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‘मरीज बोझ नहीं’, समझाएंगे डाक्टर

Mon, 05 Oct 2015 01:40 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Mon, 05 Oct 2015 01:40 AM IST
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doctor explain, that "The patient have not burden '
लकवा, मिर्गी, अल्जाइमर जैसी बीमारी। मतलब शरीर और नर्वस सिस्टम तक का फेल हो जाना। ऐसे मरीजों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन परिवारीजनों की नजर में ये बोझ बन जाते हैं। न्यूरोफिजीशियन अब इस सोच का भी इलाज करेंगे। इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी ऐसे मरीजाें के प्रति संवेदनशीलता बरतने की अपील करेंगे। यह निर्णय एनुअल कांफ्रेंस ऑफ इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी (इनकॉन-2015) के 23वें राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन पर एकेडमी ने लिया।
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होटल जेपी पैलेस में चार दिन तक दुनिया भर के विशेषज्ञों ने तंत्रिकातंत्र से संबंधी बीमारियों पर चर्चा की। रविवार को एकेडमी ने न्यूरोफिजीशियन को अपनी ओपीडी में न्यूरो सेंटर खोलने के निर्देश दिए। वर्ल्ड ब्रेन डे (22 जुलाई) और राष्ट्रीय मस्तिष्क सप्ताह (18-24 दिसंबर) पर कांफ्रेंस, संगोष्ठी कर जनजागरण चलाया जाएगा। इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के सचिव डा. गगनदीप सिंह ने बताया कि मरीजों की दूसराें पर निर्भरता अधिक रहती है। अनदेखी और गलत व्यवहार से विपरीत प्रभाव पड़ता है। इलाज के साथ परिजनों को इन्हें बोझ न समझ, अच्छा व्यवहार करने को बताएंगे।
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मेडिकल कालेजाें में डीएम न्यूरोलॉजी की पढ़ाई
तंत्रिकातंत्र की बीमारी बढ़ रही है। इसके विशेषज्ञों की संख्या काफी कम है। इसके लिए सोसाइटी ने प्रत्येक मेडिकल कालेज में डीएम न्यूरोलॉजी की पढ़ाई की मांग की है। इसके लिए इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी प्रदेश सरकार से सिफारिश करेगी। अभी प्रदेश में लखनऊ और बनारस के मेडिकल कालेज में ही कोर्स संचालित है।
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भारतीय रखते हैं ‘आइंस्टीन’ का दिमाग
भारतीयों का डंका दुनिया भर में यू हीं नहीं बजता। तकनीकी, चिकित्सा, मैनेजमेंट जैसे क्षेत्र में इनके दिमाग का कोई मुकाबला नहीं। भारतीयाें के दिमाग का लोहा वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी के अध्यक्ष डा. राद शाकिर भी मानते हैं। कहते हैं कि तंत्रिकातंत्र की बीमारी का इलाज करने में भारतीयों का कोई मुकाबला नहीं। प्रो. शाकिर इसके पीछे भारतीयों के जानने की ललक को बड़ी वजह मानते हैं। क्या किसी का दिमाग महान विज्ञानी एल्बर्ट आइंस्टीन जैसा हो सकता है। इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि व्यक्ति का आईक्यू ही अंतर पैदा करता है। मस्तिष्क समान रहते हैं।
चिकित्सकों को दिए प्रशस्ति पत्र
डा. सुभाष कौल इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के अध्यक्ष बने और डा. श्रीनिवास इलेक्ट प्रेसीडेंट। इनको प्रशस्ति पत्र दिए गए। 2016 की कांफ्रेंस कोलकाता और 2017 की चेन्नई में होगी। बेस्ट पोस्टर का पुरस्कार हैदराबाद की डा. जयश्री को, दूसरा पुरस्कार नई दिल्ली की डा. रूबी चोपड़ा को मिला। क्विज में डा. बीडी पटेल और डा. इंद्रपाल विजेता रहे।

कांफ्रेंस में रहे 2000 डाक्टर
इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के अध्यक्ष डा. सुभाष कौल ने आगरा में हुई कांफ्रेंस को बेहतर बताया। यहां सर्वाधिक दो हजार डाक्टर शामिल हुए। एकेडमिक सेशन में विख्यात न्यूरोफिजीशियन ने बीमारी पर विस्तृत चर्चा की।  
- देश-दुनिया के डाक्टर आए। बीमारी और इलाज पर एक-दूसरे चिकित्सकाें के अनुभव बांटे। मरीजों के इलाज में यह बेहद फायदेमंद रहेगा।
- प्रो. पीके माहेश्वरी संयोजक, मेडिसिन विभागाध्यक्ष, एसएनएमसी
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