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पूर्व सैनिकों को कचोट रही है राजनीतिक दलों की बेरुखी, सुध लेने वाला कोई नहीं

Mon, 08 Apr 2019 03:53 PM IST
मुकेश कुमार धर्मेंद्र यादव, अमर उजाला, आगरा
धर्मेंद्र यादव, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 08 Apr 2019 03:53 PM IST
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ex army man unhappy from political parties ignored in lok sabha elections 2019
चुनाव पर चर्चा करते पूर्व सैनिक - फोटो : अमर उजाला
इस लोकसभा चुनाव में सेना का शौर्य तो बड़ा मुद्दा है, लेकिन पूर्व सैनिकों की कोई बात ही नहीं की जा रही। इनके मुद्दे राजनीतिक दलों के चुनावी एजेंडे से गायब हैं। दशकों तक सीमा के प्रहरी रहे इन बहादुरों का दर्द यह है कि नेता उनका दर्द सुनने तक उनके पास नहीं आ रहे हैं। कभी कभी वन रैंक वन पेंशन की बात तो होती है लेकिन उसकी विसंगतियों की न चर्चा की जाती है, न उन्हें दूर करने का प्रयास। आगरा में पूर्व सैनिकों की 14 कॉलोनियां हैं। 
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सैन्य अफसरों को टिकट मिलते हैं, पूर्व सैनिकों को नहीं

वॉयस ऑफ एक्स सर्विसमैन सोसाइटी के राष्ट्रीय सचिव बीर बहादुर सिंह बताते हैं कि लंबे समय से पूर्व सैनिक राजनीतिक दलों के लिए अछूत ही रहे हैं। राजनीतिक दल सैन्य अफसरों को तो टिकट देते हैं मगर पूर्व सैनिकों को नहीं देते हैं। इस दफा पहली बार शिमला में एक पूर्व सैनिक को टिकट दिया गया है। उनके मुद्दों के प्रति भी राजनेता संवेदनशील नहीं हैं।
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सिक्योरिटी एजेंसियां कर रही हैं उत्पीड़न

राजकुमार चौहान (रिटायर्ड सूबेदार) बताते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद जवान ज्यादातर सिक्योरिटी एजेंसियों में बतौर गार्ड सेवा देते हैं, लेकिन वहां भी उनके हितों पर कुठाराघात किया जाता है। एजेंसी सेवा प्रदाता कंपनी से 28 हजार रुपये वसूलती हैं और गार्ड को वेतन 11 हजार रुपये दिया जाता है। विरोध करने पर सेवा से हटा दिया जाता है।
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पूर्व सैनिकों से टोल टैक्स न लिया जाए

पूर्व सैनिक शैलेंद्र सिंह कहते हैं कि सैन्य कर्मियों से टोल बैरियरों पर टैक्स नहीं लिया जाता है, यह सुविधा पूर्व सैनिकों को भी दी जानी चाहिए। कैप्टन (रिटायर्ड) बीएन पाल कहते हैं कि कई राज्यों में पूर्व सैनिकों से गृहकर नहीं लिया जाता है। यह व्यवस्था प्रदेश में भी होनी चाहिए। यहां भी पूर्व सैनिकों को गृहकर से मुक्त किया जाना चाहिए।

पूर्व सैनिकों की कॉलोनियों में समस्याओं का अंबार

प्रहलाद सिंह चाहर, एसएस सिसौदिया कहते हैं कि राम बिहार कालोनी, सैनिक पुरम, डिफेंस एस्टेट, सैनिक नगर, राजपुर चुंगी में पूर्व सैनिकों के 20 हजार से ज्यादा परिवार निवास करते हैं, लेकिन इन कालोनियों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। कहीं जलभराव तो कहीं नाली, खड़ंजे की समस्या है। जनप्रतिनिधियों को केवल चुनाव के वक्त उनकी याद आती है।

राष्ट्रदोह की धारा क्यों खत्म की जा रही

एलएस कुशवाह को राष्ट्रद्रोह की धारा खत्म करने की घोषणा के पीछे मकसद नजर नहीं आता है। राजेंद्र सिंह यादव कहते हैं कि वन रैंक, वन पेंशन का मुद्दा भी अभी तक अनसुलझा है। चर्चा में सूबेदार रिटायर्ड साहब सिंह, रामनरेश सिंह राठौर, प्रहलाद सिंह चाहर, देवकीनंदन, नेत्रपाल सिंह, गुरुदयाल चाहर, आरबी राणा, राजवीर सिंह, उदय नारायण सिंह आदि ने हिस्सा लिया।
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