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रातभर होते रहे बम के धमाके, नहीं झपका पाए पलक
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कासगंज यूक्रेन देश में फंसा छात्र शोभित माहेश्वरी
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। रूस के हमले के बाद से यूक्रेन में भयानक हालात हैं। रूस के हमले का मुख्य निशाना कीव शहर है। ऐसे में वहां फंसे विद्यार्थियों के सामने हालात काफी विकट है। शनिवार की रात्रि को यहां एक के बाद एक तमाम बम धमाके हुए। कई इलाकों में मिसाइलें गिरीं। मेडिकल यूनिवर्सिटी की जिम में 200 से अधिक छात्र-छात्राएं पिछले चार दिनों से फंसे हुए हैं। धमाकों की आवाज से रात को पलक भी नहीं झपका पाते। यूक्रेन में कासगंज के कुल सात छात्र-छात्राएं फंसे हुए हैं। एक छात्र रोमानिया के बॉर्डर पर पहुंच चुका है और एक छात्रा रोमानिया के लिए निकल चुकी है।
दिल-दिमाग में छाई है दहशत, रातभर हो रहे धमाके : शोभित
कासगंज। यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे शहर के राजकुमार माहेश्वरी के पुत्र शोभित माहेश्वरी बड़ी मुसीबत में हैं। उन्होंने कीव में हुए तबाही को अपनी आंखों से देखा है। शोभित ने अमर उजाला को बताया कि शनिवार की रात को काफी धमाके हुए हैं। वे बम और मिसाइल के धमाके थे। कीव में न खाने पीने को कुछ है और न ही एंबेसी कोई सुध ले रही। एम्बेसी बार बार कहती है कि वहीं पर रहो, यहां से निकलने का भी कोई साधन नहीं है।
कुछ नहीं कर पा रही एंबेसी : दामिनी
कासगंज। आवास विकास कॉलोनी निवासी छोटे लाल की पुत्री दामिनी शाक्य डिनिप्रो शहर में फंसी हुई है। इस शहर में अभी अटैक नहीं हुआ है, लेकिन अलर्ट है। आर्मी गश्त कर रही है। दामिनी के साथ के छात्र छात्राओं का वीडियो दामिनी के पिता छोटे लाल ने दिया। छात्र-छात्राओं का कहना है कि एंबेसी कुछ नहीं कर पा रही है। जब भी बात की जाती है तो बोल दिया जाता है कि वहीं पर रहो। होस्टल का मैंस बंद हो गया है खान पान का सामान नहीं है। रुपया डॉलर में कनवर्ट नहीं हो पा रहा।
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शिवानी टर्नेपिल से हंगरी बॉर्डर के लिए निकली
कासगंज। शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी वीरेंद्र सिंह की पुत्री शिवानी टर्नेपिल में एमबीबीएस की छात्रा है। वह भारत आने की कोशिश में जुटी है। एंबेसी से बातचीत करके टर्नेपिल से 50 भारतीय छात्र छात्राओं का एक ग्रुप हंगरी बॉर्डर के लिए निकला है। पिता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि संभावना है कि वह एक दो दिन में भारत आ सकेगी। दूतावास से बच्चे निरंतर संपर्क में हैं। बच्चों के सामने काफी परेशानियां हैं। खाने पीने के सामान की दिक्कतें हैं।
खाने पीने की दिक्कतों का सामना कर रहा है शिवकुमार
कासगंज। पटियाली तहसील क्षेत्र के गांव खिजरपुर निवासी छात्र शिवकुमार पुत्र कृष्णपाल सिंह यूक्रेन के जापोरीज्ज्या में फंसा है। शिवकुमार कॉलेज के होस्टल में ही है। एंबेसी से बार-बार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन अभी एंबेसी यूक्रेन से निकालने का कोई संकेत नहीं दे रही। बार बार कहा जा रहा है कि जहां पर हैं वहीं पर रहें। पिता कृष्णपाल ने चिंता जताते हुए कहा कि बेटे के सामने काफी दिक्कते हैं। खाने पीने की चीजें नहीं मिल पा रहीं। एटीएम से पैसे भी नहीं निकल पा रहे। ऐसी स्थिति में बच्चे कहां जाएं क्या करें। होस्टल से निकलने की भी पाबंदी है।
रोमानिया के बॉर्डर पर पहुंच गया है गिर्राज
कासगंज। यूक्रेन के खारकीव में फंसे गंगागढ़ के छोटेलाल का पुत्र गिर्राज रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गया है। वह खारकीव में एयरक्राफ्ट टेक्नीशियन की शिक्षा ले रहा था। युद्ध के बाद से उसके पास खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं था। लगातार परेशानी झेलते हुए वह अपने निजी संसाधनों से खुद की रिस्क पर कोशिश करके रोमानिया बॉर्डर तक पहुंच गया है। पिता छोटे लाल ने बताया कि अभी उसे भारत आने में एक दो दिन लग सकते हैं। दूतावास से संपर्क किया गया है। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब गिर्राज के लौटने की आस बंधी है।
बॉर्डर तक पहुंच पाना है चुनौती
कासगंज। यूक्रेन के विनीसिया शहर में फंसी शहर के प्रियदर्शन माहेश्वरी की पुत्री गर्विता माहेश्वरी पूरे हौसले के साथ बिगड़े हालातों का सामना कर रही है। उसे एक स्थानीय महिला की मदद मिल रही है। कभी अपने साथियों के साथ तो कभी किश्चियन महिला के साथ वह अपना वक्त गुजार रही है। पिता प्रियदर्शन माहेश्वरी ने बताया कि विनीसिया शहर में कोई हमला नहीं हुआ है। अभी हमला खारकीव और कीव में ही हो रहा है। यह उनके लिए राहत की बात है, लेकिन अभी भारत वापस आना संभव नहीं हो पा रहा। क्योंकि रोमानिया बॉर्डर विनीसिया से काफी दूर है। अपने रिस्क पर अपने संसाधन से ही बॉर्डर तक पहुंचना होगा। उन्होंने कहा कि अपने संसाधन से जाना सुरक्षित नहीं है। कभी भी कोई बम गिर सकता है।
डरा हुआ है विशाल, खाने पीने की चीजों की दिक्कतें
कासगंज। नगला वाले के रहने वाले मनोज कुमार का पुत्र विशाल प्रताप जो एमबीबीएस की पढ़ाई यूक्रेन के विनीसिया में कर रहा है और वहीं यूनिवर्सिटी के होस्टल में रह रहा है। परिवार के लोग विशाल के फंसे होने से बेहद परेशान हैं। पिता मनोज कुमार का कहना है कि विशाल के सामने खाने पीने का जहां संकट है वहीं वह काफी डरा हुआ है। दूतावास के अधिकारी अपने बॉर्डर आने के निर्देश नहीं दे रहे। उनका कहना है कि वे जहां पर हैं वहीं पर रहें। कोई संकेत अभी तक नहीं मिल पा रहे जिससे विशाल व परिजन सभी चिंतित हैं। भारत सरकार जल्द से जल्द बॉर्डर से दूर फंसे छात्र छात्राओं को बाहर निकाले।
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दिल-दिमाग में छाई है दहशत, रातभर हो रहे धमाके : शोभित
कासगंज। यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे शहर के राजकुमार माहेश्वरी के पुत्र शोभित माहेश्वरी बड़ी मुसीबत में हैं। उन्होंने कीव में हुए तबाही को अपनी आंखों से देखा है। शोभित ने अमर उजाला को बताया कि शनिवार की रात को काफी धमाके हुए हैं। वे बम और मिसाइल के धमाके थे। कीव में न खाने पीने को कुछ है और न ही एंबेसी कोई सुध ले रही। एम्बेसी बार बार कहती है कि वहीं पर रहो, यहां से निकलने का भी कोई साधन नहीं है।
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कुछ नहीं कर पा रही एंबेसी : दामिनी
कासगंज। आवास विकास कॉलोनी निवासी छोटे लाल की पुत्री दामिनी शाक्य डिनिप्रो शहर में फंसी हुई है। इस शहर में अभी अटैक नहीं हुआ है, लेकिन अलर्ट है। आर्मी गश्त कर रही है। दामिनी के साथ के छात्र छात्राओं का वीडियो दामिनी के पिता छोटे लाल ने दिया। छात्र-छात्राओं का कहना है कि एंबेसी कुछ नहीं कर पा रही है। जब भी बात की जाती है तो बोल दिया जाता है कि वहीं पर रहो। होस्टल का मैंस बंद हो गया है खान पान का सामान नहीं है। रुपया डॉलर में कनवर्ट नहीं हो पा रहा।
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शिवानी टर्नेपिल से हंगरी बॉर्डर के लिए निकली
कासगंज। शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी वीरेंद्र सिंह की पुत्री शिवानी टर्नेपिल में एमबीबीएस की छात्रा है। वह भारत आने की कोशिश में जुटी है। एंबेसी से बातचीत करके टर्नेपिल से 50 भारतीय छात्र छात्राओं का एक ग्रुप हंगरी बॉर्डर के लिए निकला है। पिता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि संभावना है कि वह एक दो दिन में भारत आ सकेगी। दूतावास से बच्चे निरंतर संपर्क में हैं। बच्चों के सामने काफी परेशानियां हैं। खाने पीने के सामान की दिक्कतें हैं।
खाने पीने की दिक्कतों का सामना कर रहा है शिवकुमार
कासगंज। पटियाली तहसील क्षेत्र के गांव खिजरपुर निवासी छात्र शिवकुमार पुत्र कृष्णपाल सिंह यूक्रेन के जापोरीज्ज्या में फंसा है। शिवकुमार कॉलेज के होस्टल में ही है। एंबेसी से बार-बार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन अभी एंबेसी यूक्रेन से निकालने का कोई संकेत नहीं दे रही। बार बार कहा जा रहा है कि जहां पर हैं वहीं पर रहें। पिता कृष्णपाल ने चिंता जताते हुए कहा कि बेटे के सामने काफी दिक्कते हैं। खाने पीने की चीजें नहीं मिल पा रहीं। एटीएम से पैसे भी नहीं निकल पा रहे। ऐसी स्थिति में बच्चे कहां जाएं क्या करें। होस्टल से निकलने की भी पाबंदी है।
रोमानिया के बॉर्डर पर पहुंच गया है गिर्राज
कासगंज। यूक्रेन के खारकीव में फंसे गंगागढ़ के छोटेलाल का पुत्र गिर्राज रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गया है। वह खारकीव में एयरक्राफ्ट टेक्नीशियन की शिक्षा ले रहा था। युद्ध के बाद से उसके पास खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं था। लगातार परेशानी झेलते हुए वह अपने निजी संसाधनों से खुद की रिस्क पर कोशिश करके रोमानिया बॉर्डर तक पहुंच गया है। पिता छोटे लाल ने बताया कि अभी उसे भारत आने में एक दो दिन लग सकते हैं। दूतावास से संपर्क किया गया है। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब गिर्राज के लौटने की आस बंधी है।
बॉर्डर तक पहुंच पाना है चुनौती
कासगंज। यूक्रेन के विनीसिया शहर में फंसी शहर के प्रियदर्शन माहेश्वरी की पुत्री गर्विता माहेश्वरी पूरे हौसले के साथ बिगड़े हालातों का सामना कर रही है। उसे एक स्थानीय महिला की मदद मिल रही है। कभी अपने साथियों के साथ तो कभी किश्चियन महिला के साथ वह अपना वक्त गुजार रही है। पिता प्रियदर्शन माहेश्वरी ने बताया कि विनीसिया शहर में कोई हमला नहीं हुआ है। अभी हमला खारकीव और कीव में ही हो रहा है। यह उनके लिए राहत की बात है, लेकिन अभी भारत वापस आना संभव नहीं हो पा रहा। क्योंकि रोमानिया बॉर्डर विनीसिया से काफी दूर है। अपने रिस्क पर अपने संसाधन से ही बॉर्डर तक पहुंचना होगा। उन्होंने कहा कि अपने संसाधन से जाना सुरक्षित नहीं है। कभी भी कोई बम गिर सकता है।
डरा हुआ है विशाल, खाने पीने की चीजों की दिक्कतें
कासगंज। नगला वाले के रहने वाले मनोज कुमार का पुत्र विशाल प्रताप जो एमबीबीएस की पढ़ाई यूक्रेन के विनीसिया में कर रहा है और वहीं यूनिवर्सिटी के होस्टल में रह रहा है। परिवार के लोग विशाल के फंसे होने से बेहद परेशान हैं। पिता मनोज कुमार का कहना है कि विशाल के सामने खाने पीने का जहां संकट है वहीं वह काफी डरा हुआ है। दूतावास के अधिकारी अपने बॉर्डर आने के निर्देश नहीं दे रहे। उनका कहना है कि वे जहां पर हैं वहीं पर रहें। कोई संकेत अभी तक नहीं मिल पा रहे जिससे विशाल व परिजन सभी चिंतित हैं। भारत सरकार जल्द से जल्द बॉर्डर से दूर फंसे छात्र छात्राओं को बाहर निकाले।

कासगंज यूक्रेन देश में फंसा छात्र गिर्राज यादव- फोटो : KASGANJ

कासगंज। यूक्रेन के कीव में फंसा भारतीय छात्र फरदीन- फोटो : KASGANJ