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नशे का कारोबार: काजू-बादाम के डिब्बों में छिपाकर भेजी जाती थीं नशे की दवाइयां, तस्करों ने उगला राज

Thu, 24 Dec 2020 01:38 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 24 Dec 2020 01:38 PM IST
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drug smuggling agra gang news: drugs was hidden in cartons of dry fruits
तस्करों के गोदामों से बरामद हुईं नशे की दवाइयां - फोटो : अमर उजाला

नशे की दवाइयों को आगरा से काजू और बादाम के डिब्बों में छिपाकर भेजा जाता था। पैकिंग ऐसे कार्टन में की जाती थी जिन पर काजू, बादाम और अन्य मेवों के चित्र होते थे। पंजाब के लिए सबसे हाई डोज की दवाइयां होती थीं, ये तस्कर पंकज गुप्ता के घर पर तैयार होती थीं। दिल्ली, राजस्थान, हरिायणा और अन्य राज्यों के लिए कम डोज की दवा भेजी जाती थी। यह खुलासा गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ में हुआ है।

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तस्करों ने यह भी बताया है कि नशे की दवाइयां राजस्थान और हरियाणा में आटे और दाल की बोरियां के बीच में भरकर भेजी जाती थीं। ऐसा इसलिए किया जाता था कि इन राज्यों में दवाएं आटे और दाल के नाम पर पंजीकृत फर्जी फर्मों के लिए भेजा जाता था। पंजाब के लिए फर्जी फर्म से ई-वे बिल तैयार कराए जाते थे। जीएसटी विभाग की जांच में तीन फर्जी फर्म का पता चल चुका है।
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शातिर: ऑन डिमांड नशा भेजता था पंकज
औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि पंकज गुप्ता ऑन डिमांड नशे की दवाएं तैयार करता था। हैवी डोज की दवाओं की सबसे ज्यादा मांग पंजाब में होने के कारण हर सप्ताह सप्लाई की जाती थी। इसमें नशे की दवाओं की 500 ग्राम से एक किलो की थैली बनाकर फल और ड्राई फ्रूट के डिब्बों में पैक की जाती थी।

साजिश: कानपुर की सप्लाई लेने महिलाएं जाती थीं
तस्कर गिरोह के सदस्य धीरज की पत्नी और अनिल सिंधी की पत्नी मन्नत करीरा भी इसमें अहम जिम्मेदारी निभाती थीं। कानपुर से हरप्रीत सिंह और प्रीतमनाथ दवाएं बस से आगरा भेजता था। वाटरवर्क्स से इसे लेने और घर तक पहुंचाने का कार्य यह दोनों महिलाएं संभालती थीं। महिला होने के कारण पुलिस को शक नहीं होता था और दवाएं घर तक आसानी से आ जाती थीं।

चार गिरोह सामने आ चुके
1. आगरा गैंग : यह कमला नगर के विक्की अरोड़ा ने बनाया था, आगरा से पंजाब में नशे की तस्करी इसी ने शुरू की।
2. जयपुरिया गैंग : यह पंकज गुप्ता का है, वह पहले आगरा गैंग में था, इस गैंग का सबसे बड़ा तस्कर प्रमोद जयपुरिया जेल में बंद है।
3. मथुरा गैंग : इसमें 20 से ज्यादा गुर्गे हैं। ये पहले आगरा गैंग में थे। पंजाब पुलिस इसके आठ गुर्गे पकड़ चुकी है।
4. कानपुर गैंग : यह गिरोह कानपुर से दवा आगरा लाता है और आगरा गैंग और जयपुरिया गैंग को देता है। अनिल सिंधी इस गिरोह का सरगना है।
 
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