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आगरा किला के दीवान-ए-आम में दरारेंः ध्वनि की फ्रीक्वेंसी समान होने से दरार संभव, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
Wed, 15 Feb 2023 08:46 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 15 Feb 2023 08:46 AM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि ध्वनि तरंगों से प्राचीन इमारतों को नुकसान हो सकता है। यह तय करना जरूरी है कि ध्वनि सीमा कितनी होनी चाहिए।
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दीवान-ए-आम में आईं दरारें
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा किले के दीवान-ए-आम में 10 से ज्यादा जगहों पर आई दरार के मामले में भौतिक विज्ञान के विशेषज्ञों का मानना है कि ध्वनि की तरंगों की फ्रीक्वेंसी दीवान-ए-आम में उपयोग हुए मैटेरियल से समान होने के कारण दरार संभव है। जो साउंड सिस्टम उपयोग किया गया, उसे निर्धारित मानक से ज्यादा तेज बजाने पर रेजोंनेंस के कारण भी दरारें संभव हैं।
आरबीएस कालेज के भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. रामवीर सिंह चौहान ने बताया कि जिस समय दीवान-ए-आम का निर्माण हुआ था, उस दौरान इस तरह के तेज आवाज और धमक वाले साउंड सिस्टम नहीं थे। इमारत मजबूत थी लेकिन 500 साल में इमारत का संरक्षण और पत्थरों की पकड़ कमजोर हुई। इस वजह से तेज ध्वनि की धमक और तरंगों से ये दरारें आई होंगी। यही वजह है कि किसी भी पुल पर सैनिक मार्च पास्ट नहीं करते।
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आरबीएस कालेज के भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. रामवीर सिंह चौहान ने बताया कि जिस समय दीवान-ए-आम का निर्माण हुआ था, उस दौरान इस तरह के तेज आवाज और धमक वाले साउंड सिस्टम नहीं थे। इमारत मजबूत थी लेकिन 500 साल में इमारत का संरक्षण और पत्थरों की पकड़ कमजोर हुई। इस वजह से तेज ध्वनि की धमक और तरंगों से ये दरारें आई होंगी। यही वजह है कि किसी भी पुल पर सैनिक मार्च पास्ट नहीं करते।
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दोहरी है दीवान-ए-आम की छत, भरे हैं घड़े
आगरा किले के दीवान-ए-आम की छत दोहरी है। यानी जो छत नीचे से नजर आती है और जो ऊपर है, उसके बीच में 6 फुट का अंतर है। इस छह फुट में मिट्टी के बड़े घड़े भरे हुए हैं। नीचे वाली छत में पतले पत्थरों के बीम है, जिस पर पत्थर रखकर उनके बीच के जोड़ को मोर्टार से भरा गया है। साउंड सिस्टम की तेज धमक से पतले पत्थरों के बीच वाइब्रेशन हुए और इसका नतीजा दरार के रूप में सामने आया है। यह छत कई जगह मोटी और कई जगह पतली है। 500 साल में इस इमारत में कई बार बदलाव भी किए गए हैं।
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