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डॉक्टरों की हड़ताल का असर: इमरजेंसी में आई महिला मरीज को नहीं किया भर्ती, हो गई मौत
Thu, 15 Aug 2024 08:09 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 15 Aug 2024 08:09 AM IST
सार
एसएन की इमरजेंसी अपनी मां को लेकर पहुंचे युवक को हड़ताल का हवाला दिया गया। महिला को 3-4 दिन बाद लेकर आने के लिए कहा गया था, लेकिन उससे पहले ही महिला की मौत हो गई।
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ओपीडी पर लगा ताला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के बल्केश्वर के एक युवक ने इमरजेंसी में मरीज भर्ती नहीं करने का आरोप लगाया। कहा कि डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। वह मां को घर लेकर गया, वहां बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई।
बल्केश्वर निवासी अजय राय ने बताया कि मां पुष्पा देवी (54) की तबीयत खराब थी। निजी डॉक्टर को भी दिखाया। मंगलवार को सांस में दिक्कत होने पर रात करीब साढ़े नौ बजे इमरजेंसी लेकर आया। आरोप लगाया कि डॉक्टर ने कहा कि हड़ताल चल रही है, इलाज नहीं मिल पाएगा। निजी अस्पताल में भर्ती करा दो या फिर तीन-चार दिन बाद लेकर आना।
जूता कारीगर हूं, ऐसे में मायूस होकर मां को घर ले गया। बुधवार सुबह 10:30 बजे मां की मौत हो गई। चिकित्सक भर्ती कर लेते तो जान बच सकती थी। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता का कहना है कि इमरजेंसी-आईसीयू सेवाएं चल रही हैं। यहां हड़ताल को कोई प्रभाव नहीं है। वैसे, चिकित्सक ऐसा नहीं कर सकते, फिर भी पता करता हूं।
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बल्केश्वर निवासी अजय राय ने बताया कि मां पुष्पा देवी (54) की तबीयत खराब थी। निजी डॉक्टर को भी दिखाया। मंगलवार को सांस में दिक्कत होने पर रात करीब साढ़े नौ बजे इमरजेंसी लेकर आया। आरोप लगाया कि डॉक्टर ने कहा कि हड़ताल चल रही है, इलाज नहीं मिल पाएगा। निजी अस्पताल में भर्ती करा दो या फिर तीन-चार दिन बाद लेकर आना।
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जूता कारीगर हूं, ऐसे में मायूस होकर मां को घर ले गया। बुधवार सुबह 10:30 बजे मां की मौत हो गई। चिकित्सक भर्ती कर लेते तो जान बच सकती थी। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता का कहना है कि इमरजेंसी-आईसीयू सेवाएं चल रही हैं। यहां हड़ताल को कोई प्रभाव नहीं है। वैसे, चिकित्सक ऐसा नहीं कर सकते, फिर भी पता करता हूं।
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