Dhanteras 2020: ये शुभ संयोग धनतेरस को बना रहे और खास, जानिए कब है पर्व
दीपोत्सव पर्व का शुभारंभ धनतेरस से होता है। इस वर्ष धनतेरस दो दिन मनेगी। पारंपरिक पंचांगों की गणना के अनुसार धनतेरस का पर्व 12 नवंबर गुरुवार को तो आधुनिक पंचांगों के अनुसार 13 नवंबर शुक्रवार को है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि दीपपर्व पर्वकालीन तिथियों में मनाया जाता है। धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार धनतेरस और दिवाली का पर्व मनाने में प्रदोषकाल की ही महत्ता है। सूर्यास्त के बाद छह घड़ी अर्थात दो घंटे 24 मिनट का समय प्रदोषकाल माना जाता है।
दोनों पंचांगों की धनतेरस की स्थिति
ज्योतिषाचार्य के अनुसार पारंपरिक गणना आधारित पंचांगों में धनतेरस 12 नवंबर गुरुवार को शाम 6 बजकर 01 मिनट से शुरू होकर 13 नवंबर शुक्रवार को दोपहर तीन बजकर 45 मिनट तक रहेगी। वहीं आधुनिक पंचांगों के अनुसार धनतेरस 12 नवंबर को रात 9 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी, जो 13 नवंबर शुक्रवार को शाम 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। दोनों पंचागों में प्रदोषकाल में त्रयोदशी विद्यमान है।
13 नवंबर को ही पर्व मनाना अधिक श्रेयस्कर
ज्योतिषाचार्य आचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि 13 नवंबर को त्रयोदशी पर्वकालीन के साथ उदयकाल में भी है, जो श्रेष्ठ है। 13 नवंबर को पर्वकालीन त्रयोदशी, शुक्रवार, चित्रा, स्वाति नक्षत्र का संयोग, प्रीति और आयुष्मान योग एवं बुधादित्य योग इस पर्व को कुछ खास बना रहे हैं।
13 नवंबर को तेरस, 14 को प्रातः रूप चौदस और प्रदोषकाल में दीपावली और महालक्ष्मी पूजन, 15 को गोवर्धन पूजा व अन्नकूट तथा 16 नवंबर को भैया दूज का पर्व मनाना धर्म सम्मत व श्रेयस्कर भी है। देश भर के अदिकांश पंचांगों की गड़ना व मान्यता के अनुसार धन त्रयोदशी का पर्व 13 नवंबर शुक्रवार को मनाना ही उचित और श्रेयस्कर है।