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रुला देगा इस गुरु का दर्द: आर्मी एजुकेशन कोर में रहे शिक्षक, कई को बना दिया मेजर-जनरल; अब रोटी तक नहीं नसीब
Sat, 02 May 2026 11:01 PM IST
Arun Parashar
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sat, 02 May 2026 11:01 PM IST
सार
आगरा में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें अंग्रेजी में पीएचडी डॉ. संतोष गोयल अपने बारे में बता रहे हैं। वह नेत्रहीन हैं और देश की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल डिफेंस एकेडमी में भविष्य के सैन्य अधिकारियों को शिक्षा दे चुके हैं।
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डाॅक्टर संतोष गोयल।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सेना के अफसरों को गढ़ने वाले गुरुजी का शनिवार को सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया, जो पूरे दिन चर्चाओं में रहा। जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर अजय मिश्रा के साथ उनकी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर छाया है। वर्ष 1971 में अंग्रेजी में पीएचडी डॉ. संतोष गोयल अपने बारे में बता रहे हैं। वह नेत्रहीन हैं और देश की प्रतिष्ठित संस्था नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला में भविष्य के सैन्य अधिकारियों को शिक्षा दी थी।
वीडियो में वह बता रहे हैं कि वे आर्मी एजुकेशन कोर में शिक्षक रह चुके हैं। उनके पढ़ाए हुए छात्र आज भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, कैप्टन, मेजर से लेकर जनरल तक के पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं। तीन साल तक एनडीए में सेवाएं देने के बाद आंखों की रोशनी खराब होने के कारण उन्हें बोर्ड आउट कर दिया गया। डॉ. गोयल का कहना है कि यदि उनकी सेवा 15 साल पूरी होती, तो आज वे सम्मानजनक पेंशन पा रहे होते, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
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वीडियो में वह बता रहे हैं कि वे आर्मी एजुकेशन कोर में शिक्षक रह चुके हैं। उनके पढ़ाए हुए छात्र आज भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, कैप्टन, मेजर से लेकर जनरल तक के पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं। तीन साल तक एनडीए में सेवाएं देने के बाद आंखों की रोशनी खराब होने के कारण उन्हें बोर्ड आउट कर दिया गया। डॉ. गोयल का कहना है कि यदि उनकी सेवा 15 साल पूरी होती, तो आज वे सम्मानजनक पेंशन पा रहे होते, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
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मंदिर में बसेरा और ढोकले पर गुजारा
डॉ. गोयल आगरा के नगला पदी स्थित एक मंदिर में अपना समय व्यतीत करते हैं। दांत न होने के कारण वे रोटी नहीं खा पाते, इसलिए पास ही स्थित देवीराम मिष्ठान भंडार से मिलने वाले भोग (ढोकले और लड्डू) से अपना पेट भरते हैं। इतनी तंगहाली और शारीरिक अक्षमता के बावजूद उनके भीतर का शिक्षक आज भी जीवित है। वे मंदिर में आने वाले छात्रों को शेक्सपियर के नाटकों (मर्चेंट ऑफ वेनिस, जूलियस सीजर) से लेकर मिल्टन और कीट्स की कविताओं तक का मार्गदर्शन निशुल्क देते हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग उनके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।
ये भी पढ़ें-आगरा में बड़ा हादसा: दूसरी मंजिल से गिरा गर्डर, तीन मजदूर भी जमीन पर आ गिरे; तीनों की दर्दनाक माैत
डॉ. गोयल आगरा के नगला पदी स्थित एक मंदिर में अपना समय व्यतीत करते हैं। दांत न होने के कारण वे रोटी नहीं खा पाते, इसलिए पास ही स्थित देवीराम मिष्ठान भंडार से मिलने वाले भोग (ढोकले और लड्डू) से अपना पेट भरते हैं। इतनी तंगहाली और शारीरिक अक्षमता के बावजूद उनके भीतर का शिक्षक आज भी जीवित है। वे मंदिर में आने वाले छात्रों को शेक्सपियर के नाटकों (मर्चेंट ऑफ वेनिस, जूलियस सीजर) से लेकर मिल्टन और कीट्स की कविताओं तक का मार्गदर्शन निशुल्क देते हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग उनके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।
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