आगरा गिरोह के सात तस्कर देश के नौ राज्यों में नशे की दवाइयां और गर्भपात किटों की तस्करी कर रहे हैं। इन्हें दो कोरियर कंपनी के जरिए भेजा जा रहा है। यह खुलासा शनिवार को बल्केश्वर के लोहिया नगर से गिरफ्तार तस्कर सूर्यकांत उर्फ चंद्रकांत उर्फ मंटू और अमन गुप्ता से पूछताछ में हुआ है। दिल्ली के नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने आगरा ड्रग विभाग के अफसरों और पुलिस के साथ शनिवार शाम को ड्रग तस्कर पंकज गुप्ता के गोदाम पर छापा मारा था। अमन उसका बेटा और सूर्यकांत भाई है। कमला नगर स्थित गोदाम से पांच करोड़ की दवाइयां जब्त की गई थीं।
NCB की जांच में खुलासा: नौ राज्यों में फैला है नशे का कारोबार, विदेशों से भी जुड़े 'आगरा गैंग' के तार
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ताजनगरी में लगातार दूसरे दिन रविवार को दो करोड़ की दवाइयां और जब्त की गईं। ये दवाइयां नशे की, सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की और सैंपल की हैं। इन्हें फव्वारा के मेडिकल स्टोर, कमला नगर के दवा गोदामों और वाटर वर्क्स पर एक ऑटो से बरामद किया गया है। पांच लोग हिरासत में लिए गए हैं। आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि आगरा गिरोह के सात तस्कर नौ राज्यों में दवाइयों की तस्करी कर रहे हैं। इनके गोदाम आगरा शहर की घनी बस्तियों में हैं।
औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि आगरा गिरोह के तस्कर विक्की अरोड़ा, कपिल अरोड़ा, पंकज गुप्ता, प्रमोद जयपुरिया, अमन गुप्ता, सूर्यकांत और गौरव यूपी के कई जिलों के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी बंगाल में नशे की दवाओं की तस्करी कर रहे हैं। गिरफ्तार तस्करों का गोदाम पांच साल से कमला नगर में भाजपा की कार्यकर्ता आशा अग्रवाल के मकान में चल रहा था।
गोदाम से जब्त की गईं दवाएं 15 से 20 तरह की हैं। कीमत 35 से 720 रुपये तक है। सबसे महंगी गर्भपात किट है। पांच टैबलेट की कीमत 720 रुपये है। दवाओं में नींद की गोलियां, कफ सीरप, दर्द निवारक दवाएं, इंजेक्शन भी हैं। विभाग दवा का नाम, संख्या, बैच नंबर, निर्माता कंपनी का नाम और कीमत की रिपोर्ट बना रहा है। दवाओं की जांच और गिनती में पांच जिलों के औषधि निरीक्षक आगरा के नरेश मोहन दीपक, राजकुमार शर्मा, मथुरा के अनिल आनंद, फिरोजाबाद के सुनील कुमार, हाथरस के दीपक कुमार, कासगंज के रमेश चंद्र यादव लगाए गए। चार मजदूर कार्टन उठाने के लिए बुलाने पड़े।
बल्केश्वर के लोहिया नगर से जब्त दवाओं के नकली होने की आशंका भी औषधि नियंत्रक विभाग ने जताई है। जांच करने के लिए अभी 10 दवाओं के नमूने लिए हैं। अभी करीब आधी दवाओं की रिपोर्ट बनाकर 95 बोरियों में भरा गया है। ऐसे में 200 बोरी दवाएं होने की उम्मीद है। औषधि विभाग की प्रारंभिक पड़ताल में दो कंपनियों की दवाएं नकली होने की आशंका है। अधिकारियों को इनके नाम गूगल पर नहीं मिले हैं और रेपर से भी दवाओं से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं मिली है।