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बिना नियुक्ति छह साल से पढ़ा रही शिक्षिका
बिना नियुक्ति छह साल से पढ़ा रही शिक्षिका
Updated Wed, 25 Jan 2017 12:54 AM IST
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बेसिक शिक्षा विभाग में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। बिना नियुक्ति के एक शिक्षिका छह वर्षों से परिषदीय विद्यालय में तैनात है। शिकायत पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने वर्ष 2010 में हुई नियुक्ति के रिकार्ड चेक कराए। तब पता चला कि नियुक्ति आदेश की फोटो कापी करके फर्जी तरीके से एक शिक्षिका को नियुक्ति दिलाई गई। 28 जुलाई 2010 को 389 पत्रांक संख्या से नियुक्ति आदेश जारी किया गया। विभाग की ओर से जारी इस आदेश में 36 नंबर पर बछगांव, मथुरा निवासी अनीता कुमारी का नाम दर्ज है। इनको खेरागढ़ स्थित भाजपुर प्राथमिक विद्यालय आवंटित किया गया था।
शिकायतकर्ता की ओर से दी गई फोटो कापी में 36 नंबर पर बोल्ड लेटर में खातीपाड़ा, लोहामंडी की ललिता बघेल का नाम है। इन्हें आवंटित विद्यालय जगनेर ब्लाक स्थित मठ गोस्वामी को दिखाया गया है। आदेश की तिथि और पत्रांक संख्या समान हैं। ललिता यहां नौकरी कर रही हैं और अब तक करोड़ों रुपये वेतन के रूप में ले चुकी हैं। इस समय वह मेडिकल अवकाश पर हैं। विभाग के आदेश से नियुक्ति पाने वाली शिक्षिका के भी नौकरी पर होने की संभावना है। संभावना है कि मूल आदेश में 36 नंबर पर कागज लगाकर दूसरा नाम प्रिंट कराया गया।
वर्जन
नियुक्ति आदेश में छेड़छाड़ कर गड़बड़ी की गई है। संबंधित प्रधानाध्यापक, एनपीआरसी और बिल बाबू को 28 जनवरी को बुलाया गया है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- दिनेश कुमार यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी
समायोजित शिक्षामित्र का प्रमाणपत्र भी फर्जी
आगरा। शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बनने वाले अनिल कुमार के शैक्षणिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। उनकी तैनाती जैतपुर कला के प्राथमिक विद्यालय, पुरा बीरबल में थी। शिकायत पर खंड शिक्षा अधिकारी नीलम सिंह ने जांच की। इसमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र फर्जी मिले। इसकी रिपोर्ट बीएसए को दी गई। इसके बाद संबंधित विद्यालय महात्मा गांधी सैनिक इंटर कालेज, इटावा के प्रधानाचार्य सूर्यनाथ राम से आख्या मांगी गई। उन्होंने अनिल कुमार का विद्यालय के एसआर में ही नाम न होने की रिपोर्ट दी। यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन सत्यापन किया गया तो इंटरमीडिएट का अनुक्रमांक 0024511 पर रामश्री यादव की अंकतालिका निकली। दिसंबर में जांच के बाद ही वेतन रोक दिया गया। अनिल कुमार को बर्खास्त करने और वेतन की रिकवरी करने की संस्तुति की गई है।
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शिकायतकर्ता की ओर से दी गई फोटो कापी में 36 नंबर पर बोल्ड लेटर में खातीपाड़ा, लोहामंडी की ललिता बघेल का नाम है। इन्हें आवंटित विद्यालय जगनेर ब्लाक स्थित मठ गोस्वामी को दिखाया गया है। आदेश की तिथि और पत्रांक संख्या समान हैं। ललिता यहां नौकरी कर रही हैं और अब तक करोड़ों रुपये वेतन के रूप में ले चुकी हैं। इस समय वह मेडिकल अवकाश पर हैं। विभाग के आदेश से नियुक्ति पाने वाली शिक्षिका के भी नौकरी पर होने की संभावना है। संभावना है कि मूल आदेश में 36 नंबर पर कागज लगाकर दूसरा नाम प्रिंट कराया गया।
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नियुक्ति आदेश में छेड़छाड़ कर गड़बड़ी की गई है। संबंधित प्रधानाध्यापक, एनपीआरसी और बिल बाबू को 28 जनवरी को बुलाया गया है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- दिनेश कुमार यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी
समायोजित शिक्षामित्र का प्रमाणपत्र भी फर्जी
आगरा। शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बनने वाले अनिल कुमार के शैक्षणिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। उनकी तैनाती जैतपुर कला के प्राथमिक विद्यालय, पुरा बीरबल में थी। शिकायत पर खंड शिक्षा अधिकारी नीलम सिंह ने जांच की। इसमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र फर्जी मिले। इसकी रिपोर्ट बीएसए को दी गई। इसके बाद संबंधित विद्यालय महात्मा गांधी सैनिक इंटर कालेज, इटावा के प्रधानाचार्य सूर्यनाथ राम से आख्या मांगी गई। उन्होंने अनिल कुमार का विद्यालय के एसआर में ही नाम न होने की रिपोर्ट दी। यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन सत्यापन किया गया तो इंटरमीडिएट का अनुक्रमांक 0024511 पर रामश्री यादव की अंकतालिका निकली। दिसंबर में जांच के बाद ही वेतन रोक दिया गया। अनिल कुमार को बर्खास्त करने और वेतन की रिकवरी करने की संस्तुति की गई है।