कासगंज: जेल के बंदीरक्षक को गोली मारी, खून से लथपथ बाइक चलाते खुद पहुंचा चौकी, तहकीकात में जुटी पुलिस
पुलिस ने मौके से एक तमंचा बरामद किया है। दावा है कि यही तमंचा घटना में प्रयुक्त हुआ। अब पुलिस इस तमंचे की फॉरेंसिक जांच करा रही है। फिर संदिग्धों की भी फॉरेंसिक जांच कराकर पुलिस स्पष्ट करेगी कि तमंचा किसके हाथ से चला है। फिर यह राज खोलने में तमंचा बेहद मददगार साबित होगा।
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कासगंज जेल में तैनात बंदीरक्षक को गुरुवार दिनदहाड़े गोली मार दी गई। खून से लथपथ हालत में बंदी रक्षक खुद बाइक चलाते हुए पुलिस चौकी पहुंचा। जहां से जेल के आरक्षी और सोरों कोतवाली पुलिस उसे उपचार के लिए संयुक्त अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में चिकित्सकों ने उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। गोली मारने का आरोप जेल के कैंटीन संचालक पर है। हालांकि पुलिस मामले को संदिग्ध मान रही है।
बंदीरक्षक अजीत गौतम पुत्र पूरन गौतम निवासी गांव मघेरा थाना वृंदावन जिला मथुरा करीब पांच साल से कासगंज जिला कारागार में तैनात है। फिलहाल वह आधिकारिक रूप से अवकाश पर था। बंदीरक्षक गुरुवार को सुबह लगभग 11:30 बजे पचलाना जेल रोड से गुजर रहा था। जहां उसे गोली मार दी गई।
पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया
खून से लथपथ हालत में वह जब पचलाना पुलिस चौकी पहुंचा तो उसने गोली मारने का आरोप जेल के कैंटीन संचालक दिनेश पर लगाया। बंदीरक्षक को आनन फानन संयुक्त अस्पताल भेजा गया। उसके पेट में गोली लगी है और काफी रक्तस्राव हो चुका है। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया है। इधर घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। बताया गया कि बुधवार की रात कैंटीन संचालक और बंदीरक्षक के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था।
पुलिस चौकी से सौ मीटर दूर की वारदात
जेल के बंदीरक्षक के साथ हुई वारदात के खुलासे को पुलिस सक्रिय है। दावा किया जा रहा है कि वारदात का जल्द खुलासा हो जाएगा। पुलिस को इस संबंध में अहम सुराग मिले हैं और तथ्यों के आधार पर मामले की संदिग्धता बढ़ती जा रही है। इधर यह वारदात जेल और पचलाना चौकी से सौ मीटर दूरी पर हुई। दिन दहाड़े गोली की आवाज सुन दहशत का माहौल बन गया। लोग घटना स्थल की ओर दौड़े। हालांकि तब तक आरक्षी हिम्मत दिखाते हुए पुलिस चौकी पहुंच गया था। घटना की सच्चाई जो भी हो, लेकिन यह जरूर है कि पुलिस चौकी और जेल के बाहर हुई यह वारदात चुनौतीपूर्ण है। हांलाकि घटना सौ मीटर दूर सूनसान इलाके में हुई है। फिर भी पुलिस ने आस पास लोगों से जानकारी की है तो कई अहम सुराग भी पुलिस को मिल चुके हैं। इधर क्षेत्र में दहशत का माहौल जरूर है। क्योंकि दिनदहाड़े गोलीकांड की घटना होना असुरक्षा के संकेत हैं।
तमंचा खोलेगा वारदात का राज
पुलिस ने मौके से एक तमंचा बरामद किया है। दावा है कि यही तमंचा घटना में प्रयुक्त हुआ। अब पुलिस इस तमंचे की फॉरेंसिक जांच करा रही है। फिर संदिग्धों की भी फॉरेंसिक जांच कराकर पुलिस स्पष्ट करेगी कि तमंचा किसके हाथ से चला है। फिर यह राज खोलने में तमंचा बेहद मददगार साबित होगा।
6 से 9 अक्टूबर तक का स्वीकृत है अवकाश
बंदीरक्षक ने घर जाने के लिए 6 से 9 अक्टूबर तक का अवकाश जेल प्रशासन से लिया था। यहां सवाल उठ रहा है कि वह तीन दिन के अवकाश पर था तो फिर जेल में आना जाना क्यूं था। इस पहलू पर भी पुलिस जांच कर रही है।
जेलर एएन सिंह के मुताबिक बंदीरक्षक अजीत गौतम 18 अक्टूबर 2016 में कासगंज जेल से संबद्ध हुआ था। उसकी मूल तैनाती फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में है। वहां से संबद्धीकरण पर वह कासगंज में तैनात था।
एसपी रोहन प्रमोद बोत्रे, सीओ सिटी दीपकुमार पंत, सोरों कोतवाली प्रभारी अनिल कुमार, गंजडुंडवारा कोतवाली प्रभारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू की और फॉरेंसिक जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम बुलाई। टीम ने नमूने संकलित किए हैं।
मौके पर पहुंचकर घटना का निरीक्षण किया है प्रथम दृष्टया घटना संदिग्ध लग रही है। घटना में प्रयुक्त तमंचा बरामद कर लिया गया है। पूछताछ के लिए कैंटीन संचालक को हिरासत में लिया गया है। फॉरेंसिक टीम बुलाकर नमूने संकलित कराए हैं। जांच में जो भी सच्चाई होगी उसके आधार पर विधिक कार्रवाई होगी। फिलहाल कोई तहरीर नहीं मिली है। - रोहन प्रमोद बोत्र, एसपी
बंदीरक्षक तीन दिन के अवकाश पर था। घटना जेल के बाहर की है। वारदात को किसने अंजाम दिया। कारण क्या रहा इसकी कोई जानकारी नहीं है। बंदीरक्षक का उपचार अलीगढ़ में चल रहा है। - एएन सिंह, जेलर
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