुकानदार कम दाम में नकली मोबिल ऑयल खरीदकर ग्राहकों से पूरी रकम वसूलते थे। पुलिस का कहना है कि इससे ग्राहक को जहां पूरी कीमत पर ऑयल खरीदना पड़ रहा था, वहीं उनकी गाड़ी के इंजन भी खराब हो रहे होंगे। फैक्टरी से माल की सप्लाई करने वाला संचालक शारिक और मैनेजर शकील फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
खंदौली में यमुना एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज पर पुलिस ने चेकिंग में एक टेंपो पकड़ा था। इसमें नकली मोबिल ऑयल के डिब्बों से भरे कार्टन मिले थे। तीन आरोपी अरमान, इकरार (निवासी नई बस्ती, कोतवाली) और सनी अहमद (निवासी गुदड़ी मंसूर खां) पकड़े थे। उनसे पूछताछ के बाद पीलीपोखर में फैक्टरी पर छापा मारा था। यहां से नौ आरोपी पकड़े। इसके साथ नकली मोबिल ऑयल, डिब्बे, पैकिंग का सामान बरामद किया गया था।
थाना खंदौली के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि फैक्टरी शकील और शारिक चलाते हैं। उन्होंने यह फैक्टरी फरवरी में खोली थी। नकली मोबिल ऑयल को नामी कंपनी के रैपर लगे डिब्बों में भरने के बाद बाजार में बिक्री के लिए ले जाते थे। एक बार में 150 कार्टन तक मेटाडोर में भरते थे। आगरा में इस माल की सप्लाई नहीं करते थे।
माल पूर्वांचल के कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज सहित आसपास के जिलों में सप्लाई करते थे। यह काम शारिक करता था। मैनेजर शकील दुकानदारों और माल की बिक्री का खाका तैयार करता था। उनकी दुकानदारों से सेटिंग रहती थी। माल बाजार में मिलने वाले माल से आधी कीमत पर खरीदा जाता था। ग्राहक से दुकानदार असली माल के बराबर ही कीमत वसूल करते थे। फरार शारिक और शकील की तलाश की जा रही है।
पुश्तैनी काम कर रहे
पुलिस ने अरमान, सनी अहमद, शोहिद, इकरार, कादिर, मुजीब, जीशान, समीर, मुईन, शाहरुख, वसीम, कादिर उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार किया था। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली मोबिल ऑयल का काम पुश्तैनी है। इस काम में ज्यादा मुनाफा होता है। इस कारण माल बनाकर बेचते हैं। बाजार से जो खराब ऑयल खरीदा जाता है, उसमें लाल रंग का पाउडर मिलाकर बेचते हैं। जिन गाड़ियों में यह ऑयल पड़ता होगा, उनके इंजन का खराब होना लगभग तय था। ग्राहक नामी कंपनी की जैसीपैकिंग होने की वजह से पहचान नहीं कर पाते थे।
पुलिस ने पिछले साल नकली मोबिल की छह से ज्यादा फैक्टरी और गोदाम पकड़े थे। इस मामले में थाना ताजगंज, छत्ता और एत्माद्दौला में मुकदमे दर्ज किए गए थे। आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। दो अधिक मुकदमे दर्ज हुए। मगर, आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट मेें कार्रवाई नहीं की जा सकी। यह वजह है कि शारिक और उसके भाई जेल से छूटने के बाद फिर से वही काम करने लगे थे। इस बार ठिकाना जरूर बदल लिया था। शहर की जगह देहात में यह काम हो रहा था।
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