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विश्वविद्यालय में लॉकडाउन से डिग्री के आवेदकों की संख्या बढ़ी, ऑनलाइन आए प्रकरण
Sat, 04 Apr 2020 12:11 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 04 Apr 2020 12:11 AM IST
सार
20 मार्च से बंद है विश्वविद्यालय में कामकाज
14600 डिग्री के लिए आवेदन हैं लंबित
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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विस्तार
लॉकडाउन की घोषणा के पहले से ही 20 मार्च से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कामकाज बंद है। अधिकारी और कर्मचारी नहीं बैठ रहे हैं। ऐसी स्थिति में लंबित प्रकरणों की संख्या और बढ़ती जा रही है। छात्र-छात्राएं घर बैठे डिग्री आदि के लिए ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं। लॉकडाउन की अवधि में करीब 600 आवेदन डिग्री के लिए आए हैं।
विश्वविद्यालय में पहले ही डिग्री के लिए किए गए करीब 14000 आवेदन लंबित हैं। लॉकडाउन की अवधि में प्रोविजनल सर्टिफिकेट के लिए करीब 250 और माइग्रेशन सर्टिफिकेट के लिए 45 ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं।
लंबित प्रकरणों की संख्या बढ़ने का असर विश्वविद्यालय खुलने पर दिखाई देगा। छात्र-छात्राओं की भीड़ बढ़ेगी। कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार का कहना है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद लंबित प्रकरणों के निरस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। वर्तमान परिस्थिति में काम हो पाना संभव नहीं है।
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विश्वविद्यालय में पहले ही डिग्री के लिए किए गए करीब 14000 आवेदन लंबित हैं। लॉकडाउन की अवधि में प्रोविजनल सर्टिफिकेट के लिए करीब 250 और माइग्रेशन सर्टिफिकेट के लिए 45 ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं।
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लंबित प्रकरणों की संख्या बढ़ने का असर विश्वविद्यालय खुलने पर दिखाई देगा। छात्र-छात्राओं की भीड़ बढ़ेगी। कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार का कहना है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद लंबित प्रकरणों के निरस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। वर्तमान परिस्थिति में काम हो पाना संभव नहीं है।
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अभी परीक्षाएं संपन्न नहीं हो पाई हैं
लॉकडाउन की घोषणा से पहले विश्वविद्यालय खुले होने पर भी लंबित प्रकरणों के निस्तारण की गति धीमी हो गई थी, अधिकारी परीक्षा में उलझे हुए थे। अभी विश्वविद्यालय की परीक्षाएं बची हुई हैं। विश्वविद्यालय खुलने पर एक बार फिर से स्टाफ इस कार्य में लगेगा। ऐसे में लंबित प्रकरणों का निस्तारण चुनौतीपूर्ण ही होगा।
लॉकडाउन की घोषणा से पहले विश्वविद्यालय खुले होने पर भी लंबित प्रकरणों के निस्तारण की गति धीमी हो गई थी, अधिकारी परीक्षा में उलझे हुए थे। अभी विश्वविद्यालय की परीक्षाएं बची हुई हैं। विश्वविद्यालय खुलने पर एक बार फिर से स्टाफ इस कार्य में लगेगा। ऐसे में लंबित प्रकरणों का निस्तारण चुनौतीपूर्ण ही होगा।