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Agra News: वन स्टॉप सेंटर के निरीक्षण पर बढ़ी तकरार, आरोपों का सिलसिला जारी
Wed, 01 Jul 2026 12:30 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 01 Jul 2026 12:30 AM IST
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मैनपुरी। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की एक सदस्य द्वारा मैनपुरी के सखी वन स्टॉप सेंटर के निरीक्षण पर सरकार और अधिकारी के बीच तकरार शुरू हो गई है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने निरीक्षण के संबंध में केंद्र प्रशासक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और आयोग की सदस्य पर विभाग की छवि धूमिल करने का आरोप भी लगाया। आयोग की सदस्य ने इस कार्रवाई को अपनी वैधानिक गरिमा और अधिकार क्षेत्र पर सीधा प्रश्नचिह्न बताया है। आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने मामले की शिकायत अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण विभाग और महिला आयोग की अध्यक्ष से की है।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने 28 जून को महिलाओं के हितों के संरक्षण और संस्थान की कार्यप्रणाली जांचने के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर मैनपुरी का निरीक्षण किया था। इसमें उन्हें यहां कई प्रकार की अव्यवस्थाएं मिली थीं। इस पर जिला प्रोबेशन अधिकारी राजनाथ राम ने आरोप लगाया कि आयोग की सदस्य को बिना अनुमति केंद्र में प्रवेश कराया गया। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि निरीक्षण के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है।
इसके बाद आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण विभाग और महिला आयोग की अध्यक्ष व डीएम मैनपुरी को भेजे गए पत्र में प्रोबेशन अधिकारी की प्रतिक्रिया को विधिक रूप से आपत्तिजनक बताया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि आयोग महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और संस्थाओं के निरीक्षण के लिए गठित एक वैधानिक निकाय है। निरीक्षण का मूल उद्देश्य ही बिना पूर्व सूचना के वास्तविक स्थिति का आकलन करना होता है। पत्र में कहा गया है कि ऐसी कार्रवाई भविष्य में उसके निरीक्षण कार्यों में बाधा डाल सकती है। यह शासन और आयोग के बीच समन्वय की भावना के भी विपरीत है।
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प्राेबेशन अधिकारी पर पूर्व में भी लग चुके है आरोप
महिला आयोग की सदस्य ने अपने पत्र में बताया है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ पूर्व में भी महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार और उत्पीड़न की शिकायतें सामने आई हैं। यह अधिकारी नियमित जिला प्रोबेशन अधिकारी नहीं हैं, बल्कि केवल प्रभार के रूप में कार्य देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी वैधानिक शक्तियों का समुचित ज्ञान नहीं है। इसी कारण उन्होंने आयोग की सदस्य के निरीक्षण को अनुचित ठहराने का प्रयास किया।
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उच्चस्तरीय जांच की मांग
आयोग की सदस्य ने अपर मुख्य सचिव, महिला कल्याण विभाग से इस प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी से वैधानिक शक्तियों की अवहेलना पर स्पष्टीकरण मांगने की मांग की है। साथ ही, प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों और सखी वन स्टॉप सेंटरों के लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करने को कहा है। इस शासनादेश में यह स्पष्ट हो कि आयोग के औचक निरीक्षण के लिए किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
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जिले में वन स्टॉप सेंटर के लिए मीना कुमारी को नामित किया गया है। ऐसे में कोई और सेंटर का निरीक्षण बिना अनुमति के कैसे कर सकता है। उन्होंने नियम विरुद्ध निरीक्षण किया और वह भी रात में जो कि नियम संगत नहीं है। -राजनाथ राम, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने 28 जून को महिलाओं के हितों के संरक्षण और संस्थान की कार्यप्रणाली जांचने के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर मैनपुरी का निरीक्षण किया था। इसमें उन्हें यहां कई प्रकार की अव्यवस्थाएं मिली थीं। इस पर जिला प्रोबेशन अधिकारी राजनाथ राम ने आरोप लगाया कि आयोग की सदस्य को बिना अनुमति केंद्र में प्रवेश कराया गया। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि निरीक्षण के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है।
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इसके बाद आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण विभाग और महिला आयोग की अध्यक्ष व डीएम मैनपुरी को भेजे गए पत्र में प्रोबेशन अधिकारी की प्रतिक्रिया को विधिक रूप से आपत्तिजनक बताया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि आयोग महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और संस्थाओं के निरीक्षण के लिए गठित एक वैधानिक निकाय है। निरीक्षण का मूल उद्देश्य ही बिना पूर्व सूचना के वास्तविक स्थिति का आकलन करना होता है। पत्र में कहा गया है कि ऐसी कार्रवाई भविष्य में उसके निरीक्षण कार्यों में बाधा डाल सकती है। यह शासन और आयोग के बीच समन्वय की भावना के भी विपरीत है।
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प्राेबेशन अधिकारी पर पूर्व में भी लग चुके है आरोप
महिला आयोग की सदस्य ने अपने पत्र में बताया है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ पूर्व में भी महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार और उत्पीड़न की शिकायतें सामने आई हैं। यह अधिकारी नियमित जिला प्रोबेशन अधिकारी नहीं हैं, बल्कि केवल प्रभार के रूप में कार्य देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी वैधानिक शक्तियों का समुचित ज्ञान नहीं है। इसी कारण उन्होंने आयोग की सदस्य के निरीक्षण को अनुचित ठहराने का प्रयास किया।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
आयोग की सदस्य ने अपर मुख्य सचिव, महिला कल्याण विभाग से इस प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी से वैधानिक शक्तियों की अवहेलना पर स्पष्टीकरण मांगने की मांग की है। साथ ही, प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों और सखी वन स्टॉप सेंटरों के लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करने को कहा है। इस शासनादेश में यह स्पष्ट हो कि आयोग के औचक निरीक्षण के लिए किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
जिले में वन स्टॉप सेंटर के लिए मीना कुमारी को नामित किया गया है। ऐसे में कोई और सेंटर का निरीक्षण बिना अनुमति के कैसे कर सकता है। उन्होंने नियम विरुद्ध निरीक्षण किया और वह भी रात में जो कि नियम संगत नहीं है। -राजनाथ राम, जिला प्रोबेशन अधिकारी