अमर उजाला वेबिनार में विशेषज्ञ बोले: सुरक्षा और सेहत है संग तो कोरोना संक्रमण नहीं कर पाएगा तंग
अमर उजाला की ओर से सोमवार को वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर सलाह दी। बेविनार में कोरोना हराने वाले मरीजों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
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कोरोना संक्रमण से पहले, संक्रमण के दौरान और संक्रमण के बाद भी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना है। मास्क, सैनिटाइजेशन, सामाजिक दूरी आदि दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना है। तीनों ही अवधि में खानपान का विशेष ध्यान रखना है। सुरक्षा और सेहत साथ है तो कोरोना संक्रमण आपको तंग नहीं कर पाएगा। यह सुझाव विशेषज्ञों ने सोमवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित वेबिनार में दिए। इस दौरान कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की कैंसर रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुरभि गुप्ता ने कहा कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने संभावना जताई जा रही है। यह ध्यान रखना होगा कि बच्चों को खाने में जंक फूड न दें। पौष्टिक भोजन दें। उनमें आदत डालें कि मास्क लगाकर ही बाहर जाएं। सैनिटाइजर का विशेष ध्यान दिया जाए। अभी घर के सभी बड़े सदस्य कोरोना वैक्सीन लगवा लें और बच्चों के लिए टीका आ जाए तो उन्हें भी लगवाएं।
लेडी लॉयल जिला महिला चिकित्सालय की काउंसलर रूबी बघेल ने कहा कि होम आइसोलेशन में रहते हुए अपने शौक पर ध्यान दे सकते हैं, पसंदीदा किताबें पढ़ते हैं, घर के बजुर्गों के अनुभव का लाभ ले सकते हैं। वेबिनार अमर उजाला के फेसबुक पेज https://www.facebook.com/AuNewsAgra पर प्रसारण किया गया। कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों ने बताया कि उन्होंने किस तरह से सकारात्मक सोच और चिकित्सक की सलाह पर अमल कर जंग जीती।
विशेषज्ञों की सलाह
एसएन मेडिकल कॉलेज की कैंसर रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि संक्रमण से ठीक होने के बाद लोगों में तमाम समस्याएं आ रही हैं। इनमें थकान, सांस फूलना, चक्कर आना, भूख न लगना, खाने में स्वाद न आना, गंध न आना आदि हैं। इस तरह की समस्याएं ठीक होने के बाद 12 हफ्ते तक रह सकती हैं। यह अपने आप ठीक हो जाती हैं।
इस अवधि में संतुलित भोजन लें। सेहत का ध्यान रखें। निश्चित अवधि के बाद भी समस्या ठीक न होने पर चिकित्सक के परामर्श से इलाज कराएं। कोरोना से ठीक होने के तीन माह वैक्सीन जरूर लगवाएं। तंबाकू का सेवन न करें। ऐसे लोग संक्रमित होने पर गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। धूम्रपान से फेफड़े खराब हो जाते हैं। इसमें मौत का खतरा भी रहता है। रिकवरी भी कम होती है।
परिवार के साथ रिश्ते मजबूत रखें
लेडी लॉयल, जिला महिला चिकित्सालय की काउंसलर रूबी बघेल ने तनाव प्रबंधन का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि संक्रमित होने पर या उसके बाद लोग तनावग्रस्त हो रहे हैं। ऐसे में परिवार के साथ जरूरी है। रिश्तों को मजबूत रखें, तनाव दूर हो जाएगा। एक-दूसरे की भावनाओं को समझें। नकारात्मक बातों पर ध्यान न दें।
खानपान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। सकारात्मक सोच रखने वालों से संपर्क रखें। खुद को तनाव मुक्त रखने के लिए बागवानी कर सकते हैं। बच्चों के साथ खेल सकते हैं। टीवी पर कॉमेडी कार्यक्रम, चैनल देखें। पसंदीदा किताबे पढ़े। घर में रहते हुए रूटीन का ध्यान रखें। समय पर सोएं और समय पर खाएं। ध्यान व व्यायाम कर सकते हैं और गहरी सांसें लें।
छह सदस्य एक साथ संक्रमित हुए, हिम्मत नहीं हारी
राजकुमार गोयल ने बताया कि मेरे परिवार के छह सदस्य एक साथ कोरोना संक्रमित हो गए। चिकित्सक के परामर्श पर जरूरी जांचें कराकर सभी ने घर में रहकर इलाज किया। शुरू में मन विचलित हुआ पर खुद को संभालते हुए मन को मजबूत बनाया। पत्नी और बच्चों को भी सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित किया। ठीक होने के बाद याददाश्त पर असर पड़ रहा है। बाकी में पोस्ट कोविड के कुछ समस्याएं आ रही हैं।
सोशल मीडिया से बनाई दूरी, पसंदीदा किताबें पढ़ीं
मोहित कुमार ने कहा कि मुझे कोरोना संक्रमण के हल्के लक्षण आए। होम आइसोलेशन में रहकर दिशा-निर्देशों का पालन किया। सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। इस पर बहुत ज्ञान बंट रहा है। पसंदीदा किताबें पढ़ीं और पुरानी फिल्में देखीं। अब रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। आंख में जलन और गर्मी अधिक महसूस हो रही है। उम्मीद है कि पोस्ट कोविड समस्याएं भी जल्द ठीक हो जाएंगी।
एक-दूसरे का बढ़ाया मनोबल और जीत ली जंग
वीना सिंह ने कहा कि मेरे साथ परिवार के चार सदस्य कोरोना संक्रमित हो गए। इसमें पति के साथ बड़ा बेटा और बहू भी थे। मैं हृदय रोगी हूं, 23 अप्रैल को कोरोना की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अस्पताल में भर्ती होने के बजाय घर पर रहकर इलाज किया। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाया। ठीक होने के बाद 26 मई को कोरोना वैक्सीन भी लगवा ली है।
1- तनाव और चिंता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दें। हॉबी विकसित करें।
2- साफ-सफाई का ध्यान रखें, घर में भी सामाजिक दूरी का पालन करें, मास्क लगाएं।
3- आराम करना भी अच्छी थेरेपी है। अच्छी किताबें पढ़ें और पूजा करें।
4- खाने में सलाद, अंकुरित चना के साथ प्रोटीन लें। तरल पदार्थों का खूब सेवन करें।
5- मधुमेह, हृदय रोगी अपनी दवाएं न छोड़ें। चिकित्सक की सलाह से ही दवा लें।
6- अपने मन से स्टेरॉइड न लें। यह ब्लैक फंगस का कारण भी बन सकता है।