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कूड़ेदान घोटाले में विजिलेंस ने दर्ज किए बयान
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मैनपुरी। जिले में एक साल पहले हुए कूड़ेदान फर्जीवाड़े की जांच अब जोर पकड़ने लगी है। विजिलेंस ने सभी दस्तावेज मिलने के बाद अब बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। पूर्व में ग्राम पंचायतों में निरीक्षण कर लोगों के बयान दर्ज किए गए थे। अब विभागीय कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके लिए उन्हें आगरा बुलाया गया था।
जिले की 552 ग्राम पंचायतों में लगे कूड़ेदानों के नाम पर हुए घोटाले की जांच विजिलेंस आगरा कर रही है। पहले तो दस्तावेजों के न मिलने के कारण जांच लटकी रही। इसके बाद कोरोना के चलते जांच नहीं हो सकी। अब एक बार फिर विजिलेंस ने जांच को आगे बढ़ाया है। दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद अब कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों को बुलाकर विजिलेंस जांच अधिकारी ने कूड़ेदान के संबंध में उनसे सवाल-जवाब किए। उनके बयान दर्ज करने के बाद उन्हें वापस भेज दिया। इसके बाद अब सभी पंचायत सचिवों और ग्राम प्रधानों के बयान दर्ज किए जाएंगे। हालांकि पूर्व में विजिलेंस ने जिले में निरीक्षण के दौरान कुछ प्रधान और सचिवों से बयान दर्ज किए थे, लेकिन वे कुछ भी बोलने को तैयार न थे। जांच एक बार फिर शुरू होने से विभाग से लेकर पंचायतों तक खलबली मच गई है।
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ये था मामला
जिले में वर्ष 2019 में ग्रामीण पंचायतों में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदान लगवाए गए थे। प्रत्येक कूड़ेदान के लिए 12 हजार रुपये का भुगतान किया गया। शिकायत पर हुई जांच में पता चला कि कूड़ेदानों की कीमत बमुश्किल चार हजार रुपये थी। विभागीय जांच में पुष्टि के बाद तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह को निलंबित भी कर दिया गया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी कपिल सिंह ने विजिलेंस जांच की संस्तुति की थी।
कूड़ेेदान फर्जीवाड़े की जांच के अभिलेख लेने के बाद उन्हें खंगाला जा रहा है। ग्राम पंचायतों में जाकर पहले ही निरीक्षण किया गया था। वहीं अब कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जल्द ही डीपीआरओ व अन्य अधिकारियों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे।
केएल वर्मा, इंस्पेक्टर विजिलेंस आगरा।
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जिले की 552 ग्राम पंचायतों में लगे कूड़ेदानों के नाम पर हुए घोटाले की जांच विजिलेंस आगरा कर रही है। पहले तो दस्तावेजों के न मिलने के कारण जांच लटकी रही। इसके बाद कोरोना के चलते जांच नहीं हो सकी। अब एक बार फिर विजिलेंस ने जांच को आगे बढ़ाया है। दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद अब कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार हाल ही में पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों को बुलाकर विजिलेंस जांच अधिकारी ने कूड़ेदान के संबंध में उनसे सवाल-जवाब किए। उनके बयान दर्ज करने के बाद उन्हें वापस भेज दिया। इसके बाद अब सभी पंचायत सचिवों और ग्राम प्रधानों के बयान दर्ज किए जाएंगे। हालांकि पूर्व में विजिलेंस ने जिले में निरीक्षण के दौरान कुछ प्रधान और सचिवों से बयान दर्ज किए थे, लेकिन वे कुछ भी बोलने को तैयार न थे। जांच एक बार फिर शुरू होने से विभाग से लेकर पंचायतों तक खलबली मच गई है।
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ये था मामला
जिले में वर्ष 2019 में ग्रामीण पंचायतों में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदान लगवाए गए थे। प्रत्येक कूड़ेदान के लिए 12 हजार रुपये का भुगतान किया गया। शिकायत पर हुई जांच में पता चला कि कूड़ेदानों की कीमत बमुश्किल चार हजार रुपये थी। विभागीय जांच में पुष्टि के बाद तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह को निलंबित भी कर दिया गया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी कपिल सिंह ने विजिलेंस जांच की संस्तुति की थी।
कूड़ेेदान फर्जीवाड़े की जांच के अभिलेख लेने के बाद उन्हें खंगाला जा रहा है। ग्राम पंचायतों में जाकर पहले ही निरीक्षण किया गया था। वहीं अब कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जल्द ही डीपीआरओ व अन्य अधिकारियों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे।
केएल वर्मा, इंस्पेक्टर विजिलेंस आगरा।