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आगरा किला में उल्लू और चील के बीच हुआ संघर्ष, लेजर थेरेपी से घायल पक्षी का उपचार

Tue, 16 Jun 2020 02:36 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 16 Jun 2020 02:36 PM IST
सार

  • आगरा किले में हुई उल्लू और चील की लड़ाई
  • सीआईएसएफ ने इलाज के लिए वाइल्ड लाइफ संस्था को बुलाया

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Eagle And Owl Fight In Agra Fort
घायल उल्लू का उपचार करने में जुटी वन्य जीव संस्था - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस

विस्तार

आगरा किले में एक बार्न आऊल (उल्लू) और चील को हवा में संघर्ष करते देखा गया। इन दो बड़े शिकारी पक्षियों के बीच हुए संघर्ष में उल्लू को गंभीर चोट आईं। वाइल्डलाइफ एसओएस (वन्यजीव संरक्षण संस्था) की टीम घायल उल्लू का इलाज कर रही है।
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बताया गया है कि मंगलवार को आगरा फोर्ट में सीआईएसएफ (सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) के अधिकारियों ने आसमान में चील और उल्लू दो पक्षियों को लड़ते देखा। उल्लू इस लड़ाई में चील के चंगुल से मुक्त हो गया लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के कारण जमीन पर गिर गया।
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घायल पक्षी को देखकर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उल्लू को सुरक्षित स्थान पर रखा और इसकी सूचना वाइल्डलाइफ एसओएस को दी। वन्यजीव संरक्षण संस्था से दो सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची और घायल पक्षी को अपने पशु अस्पताल में लेकर आई।

वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक डॉ. एस. इलियाराजा ने कहा, बार्न आऊल के दाहिने पंख की मासपेशियों में गंभीर चोट आईं हैं, जिसके कारण वह उड़ने में असमर्थ है। वर्तमान में अन्य सभी आवश्यक दवाओं के साथ उसे लेजर थेरेपी दे रहे हैं। 

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि चील और उल्लू जैसे शिकारी पक्षी, स्वयं की रक्षा और शिकार के लिए अपनी चोंच और तेज तर्रार पंजों का प्रयोग करते हैं। शिकार और क्षेत्र के लिए ऐसे पक्षियों में अक्सर एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा होती हैं। कम होते जंगल और पेड़ों के कारण यह संघर्ष हुआ होगा।

बताया कि बार्न आऊल दुनिया में उल्लू की सबसे कॉमन रूप की प्रजाति है और पक्षियों की सभी प्रजातियों में से सबसे व्यापक है। ये पक्षी आम तौर पर पेड़ की दरार-खोखलों या छतों में आराम करते हैं और छोटे जीव जैसे चूहे और पक्षियों का शिकार करते हैं।

ब्लैक काइट (मिल्वस माइग्रेंस) शिकारी पक्षियों में एक मध्यम आकार का पक्षी है। हालांकि, लगातार कम होते जंगल, पेड़, शिकार और कृषि कीटनाशकों के उपयोग के कारण इनकी संख्या में गिरावट या उतार-चढ़ाव का अनुभव हुआ है। ब्लैक काइट (चील) शिकारी होते हैं लेकिन ज़्यादातर वे बचे हुए मास के टुकड़े पर ही भोजन करते है। उनके आहार में विभिन्न प्रकार की मछली, सरीसृप, और अन्य छोटे जानवर और पक्षी भी शामिल हैं।
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