यूनेस्को से हेरिटेज सिटी घोषित कराने से पहले करने होंगे ये काम, वरना संरक्षित स्मारकों को खतरा
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आगरा को एक तरफ यूनेस्को से हेरिटेज सिटी घोषित कराने की कवायद चल रही है। वहीं, हेरिटेज साइट (संरक्षित स्मारक) का अस्तित्व संकट में है। एएसआई संरक्षित स्मारकों के अंदर तथा बाहर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। लाख कोशिश के बावजूद स्मारकों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका है।
इसका खुलासा सूचना का अधिकार के जरिये हुआ। पिछले दिनों गढ़ी भदौरिया निवासी भीम सिंह सागर ने एएसआई से आरटीआई के तहत आगरा में संरक्षित स्मारकों की कुल संख्या और इनके क्षेत्रफल की जानकारी के साथ ही इन पर अतिक्रमण के संबंध में जानकारी मांगी थी। कई दिनों की मशक्कत के बाद एएसआई यह जानकारी जुटा पाया।
विभाग ने 15 स्मारकों की सूची दी है, जिसकी जमीन पर अतिक्रमण है। मगर, इसमें से सिर्फ छह स्मारकों के ही अतिक्रमित क्षेत्रफल की जानकारी विभाग के पास है। शेष स्मारकों के कितने क्षेत्रफल पर अतिक्रमण है। इसका कोई ब्यौरा विभाग के पास नहीं है, इसमें सबसे अधिक स्मारक फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के हैं।
सबसे अधिक अतिक्रमण सीकरी के संरक्षित स्मारक लाल दरवाजा की जमीन पर है, यहां लोगों ने स्थायी निर्माण कर घर आदि बना लिए हैं। इसी प्रकार खानकाह और खताई खाना की जमीन पर भी लोगों ने स्थायी निर्माण कर लिए हैं। जगनेर किला की जमीन पर तो मंदिर ही बना दिया है।
हर इमारत के आसपास अतिक्रमण
स्मारक अतिक्रमित क्षेत्रफल
जामा मस्जिद 2000 वर्ग मीटर
खानकाह 2835 वर्ग मीटर
खताई खाना 884 वर्ग मीटर
लाल दरवाजा 4840 वर्ग मीटर
जगनेर किला 1500 वर्ग मीटर
महावत खां की-
बेटी का मकबरा 350 वर्ग मीटर
नहीं होती कोई कार्रवाई
इन स्मारकों के अलावा ताजमहल, अकबर टूम, मरियम टूम आदि स्मारकों के प्रतिबंधित दायरे में भी खूब अवैध निर्माण हुए हैं। एएसआई नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर देता है। इससे आगे कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। यही वजह है कि संरक्षित स्मारक अतिक्रमण से घिरते जा रहे हैं। सिकंदरा स्थित अकबर टूम के आसपास तो दर्जनों अवैध निर्माण हो चुके हैं। इनमें से कइयों के ध्वस्तीकरण के आदेश भी हैं, लेकिन मिलीभगत के चलते इन्हें ढहाया नहीं जा सका है।
अस्तित्व पर संकट
अतिक्रमण के चलते अर्जुन नगर स्थित जोधाबाई की छतरी और एत्माद्दौला स्थित चीनी का रोजा स्मारक के अस्तित्व ही खत्म सा हो गया है। यहां अनगिनत अतिक्रमण हैं। कई बार प्रयास किए गए, लेकिन अतिक्रमण को नहीं हटाया जा सका।