{"_id":"62113c1429af305d643a67cb","slug":"every-vote-in-impostant-margin-percentage-kasganj-news-agr524852853","type":"story","status":"publish","title_hn":"सियासत: जिले में 4 वोट से 2 हजार वोट के अंतर से हारे हैं कई प्रत्याशीलोकतंत्र में हर वोट की कीमत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सियासत: जिले में 4 वोट से 2 हजार वोट के अंतर से हारे हैं कई प्रत्याशीलोकतंत्र में हर वोट की कीमत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज। हर मत अमूल्य है। परिणामों के बाद इसका महत्व पूर्णतया समझ में आता है। एक वोट किसी को विजयश्री दिला सकता है तो किसी को हरा। ऐसे में जरूरी है कि आज (20 फरवरी) को मतदान अवश्य करें और लोकतंत्र के महापर्व में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। जिले में 1957 से 2002 के बीच नौ बार ऐसे मौके आए हैं जब चार से 2120 मतों तक के अंतर से प्रत्याशी हारे हैं।
देश की आजादी के बाद से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें नौ बार हार जीत का अंतर काफी कम रह गया। जिले की सियासत में वर्ष 1967 में हुए चुनाव में सोरों विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस प्रत्याशी एनराम की किस्मत मात्र 4 वोटों के अंतर से बदल गई। उनको जनसंघ प्रत्याशी एसराम से हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा कई बार हारजीत का अंतर काफी कम वोटों से रहा। जब कोई प्रत्याशी ऐसी स्थिति में चुनाव हारता है तो उसके समर्थक पछताते दिखाते हैं, लेकिन इस पछतावे से कोई फायदा नहीं निकलता। जीवन भर ऐसी हार जीत प्रत्याशी व उसके समर्थकों को कसकती रहती है। ऐसे में आप अपने वोट की कीमत को समझें। आप जिस प्रत्याशी को पसंद करते हैं उसके लिए अपना वोट डालने अवश्य जाएं।
वर्षवार कम मतों से अंतर वाली सीटों का परिणाम
1957 - सिढ़पुरा- कांग्रेस के छोटे लाल पालीवाल ने निर्दलीय मोहन सिंह को 948 वोटों से हराया
1962 - सिढ़पुरा- कांग्रेस के छोटे लाल पालीवाल ने हिंदू महासभा के राम सिंह को 81 वोटों से मात दी
1967 - सोरों - जनसंघ के एसराम ने कांग्रेस के एन राम को चार वोटों से हराया
1967 - कासगंज- कांग्रेस के काली चरन ने जनसंघ के गिरबर प्रसाद को 1892 वोटों से हराया
1969 - कासगंज- जनसंघ के नेतराम ने कांग्रेस के कालीचरन को 2066 वोटों से हराया
1974 - सोरों- बीकेडी के खूबचंद ने कांग्रेस के हुब्बलाल को 886 वोटों से हराया
1974 - कासगंज- कांग्रेस के मानपाल सिंह ने जनसंघ के नेतराम को 1970 वोटों से हराया
1989 - सोरों- भाजपा के ओमकार सिंह ने कांग्रेस की उर्मिला अग्निहोत्री को 1220 वोटों से हराया
2002 - पटियाली- बसपा के राजेंद्र सिंह ने सपा के महफूज अली को 2120 वोटों से हराया
विज्ञापन
देश की आजादी के बाद से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें नौ बार हार जीत का अंतर काफी कम रह गया। जिले की सियासत में वर्ष 1967 में हुए चुनाव में सोरों विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस प्रत्याशी एनराम की किस्मत मात्र 4 वोटों के अंतर से बदल गई। उनको जनसंघ प्रत्याशी एसराम से हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा कई बार हारजीत का अंतर काफी कम वोटों से रहा। जब कोई प्रत्याशी ऐसी स्थिति में चुनाव हारता है तो उसके समर्थक पछताते दिखाते हैं, लेकिन इस पछतावे से कोई फायदा नहीं निकलता। जीवन भर ऐसी हार जीत प्रत्याशी व उसके समर्थकों को कसकती रहती है। ऐसे में आप अपने वोट की कीमत को समझें। आप जिस प्रत्याशी को पसंद करते हैं उसके लिए अपना वोट डालने अवश्य जाएं।
विज्ञापन
वर्षवार कम मतों से अंतर वाली सीटों का परिणाम
1957 - सिढ़पुरा- कांग्रेस के छोटे लाल पालीवाल ने निर्दलीय मोहन सिंह को 948 वोटों से हराया
1962 - सिढ़पुरा- कांग्रेस के छोटे लाल पालीवाल ने हिंदू महासभा के राम सिंह को 81 वोटों से मात दी
1967 - सोरों - जनसंघ के एसराम ने कांग्रेस के एन राम को चार वोटों से हराया
1967 - कासगंज- कांग्रेस के काली चरन ने जनसंघ के गिरबर प्रसाद को 1892 वोटों से हराया
1969 - कासगंज- जनसंघ के नेतराम ने कांग्रेस के कालीचरन को 2066 वोटों से हराया
1974 - सोरों- बीकेडी के खूबचंद ने कांग्रेस के हुब्बलाल को 886 वोटों से हराया
1974 - कासगंज- कांग्रेस के मानपाल सिंह ने जनसंघ के नेतराम को 1970 वोटों से हराया
1989 - सोरों- भाजपा के ओमकार सिंह ने कांग्रेस की उर्मिला अग्निहोत्री को 1220 वोटों से हराया
2002 - पटियाली- बसपा के राजेंद्र सिंह ने सपा के महफूज अली को 2120 वोटों से हराया