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दीक्षांत समारोहः टॉपर होने पर भी नहीं मिलेगा पदक, जानिए आखिर क्या है वजह
Wed, 18 Sep 2019 12:30 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 18 Sep 2019 12:30 AM IST
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कई छात्र-छात्राओं के टॉपर होने के बाद भी पदक नहीं मिलेगा। विश्वविद्यालय के आवासीय संस्थानों और संबद्ध महाविद्यालयों में कई पाठ्यक्रम ऐसे हैं, जिनमें पदक नहीं दिया जाता है।
एमएससी स्टेटिस्टिक, एमएससी होम साइंस (महाविद्यालयों में), एमए एजुकेशन, बीएससी और एमएससी एग्रीकल्चर, एमए जियोग्राफी, एमए उर्दू, मिलिट्री स्टडीज, बीएससी जूलॉजी एंड बॉटनी, बीबीए, बीसीए, एमएससी कंप्यूटर साइंस, स्नातक स्तर पर साइकोलॉजी और जियोग्राफी सहित कई पाठ्यक्रमों में टॉपर्स को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पदक नहीं दिया जाता है। इन पाठ्यक्रमों के टॉपर्स को प्रमाणपत्र से ही संतोष करना पड़ेगा।
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इस वर्ष भी कोई नया पदक नहीं दिया जाएगा
दीक्षांत समारोह में 11 अक्तूबर को कोई नया पदक नहीं देगा। गत 10-11 वर्षों में कोई नया पदक किसी पाठ्यक्रम में शामिल नहीं हुआ है। नए आवेदक सामने नहीं आ रहे हैं। पदक शुरू करने के लिए पहले 10 हजार रुपये और अब करीब 40 हजार रुपये फीस है।
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इस वर्ष भी कोई नया पदक नहीं दिया जाएगा
दीक्षांत समारोह में 11 अक्तूबर को कोई नया पदक नहीं देगा। गत 10-11 वर्षों में कोई नया पदक किसी पाठ्यक्रम में शामिल नहीं हुआ है। नए आवेदक सामने नहीं आ रहे हैं। पदक शुरू करने के लिए पहले 10 हजार रुपये और अब करीब 40 हजार रुपये फीस है।
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इसके अलावा किसी पाठ्यक्रम के बंद होने पर उसमें दिए जाने वाले पदक को दूसरे पाठ्यक्रम में दिया जा सकता है। इसकी भी निर्धारित प्रक्रिया है। गत 10 वर्षों में करीब 13 पाठ्यक्रम बंद हो चुके हैं। लेकिन इन पाठ्यक्रमों के पदक किसी अन्य पाठ्यक्रम में नहीं दिए जा रहे।
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पदक दिए जाने की यह प्रक्रिया है
किसी सम्मानित व्यक्ति या संस्था के नाम से पदक दिए जाने का प्रस्ताव रखा जाता है। प्रस्ताव में यह भी बताना होता है कि किस पाठ्यक्रम में पदक दिया जाना है। पहले कुलसचिव के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद प्रस्ताव को विद्या परिषद और कार्य परिषद में रखा जाता है।
इसमें यह देखा जाता है कि जिस व्यक्ति या संस्था के नाम पर पदक दिया जाना है, उसका शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में क्या योगदान है। इसके बाद प्रस्ताव संस्तुति के साथ राज्य सरकार को भेजा जाता है, वहां से अध्यादेश जारी होने के बाद संबंधित पाठ्यक्रम में पदक दिया जाता है।
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पदक दिए जाने की यह प्रक्रिया है
किसी सम्मानित व्यक्ति या संस्था के नाम से पदक दिए जाने का प्रस्ताव रखा जाता है। प्रस्ताव में यह भी बताना होता है कि किस पाठ्यक्रम में पदक दिया जाना है। पहले कुलसचिव के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद प्रस्ताव को विद्या परिषद और कार्य परिषद में रखा जाता है।
इसमें यह देखा जाता है कि जिस व्यक्ति या संस्था के नाम पर पदक दिया जाना है, उसका शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में क्या योगदान है। इसके बाद प्रस्ताव संस्तुति के साथ राज्य सरकार को भेजा जाता है, वहां से अध्यादेश जारी होने के बाद संबंधित पाठ्यक्रम में पदक दिया जाता है।
यदि कोई पाठ्यक्रम बंद हो जाता है, तो पदक को दूसरे पाठ्यक्रम में बदले जाने के लिए संबंधित प्रस्तावक के स्तर से फिर से वही प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। विश्वविद्यालय अपने स्तर से न तो कोई पदक बढ़ा सकता है और न ही कोई बदलाव कर सकता।
कई पाठ्यक्रमों के टॉपर्स को दीक्षांत समारोह में पदक नहीं मिलता, कारण संबंधित पाठ्यक्रमों में पदक नहीं है। पदक दिए जाने की प्रक्रिया लंबी है। चालू वर्ष में कोई नया पदक नहीं शामिल किया गया है। -डॉ. गिरिजाशंकर शर्मा, पीआरओ, विवि
कई पाठ्यक्रमों के टॉपर्स को दीक्षांत समारोह में पदक नहीं मिलता, कारण संबंधित पाठ्यक्रमों में पदक नहीं है। पदक दिए जाने की प्रक्रिया लंबी है। चालू वर्ष में कोई नया पदक नहीं शामिल किया गया है। -डॉ. गिरिजाशंकर शर्मा, पीआरओ, विवि