फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Etah court acquitted the accused of molestation and rape after eight years

बेकसूर को जाना पड़ा था जेल: छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास का था आरोप, आठ साल बाद कोर्ट ने दिया ये फैसला

Sun, 02 Jun 2024 03:32 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 02 Jun 2024 03:32 PM IST
सार

एटा के एक स्वतंत्र पत्रकार को छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास के झूठे केस में फंसाया गया था। आठ साल बाद कोर्ट से उसे रिहा कर दिया। वहीं मामले की वादी के खिलाफ कोर्ट ने केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। 
 

विज्ञापन
Etah court acquitted the accused of molestation and rape after eight years
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में अदालत ने छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी को आठ साल बाद बरी कर दिया। आठ साल बाद माथे से ये कलंक हटा तो पीड़ित भावुक हो गया। उसने कहा कि न्यायालय पर पूरा भरोसा था। अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया। वहीं वादी के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। जैथरा कस्बा निवासी एक पीड़िता ने 23 जून 2016 को जैथरा कस्बा के मोहल्ला नेहरू नगर निवासी स्वतंत्र पत्रकार सुनील कुमार सहित तीन लोगों के विरुद्ध छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास का अभियोग पंजीकृत कराया था। 
विज्ञापन


जैथरा के तत्कालीन थानाध्यक्ष कैलाश चंद्र दुबे ने 22 जून 2016 की कथित छेड़खानी की घटना में सुनील कुमार को 23 जून को गिरफ्तार कर 24 जून को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 16 जुलाई को जमानत पर छूटने के बाद पीड़ित पत्रकार ने तत्कालीन एसएसपी से अग्रिम विवेचना कराने का अनुरोध किया।
विज्ञापन


 
Trending Videos

एसएसपी के आदेश पर विवेचक ने कोर्ट की अनुमति के बाद अग्रिम विवेचना की, जिसमें सुनील कुमार की नामजदगी गलत पाई गई। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। पीड़िता ने कंप्यूटर स्क्रीन पर अभियुक्त को पहचानने से इन्कार कर दिया। पीड़िता की मां ने भी कथित घटना का समर्थन नहीं किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश ने सुनील सहित दूसरे आरोपी वीरेंद्र कुमार को बरी कर दिया। वहीं, कोर्ट ने वादिया द्वारा न्यायालय में झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने पर उसके विरुद्ध परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट का फैसला सुनते ही सुनील भावुक हो गया। कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था।
विज्ञापन

मिल चुका है दो लाख का मुआवजा
पीड़ित पत्रकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। जहां छह साल चली लंबी जांच के बाद तत्कालीन एसएसपी अजय शंकर राय, तत्कालीन जैथरा थानाध्यक्ष कैलाश चंद्र दुबे, विवेचक मदन मुरारी द्विवेदी को दोषी पाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए डीजीपी को आदेश दिए गए। साथ ही, प्रदेश के मुख्य सचिव को पीड़ित पत्रकार को दो लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया था। तत्कालीन एसएसपी उदय शंकर सिंह ने 22 मार्च 2022 को पीड़ित के खाते में दो लाख रुपये की राशि का ट्रेजरी से भुगतान करा दिया।
विज्ञापन

एसएसपी सहित फंस चुके हैं छह पुलिसकर्मी
पत्रकार को झूठे मुकदमे में फंसाने के मामले में अब तक छह पुलिसकर्मी फंस चुके हैं। तत्कालीन एसएसपी, एसओ व विवेचक पर आयोग कार्रवाई के आदेश दे चुका है। वहीं एसएसपी स्तर से एक हैड मोहर्रिर सहित तीन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed