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UP: वायु प्रदूषण से बच्चों में अस्थमा का खतरा, डॉक्टर बोले- सामान्य बुखार व खांसी में एंटीबायोटिक देने से बचें

Mon, 29 Sep 2025 08:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 29 Sep 2025 08:07 AM IST
सार

बच्चों को यदि सामान्य बुखार और खांसी हो जाए, तो उनको एंटीबायोटिक दवाएं दे दी जाती हैं। ये सही नहीं है।  डॉक्टरों सलाह दी है कि सामान्य बुखार-खांसी में एंटीबायोटिक देने से बचें।

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Doctors Warn Against Antibiotics for Kids’ Common Cold and Fever
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विस्तार

आगरा के आवास विकास कॉलोनी स्थित होटल में इंडियन पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन ने कार्यशाला कर बच्चों में अस्थमा, वायरल बुखार, निमोनिया समेत अन्य संक्रमण से बचाव और इलाज पर मंथन किया। डॉक्टरों ने माना के बढ़ते वायु प्रदूषण से अस्थमा बढ़ रहा है। सामान्य बुखार-खांसी में एंटीबायोटिक दवाएं देने से बचने की सलाह दी।
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झांसी के डॉ. घनश्याम चौधरी ने कहा कि वाहनों के धुएं, कचरा जलाने से अतिसूक्ष्म तत्व हवा में घुलकर सांस नलिकाओं में संक्रमण करती हैं। लंबे समय ऐसी स्थिति में रहने से बच्चों में अस्थमा बढ़ रहा है। फेफड़ों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है।
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नोएडा के डॉ. विनीत त्यागी ने कहा कि कई दिनों तक जुकाम-खांसी रहने से कान में संक्रमण हो सकता है। इससे सुनने की क्षमता कम होने और बहरेपन का खतरा रहता है। आगरा के डॉ. राकेश भाटिया ने कहा कि बच्चों में निमोनिया होने से फेफड़ों में संक्रमण हो रहा है। इससे बच्चे की जान का खतरा बढ़ जाता है।
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अलीगढ़ के डॉ. संजीव कुमार ने गंभीर हाल में निमोनिया के इलाज और बचाव के बारे में व्याख्यान दिया। अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने कहा कि वायरल इनफेक्शन में एंटीबायोटिक दवाएं नहीं दी जाएं। इनके देने से वायरल बुखार ठीक होने में 7-10 दिन लग जाते हैं।

सचिव डॉ. राहुल पैंगोरिया ने बताया कि बैक्टीरियल इन्फेक्शन में एंटीबायोटिक दी जानी चाहिए। इसमें बच्चों की सांस फूलती है, सांस लेने में तकलीफ होती है, ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। इस स्थिति में बच्चों के वजन के आधार पर दवाएं दें। हैवी एंटीबायोटिक दवाएं देने से रेजिस्टेंट होने का खतरा रहता है।

कार्यशाला में डॉ. स्वाति द्विवेदी, डॉ. आरएन शर्मा, डॉ. आरएन द्विवेदी, डॉ. अरुण जैन, डॉ. अमरकांत गुप्ता, डॉ. नीरज यादव, डॉ. मधु नायक, डॉ. संजय सक्सेना, डा. प्रीति जैन, डॉ. सोनिया भट आदि मौजूद रहे।

ये दिए सुझाव
झोलाछाप से इलाज न कराएं, बुखार-खांसी में खुद से दवा न दें।

धूल-धुआं वाले क्षेत्रों में बच्चों को जाने से बचाएं।
जुकाम-खांसी होने पर कान में परेशानी बनने पर चिकित्सक को दिखाएं।

कूड़ा-कचरा न जलाएं, आसपास साफ-सफाई रखें।
 
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