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रोजगारपरक पाठ्यक्रम कॉलेज स्तर पर ही तैयार किए जाएंगे
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आगरा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्नातक पाठ्यक्रमों में रोजगार परक और कौशल विकास संबंधी पाठ्यक्रम लागू होने हैं। ये पाठ्यक्रम कॉलेज के स्तर पर ही तैयार किए जाएंगे। डॉ. भीमराव आंबेेडकर विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं।
कुलसचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि कॉलेज अपने यहां उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों के शिक्षकों के माध्यम से रोजगार पाठ्यक्रमों को स्किल पार्टनर की सहायता से तैयार कराएं। इसमें यूजीसी और एनएसक्यूएफ (नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशंस फ्रेमवर्क) के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। पाठ्यक्रम तैयार करते समय कॉलेजों को अपने आसपास स्थित उद्योग, तकनीकी संस्थान, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, शिल्पकार, शोध संस्थान और पंजीकृत उद्यम आदि स्किल पार्टनर के साथ एमओयू हस्ताक्षरित करना होगा।
कॉलेज दो तरह के रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करेंगे। पहला- एक सेमेस्टर में पूरा होने वाले पाठ्यक्रम (इंडिविजुअल नेचर)। दूसरा- प्रत्येक सेमेस्टर के साथ पाठ्यक्रम की विशेषज्ञता बढ़ने वाले पाठ्यक्रम (प्रोग्रेसिव नेचर)। जिन्हें किसी भी सेमेस्टर में छोड़ने पर पाठ्यक्रम पूरा हो सके।
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कॉलेजों को छात्र-छात्राओं का प्रवेश लेने से पहले प्रस्तावित पाठ्यक्रमों को तैयार करके दस दिन के अंदर कुलसचिव कार्यालय में भेजना होगा। प्रस्तावित पाठ्यक्रम पर अध्ययन समिति, विद्या परिषद और कार्यपरिषद से अनुमोदन भी प्राप्त करना होगा। उसके बाद ही पाठ्यक्रमों को लागू किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए निर्धारित प्रपत्र पर कॉलेजों को पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव बनाकर भेजना है।
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कुलसचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि कॉलेज अपने यहां उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों के शिक्षकों के माध्यम से रोजगार पाठ्यक्रमों को स्किल पार्टनर की सहायता से तैयार कराएं। इसमें यूजीसी और एनएसक्यूएफ (नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशंस फ्रेमवर्क) के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। पाठ्यक्रम तैयार करते समय कॉलेजों को अपने आसपास स्थित उद्योग, तकनीकी संस्थान, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, शिल्पकार, शोध संस्थान और पंजीकृत उद्यम आदि स्किल पार्टनर के साथ एमओयू हस्ताक्षरित करना होगा।
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कॉलेज दो तरह के रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करेंगे। पहला- एक सेमेस्टर में पूरा होने वाले पाठ्यक्रम (इंडिविजुअल नेचर)। दूसरा- प्रत्येक सेमेस्टर के साथ पाठ्यक्रम की विशेषज्ञता बढ़ने वाले पाठ्यक्रम (प्रोग्रेसिव नेचर)। जिन्हें किसी भी सेमेस्टर में छोड़ने पर पाठ्यक्रम पूरा हो सके।
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कॉलेजों को छात्र-छात्राओं का प्रवेश लेने से पहले प्रस्तावित पाठ्यक्रमों को तैयार करके दस दिन के अंदर कुलसचिव कार्यालय में भेजना होगा। प्रस्तावित पाठ्यक्रम पर अध्ययन समिति, विद्या परिषद और कार्यपरिषद से अनुमोदन भी प्राप्त करना होगा। उसके बाद ही पाठ्यक्रमों को लागू किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए निर्धारित प्रपत्र पर कॉलेजों को पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव बनाकर भेजना है।