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विश्व अस्थमा दिवस: SNMC के डॉक्टरों का अध्ययन, रोगियों ने खुद बनाई गंभीर समस्या, 92 फीसदी ने छोड़ दी दवा
Tue, 02 May 2023 12:08 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Tue, 02 May 2023 12:08 PM IST
सार
आगरा में एसएन मेडिकल कॉलेज के के डॉक्टरों ने अस्थमा रोगियों पर अध्ययन किया। अध्ययन में पाया कि रोगियों ने अपनी समस्या को गंभीर खुद बनाया है। 92 फीसदी रोगियों ने बीच में ही दवा छोड़ दी।
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Agra: विश्व अस्थमा दिवस 2023
- फोटो : iStock
विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग में दमा (अस्थमा) के 350 मरीजों पर अध्ययन हुआ है। इसमें पाया कि 92 फीसदी मरीज नियमित दवा नहीं लेते। हालत बिगड़ने पर ये चिकित्सक को दिखाने आए। महज आठ फीसदी मरीज ही दवाएं नियमित ले रहे हैं। इनमें मर्ज गंभीर नहीं बना।
वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि ओपीडी में आने वाले दमा के 350 मरीजों पर 20 महीने तक अध्ययन किया। इसमें तीन बिंदुओं पर रिपोर्ट बनाई। पहली, बीमारी कब से है, ओपीडी में फॉलोअप कराने कितनी बार आए, दवा और इन्हेलर कब लिया, हालत में क्या अंतर मिला। इसमें पाया कि 330 मरीज ऐसे मिले, जिन्होंने दवा खाई और आराम मिलने के बाद दवा लेना बंद कर दिया। 90 फीसदी (325 मरीज) फॉलोअप में भी नहीं आए।
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वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि ओपीडी में आने वाले दमा के 350 मरीजों पर 20 महीने तक अध्ययन किया। इसमें तीन बिंदुओं पर रिपोर्ट बनाई। पहली, बीमारी कब से है, ओपीडी में फॉलोअप कराने कितनी बार आए, दवा और इन्हेलर कब लिया, हालत में क्या अंतर मिला। इसमें पाया कि 330 मरीज ऐसे मिले, जिन्होंने दवा खाई और आराम मिलने के बाद दवा लेना बंद कर दिया। 90 फीसदी (325 मरीज) फॉलोअप में भी नहीं आए।
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30-45 साल की उम्र के रहे सबसे ज्यादा मरीज
मौसम बदलने पर पुराने पर्चे पर दवा लेकर खा ली। जब अधिक खांसी हुई, सांस फूलने लगी, सीने में जकड़न और घर्र-घर्र की परेशानी बढ़ी तो ओपीडी में दिखाने आए। इनमें 30-45 साल की उम्र के सबसे ज्यादा मरीज रहे। महज आठ प्रतिशत (20 मरीज) मरीज ही नियमित दवाएं लेते रहे। वह चिकित्सक को तय दिन के बाद दिखाने भी आए।
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