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मेहोला गांव में कटान से कई ग्रामीणों के खेत गंगा में समाए, सिंचाई विभाग के खिलाफ गुस्सा
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गंजडुंडवारा के मेहोला के समीप कटान करती गंगा को दिखाता ग्रामीण।
- फोटो : KASGANJ
गंजडुंडवारा। गंगा के तटवर्ती मेहोला गांव के समीप गंगा लगातार कटान कर रही है। गंगा का कटान मेहोला गांव के बांध तक जा पहुंचा है। बांध कटने पर गांव में गंगा का पानी पहुंच जाएगा। बांध कटने का खतरा बना रहने के कारण ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीण प्रशासन से कटान रोकने की मांग उठा रहे हैं।
तटवर्ती इलाके के गांव में हर साल ही गंगा की धारा कहर बरपाती है। पूर्व में बाढ़ की स्थिति का भी ग्रामीणों ने सामना किया है। पिछले दिनों गंगा के जलस्तर में हुए लगातार उतार चढ़ाव के कारण कटान की स्थिति पैदा हुई है। मेहोला क्षेत्र में कटान होने के कारण कटान रोकने के लिए पूर्व में सिंचाई विभाग के द्वारा कटानरोधी कार्य कराए गए, लेकिन यह कटानरोधी कार्य भी कटान रोकने में कारगर नहीं हो सके और यह कार्य भी गंगा की भेंट चढ़ गए। अब मेहोला बांध के पास तक गंगा की धारा कटान कर रही है। कुछ फासला ही गंगा की धारा और बंाध के बीच बचा है। ग्रामीण तेज सिंह ने बताया कि उनकी 3 बीघा जमीन गंगा में कट चुकी है। वहीं ग्रामीण शिव सिंह ने बताया कि उनकी 4 बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। इसी तरह से श्यामलाल की 2 बीघा, मोहनलाल की 4 बीघा, कालीचरन की 5 बीघा, हेमराज की 4 बीघा व यादराम, मेघाराम, रघुनाथ की जमीन भी कटकर गंगा में समा चुकी है।
मेहोला के ग्रामीण दरबारी लाल का कहना है कि गंगा के कटान की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी है, लेकिन अभी कोई कटानरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण रामस्वरूप ने बताया कि मेहोला बांध कट गया तो एक दर्जन से अधिक गांव की आबादी को तबाही का सामना करना पड़ेगा। तत्काल ही कटानरोधी कार्य करने की जरूरत है। वहीं प्रधान प्रीति शाक्य, रामभजन, यादराम, राम बहादुर, थान सिंह, राम सनेही, संतोष, कालीचरण, भूरे, सरवन, डा. किशन वीर, उमेश चंद्र, संग्राम सिंह चौहान, आदि ने कटान रोकने की शासन प्रशासन से मांग की है।
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- मेहोला बांध पर कटान रोकने के लिए पूर्व में भी कार्य कराया गया था। अब गंगा फिर से कटान कर रही है। इसे रोकने के लिए टीम मौके का निरीक्षण करके आकलन करेगी कि किस तरह का कार्य कराया जाना है। - अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।
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तटवर्ती इलाके के गांव में हर साल ही गंगा की धारा कहर बरपाती है। पूर्व में बाढ़ की स्थिति का भी ग्रामीणों ने सामना किया है। पिछले दिनों गंगा के जलस्तर में हुए लगातार उतार चढ़ाव के कारण कटान की स्थिति पैदा हुई है। मेहोला क्षेत्र में कटान होने के कारण कटान रोकने के लिए पूर्व में सिंचाई विभाग के द्वारा कटानरोधी कार्य कराए गए, लेकिन यह कटानरोधी कार्य भी कटान रोकने में कारगर नहीं हो सके और यह कार्य भी गंगा की भेंट चढ़ गए। अब मेहोला बांध के पास तक गंगा की धारा कटान कर रही है। कुछ फासला ही गंगा की धारा और बंाध के बीच बचा है। ग्रामीण तेज सिंह ने बताया कि उनकी 3 बीघा जमीन गंगा में कट चुकी है। वहीं ग्रामीण शिव सिंह ने बताया कि उनकी 4 बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। इसी तरह से श्यामलाल की 2 बीघा, मोहनलाल की 4 बीघा, कालीचरन की 5 बीघा, हेमराज की 4 बीघा व यादराम, मेघाराम, रघुनाथ की जमीन भी कटकर गंगा में समा चुकी है।
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मेहोला के ग्रामीण दरबारी लाल का कहना है कि गंगा के कटान की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी है, लेकिन अभी कोई कटानरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण रामस्वरूप ने बताया कि मेहोला बांध कट गया तो एक दर्जन से अधिक गांव की आबादी को तबाही का सामना करना पड़ेगा। तत्काल ही कटानरोधी कार्य करने की जरूरत है। वहीं प्रधान प्रीति शाक्य, रामभजन, यादराम, राम बहादुर, थान सिंह, राम सनेही, संतोष, कालीचरण, भूरे, सरवन, डा. किशन वीर, उमेश चंद्र, संग्राम सिंह चौहान, आदि ने कटान रोकने की शासन प्रशासन से मांग की है।
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- मेहोला बांध पर कटान रोकने के लिए पूर्व में भी कार्य कराया गया था। अब गंगा फिर से कटान कर रही है। इसे रोकने के लिए टीम मौके का निरीक्षण करके आकलन करेगी कि किस तरह का कार्य कराया जाना है। - अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।