यमुना नदी की दुर्दशा भयंकर, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करुंगा रिपोर्ट: पर्यावरणविद एमसी मेहता
- सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और याचिकाकर्ता एमसी मेहता के सामने कागजी दावों की खुली पोल
- भैंरों नाला पंपिंग स्टेशन, मंटोला नाला, पीलाखार एसटीपी का नीरी की टीम के साथ किया निरीक्षण
विस्तार
यमुना की दुर्दशा भयंकर है, इसे बयां करने के लिए मेरे पास शब्द ही नहीं है, इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करूंगा। यह कहना है ताज मामलों के याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट से अधिवक्ता पर्यावरणविद् एमसी मेहता का। वह और नेशनल एनवायरमेंट एंड इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) की टीम के सदस्य शुक्रवार शाम को भैंरों नाला के पास यमुना में उतरे तो बदबू के कारण वहां खड़ा रहना मुश्किल हो गया। सबके मुंह पर रुमाल था।
नाले की गंदगी पंपिंग स्टेशन की जगह सीधे यमुना में जा रही थी। नाला देखा तो उसमें कचरे के ढेर लगे थे। एमसी मेहता ने यहां बायो और फाइटो रेमेडिएशन के बारे में पूछा। एक साल पहले भी एमसी मेहता और नीरी की टीम ने जब यहां दौरा किया तो यही हालात मिले थे। तब भी यमुना की दुर्दशा देख मेहता ने तल्ख टिप्पणियां की थीं।
मंटोला नाले में कचरे के ढेर मिले
दोपहर में एमसी मेहता और नीरी के चेयरमैन डॉ. एसके गोयल सबसे पहले मंटोला नाला पहुंचे। यहां नगर निगम ने बताया कि बायो रेमेडिएशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यहां दुर्गंध के कारण चंद मिनट भी खड़ा होना मुश्किल हो गया। यहां एमसी मेहता ने यमुना में बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और डिजॉल्व ऑक्सीजन (डीओ) की स्थिति मांगी, लेकिन उसकी जानकारी नहीं मिल पाई। इसके बाद टीम 10 एमएलडी के पीलाखार एसटीपी भी पहुंची।
ताजनगरी में 91 नालों में से केवल 29 ही टैप हैं, बाकी 62 नाले यमुना नदी में सीधे गिरकर उसे मैला कर रहे हैं। इन नालों के जरिए हर दिन 220 एमएलडी से ज्यादा सीवर यमुना में पहुंच रहा है। अधिवक्ता एमसी मेहता ने यमुना की दुर्दशा को देखकर नालों की स्थिति के बारे में पूछा।
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने बताया कि बाकी 62 अनटैप नालों पर बायो रेमेडिएशन और फाइटो रेमेडिएशन कराया जा रहा है। बायो रेमेडिएशन हो चुका है और 4 नालों में फाइटो रेमेडिएशन जारी है। सकरिया नाले में बेस बनाकर पौधे लगाए जा चुके हैं। बायो रेमेडिएशन के बाद नालों के प्रदूषण में कमी के आंकड़े भी उन्होंने पेश किए।
मेहता ने मांगा लेदर पार्क योजना का ब्योरा
ताज मामले के याचिकाकर्ता अधिवक्ता एमसी मेहता ने शुक्रवार को लेदर पार्क मामले में भी अधिकारियों से दस्तावेज मांगे हैं। सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ हुई बैठक में एमसी मेहता को अधिकारियों ने बताया कि लेदर पार्क में चमड़े का शोधन नहीं किया जाएगा। यहां कोई टैनरी नहीं बनने वाली, केवल कटिंग और पेस्टिंग का काम किया जाएगा। इसमें प्रदूषण नहीं होता।
इस पर मेहता ने लेदर पार्क योजना का ब्योरा और भविष्य की संभावनाओं पर ड्राफ्ट मांगा है। किरावली के गांव महुअर में लेदर पार्क बनाने की घोषणा बसपा सरकार के दौरान साल 2008 में हुई थी। यूपीएसआईडीसी ने 1100 एकड़ अधिग्रहण के बाद काम शुरू किया था, लेकिन पर्यावरण को लेकर मामला एनजीटी में चला गया। 13 साल से मामला कोर्ट में है।
नीरी ने देखा कुबेरपुर में कचरा निस्तारण
नीरी के वैज्ञानिक डॉ. एसके गोयल ने कुबेरपुर लैंडफिल साइट का भी निरीक्षण किया। उन्होंने यहां जमा पुराने साढ़े 8 लाख मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण के लिए की जा रही बायोमाइनिंग को देखा। यहां नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने नीरी टीम को बताया कि 31 मार्च तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा। अब तक लगभग 7 लाख मीट्रिक टन कचरा निस्तारित हो चुका है।