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UP: सांसों के साथ भी छलावा, सेंसर पर छिड़का जा रहा पानी...आगरा में ऐसे एक्यूआई किया जा रहा नियंत्रित
Tue, 12 Nov 2024 01:07 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 12 Nov 2024 01:07 PM IST
सार
आगरा में सांसों के साथ भी छलावा किया जा रहा है। ताजनगरी का एक्यूआई नियंत्रित करने के लिए सेंसर पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
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एक्यूआई किया जा रहा नियंत्रित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिवाली के बाद उत्तर भारत और प्रदेश के शहरों में सांस लेना मुश्किल है। पर, आगरा की हवा की गुणवत्ता आंकड़ों में बेहद अच्छी है। हकीकत में हवा बेहतर नहीं, बल्कि आपकी सांसों के साथ छलावा किया जा रहा है। प्रदूषण के आंकड़े ज्यादा न आएं, इसलिए प्रदूषण मापने के लिए सेंसर वाले ऑटोमैटिक स्टेशनों पर पानी का लगातार छिड़काव किया जा रहा है।
शहर में प्रदूषण मापने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संयुक्त रूप से 6 मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए हैं। यह संजय प्लेस, रोहता, मनोहरपुर, शास्त्रीपुरम, आवास विकास कॉलोनी और शाहजहां पार्क में हैं। आगरा की हवा की गुणवत्ता का औसत इन्हीं 6 स्टेशनों के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) से पता चलता है। यह एक्यूआई कम रहे, इसलिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे पीएम-2.5, पीएम-10 कणों की मात्रा कम दर्ज हो। अमर उजाला की टीम ने संजय प्लेस मॉनिटरिंग स्टेशन पर पानी से लगातार छिड़काव को देखा, जो सेंसर तक धूल कणों और प्रदूषण को जाने से रोक रहा है।
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शहर में प्रदूषण मापने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संयुक्त रूप से 6 मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए हैं। यह संजय प्लेस, रोहता, मनोहरपुर, शास्त्रीपुरम, आवास विकास कॉलोनी और शाहजहां पार्क में हैं। आगरा की हवा की गुणवत्ता का औसत इन्हीं 6 स्टेशनों के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) से पता चलता है। यह एक्यूआई कम रहे, इसलिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे पीएम-2.5, पीएम-10 कणों की मात्रा कम दर्ज हो। अमर उजाला की टीम ने संजय प्लेस मॉनिटरिंग स्टेशन पर पानी से लगातार छिड़काव को देखा, जो सेंसर तक धूल कणों और प्रदूषण को जाने से रोक रहा है।
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फर्जीवाड़े के लिए ये किया
आगरा नगर निगम की छत पर प्रदूषण मापने के सेंसर और उपकरण लगे हैं। यहां पानी की एक हजार लीटर की टंकी रखी गई है, जिससे 20 फीट ऊंचा एक पाइप लगाया गया है, जिसमें दो स्प्रिंकलर लगे हैं। नीचे पानी लिफ्ट करने के लिए एक मोटर लगी है, जो पूरे दिन टंकी से पानी लेकर स्प्रिंकलर के जरिए सेंसर और उपकरणों के पास छिड़काव करती रहती है। इससे धूल कण और सूक्ष्म कणों की माप बेहद कम आ रही है। सिर्फ इन उपकरणों तक पानी के छिड़काव के लिए पानी की टंकी लगाई गई है, जबकि निगम के टॉयलेट को सप्लाई देने वाली टंकियां पार्किंग की ओर लगी हैं।
ये भी पढ़ें - UP: 'ये फैमिली घर है' पॉश एरिया और आलीशान कोठी...अंदर ऐसे हाल में मिले लड़के-लड़कियां, शर्म से पानी-पानी हुई पुलिस
आगरा नगर निगम की छत पर प्रदूषण मापने के सेंसर और उपकरण लगे हैं। यहां पानी की एक हजार लीटर की टंकी रखी गई है, जिससे 20 फीट ऊंचा एक पाइप लगाया गया है, जिसमें दो स्प्रिंकलर लगे हैं। नीचे पानी लिफ्ट करने के लिए एक मोटर लगी है, जो पूरे दिन टंकी से पानी लेकर स्प्रिंकलर के जरिए सेंसर और उपकरणों के पास छिड़काव करती रहती है। इससे धूल कण और सूक्ष्म कणों की माप बेहद कम आ रही है। सिर्फ इन उपकरणों तक पानी के छिड़काव के लिए पानी की टंकी लगाई गई है, जबकि निगम के टॉयलेट को सप्लाई देने वाली टंकियां पार्किंग की ओर लगी हैं।
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मामला है क्या
शहर के चिकित्सकों के पास सांस, अस्थमा के रोगियों की संख्या में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है, लेकिन शहर की हवा की गुणवत्ता बताने वाले ऑटोमैटिक स्टेशनों के आंकड़े ऐसे हैं, जैसे मानसून की स्वच्छ हवा हो। मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को स्मॉग के कारण आंखों में जलन और चुभन महसूस होती है, लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर एप पर आगरा की हवा मानसून जैसी अच्छी बताई जा रही है। शहर में कचरा जलाने, देहात में पराली जलाने की घटनाएं हो रहीं हैं और सुबह स्मॉग की सफेद चादर स्पष्ट दिखती है, पर आंकड़ों में आगरा की हवा बेहद अच्छी बताई जा रही है
आगरा मॉडल की हर जगह चर्चा
दो साल से आगरा मॉडल की चर्चा पूरे प्रदेश के अधिकारी कर रहे हैं। साल 2023 से पहले आगरा में नवंबर से जनवरी के बीच एक्यूआई बेहद खराब और 350 से 495 के बीच रहता था, लेकिन दो साल से आंकड़े ही बदल गए। सरकारी बैठकों में प्रदेश के अन्य अधिकारियों को भी आगरा मॉडल अपनाने को कहा जा रहा है, जिससे आंकड़ों में एक साल में ही प्रदूषण घटकर दसवें हिस्से तक ही रह गया।
ये भी पढ़ें - Taj Mahal: आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट पर आपत्ति, नीरी से कराएं सर्वे...सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराई आपत्तियां
शहर के चिकित्सकों के पास सांस, अस्थमा के रोगियों की संख्या में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है, लेकिन शहर की हवा की गुणवत्ता बताने वाले ऑटोमैटिक स्टेशनों के आंकड़े ऐसे हैं, जैसे मानसून की स्वच्छ हवा हो। मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को स्मॉग के कारण आंखों में जलन और चुभन महसूस होती है, लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर एप पर आगरा की हवा मानसून जैसी अच्छी बताई जा रही है। शहर में कचरा जलाने, देहात में पराली जलाने की घटनाएं हो रहीं हैं और सुबह स्मॉग की सफेद चादर स्पष्ट दिखती है, पर आंकड़ों में आगरा की हवा बेहद अच्छी बताई जा रही है
आगरा मॉडल की हर जगह चर्चा
दो साल से आगरा मॉडल की चर्चा पूरे प्रदेश के अधिकारी कर रहे हैं। साल 2023 से पहले आगरा में नवंबर से जनवरी के बीच एक्यूआई बेहद खराब और 350 से 495 के बीच रहता था, लेकिन दो साल से आंकड़े ही बदल गए। सरकारी बैठकों में प्रदेश के अन्य अधिकारियों को भी आगरा मॉडल अपनाने को कहा जा रहा है, जिससे आंकड़ों में एक साल में ही प्रदूषण घटकर दसवें हिस्से तक ही रह गया।
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10 और 11 को ऐसा था एक्यूआई
2020 415 330
2021 358 446
2022 98 236
2023 89 48
2024 81 92
2020 415 330
2021 358 446
2022 98 236
2023 89 48
2024 81 92
आंखों में झोंक रहे धूल
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि लोगों की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। हवा की गुणवत्ता खराब है। सांस लेना मुश्किल है, पर एक्यूआई अच्छा बता रहे हैं। यह छलावा है, जबकि भरतपुर जैसे जिलों में एक्यूआई खराब है। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
कराई जाएगी जांच
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि शहर की सड़कों पर पानी का छिड़काव हो रहा है। मेट्रो समेत कई संगठन प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अपना रहे हैं, पर मॉनिटरिंग स्टेशन पर धुलाई, छिड़काव का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मंगलवार को सेंटर की जांच कराऊंगा।
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि लोगों की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। हवा की गुणवत्ता खराब है। सांस लेना मुश्किल है, पर एक्यूआई अच्छा बता रहे हैं। यह छलावा है, जबकि भरतपुर जैसे जिलों में एक्यूआई खराब है। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
कराई जाएगी जांच
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि शहर की सड़कों पर पानी का छिड़काव हो रहा है। मेट्रो समेत कई संगठन प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अपना रहे हैं, पर मॉनिटरिंग स्टेशन पर धुलाई, छिड़काव का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मंगलवार को सेंटर की जांच कराऊंगा।