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हिस्ट्रीशीटर का खाैफ: 10 लाख की मांगी रंगदारी, दहशत में ढाबा संचालक का पलायन; थाना पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
Sun, 03 May 2026 03:18 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 03 May 2026 03:18 PM IST
सार
पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए मोनू यादव पुराने मुकदमे में जमानत तुड़वाकर जेल चला गया था। बताया जा रहा है कि 16 अप्रैल को जेल से छूटने के बाद आरोपी फिर सक्रिय हो गया। पीड़ित राजू का आरोप है कि जेल से बाहर आने के अगले ही दिन 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई।
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हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के ट्रांसयमुना क्षेत्र में हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि ढाबा संचालक परिवार समेत घर छोड़ने को मजबूर हो गया। पीड़ित ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर ट्रांसयमुना थाना पुलिस पर आरोपी को बचाने और मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव का नाम 23 जनवरी को हुए चर्चित राज चौहान हत्याकांड में भी सामने आया था।
नगला रामबल निवासी राजू ने बताया कि कालिंदी विहार के 100 फुटा मार्ग पर उसका ढाबा है। आरोप है कि हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव अपने साथियों के साथ ढाबे पर आता था और बिना रुपये दिए खाना खाकर चला जाता था। इससे परेशान होकर उसने ढाबा किराये पर दे दिया। राजू के अनुसार 22 जनवरी को पंचमुखी मंदिर के पास मोनू यादव, रजत यादव, सेठी यादव, सोनू यादव और मुरली यादव ने उसे घेर लिया। उसको बेरहमी से पीटा। आरोप है कि मोनू यादव ने उस पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग भी की, लेकिन वह बाल-बाल बच गया। 23 जनवरी को चर्चित रंगबाज राज चौहान की हत्या के बाद मोनू यादव का नाम फिर सुर्खियों में आया था।
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नगला रामबल निवासी राजू ने बताया कि कालिंदी विहार के 100 फुटा मार्ग पर उसका ढाबा है। आरोप है कि हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव अपने साथियों के साथ ढाबे पर आता था और बिना रुपये दिए खाना खाकर चला जाता था। इससे परेशान होकर उसने ढाबा किराये पर दे दिया। राजू के अनुसार 22 जनवरी को पंचमुखी मंदिर के पास मोनू यादव, रजत यादव, सेठी यादव, सोनू यादव और मुरली यादव ने उसे घेर लिया। उसको बेरहमी से पीटा। आरोप है कि मोनू यादव ने उस पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग भी की, लेकिन वह बाल-बाल बच गया। 23 जनवरी को चर्चित रंगबाज राज चौहान की हत्या के बाद मोनू यादव का नाम फिर सुर्खियों में आया था।
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मृतक राज चौहान की मां ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मोनू यादव को हत्या का मुख्य साजिशकर्ता बताया था। वीडियो वायरल होने के बावजूद पुलिस ने उसे मामले में साजिशकर्ता नहीं बनाया। सूत्रों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए मोनू यादव पुराने मुकदमे में जमानत तुड़वाकर जेल चला गया था। बताया जा रहा है कि 16 अप्रैल को जेल से छूटने के बाद आरोपी फिर सक्रिय हो गया। पीड़ित राजू का आरोप है कि जेल से बाहर आने के अगले ही दिन 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई।
पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में पुलिस आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। इसके बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहा है और लगातार धमकियां दे रहा है। शुक्रवार को ढाबा संचालक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि वह घर छोड़ने को मजबूर हो गया है। उसने पुलिस पर आरोपी से मिलीभगत का आरोप लगाया है। पीड़ित ने दावा किया कि पुलिस को मोनू यादव के खिलाफ दर्ज करीब 25 मुकदमों की सूची भी सौंपी है। इसके बावजूद उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही। परिवार ने पुलिस आयुक्त से सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में पुलिस आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। इसके बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहा है और लगातार धमकियां दे रहा है। शुक्रवार को ढाबा संचालक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि वह घर छोड़ने को मजबूर हो गया है। उसने पुलिस पर आरोपी से मिलीभगत का आरोप लगाया है। पीड़ित ने दावा किया कि पुलिस को मोनू यादव के खिलाफ दर्ज करीब 25 मुकदमों की सूची भी सौंपी है। इसके बावजूद उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही। परिवार ने पुलिस आयुक्त से सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
ये उठ रहे सवाल
- राज चौहान हत्याकांड में नाम आने के बाद भी मोनू यादव पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया?
- जेल से छूटते ही रंगदारी और धमकी के आरोप के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
- पीड़ित परिवार को सुरक्षा क्यों नहीं मिली?
- क्या स्थानीय पुलिस पर लगे मिलीभगत के आरोपों की जांच होगी?
- पूर्व थाना प्रभारी पर लगे संरक्षण के आरोपों की जांच क्यों नहीं हुई?
- वायरल वीडियो से बढ़ी पुलिस की मुश्किलें
- ढाबा संचालक की ओर से सोशल मीडिया पर जारी वीडियो के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। वीडियो में पीड़ित ने साफ कहा है कि यदि उसके परिवार को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव की होगी।
- राज चौहान हत्याकांड में नाम आने के बाद भी मोनू यादव पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया?
- जेल से छूटते ही रंगदारी और धमकी के आरोप के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
- पीड़ित परिवार को सुरक्षा क्यों नहीं मिली?
- क्या स्थानीय पुलिस पर लगे मिलीभगत के आरोपों की जांच होगी?
- पूर्व थाना प्रभारी पर लगे संरक्षण के आरोपों की जांच क्यों नहीं हुई?
- वायरल वीडियो से बढ़ी पुलिस की मुश्किलें
- ढाबा संचालक की ओर से सोशल मीडिया पर जारी वीडियो के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। वीडियो में पीड़ित ने साफ कहा है कि यदि उसके परिवार को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव की होगी।