फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Delta infected up to 85 percent of the lungs patients admitted in sn medical college

कोरोना वायरस: डेल्टा वैरिएंट से फेफड़ों 85 फीसदी तक हुए थे संक्रमित, पहली लहर के वायरस से 65 गुना खतरनाक

Wed, 04 Aug 2021 10:26 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 04 Aug 2021 10:26 AM IST
सार

एसएन कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि अप्रैल-मई में एसएन के कोविड अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों में फेफड़ों में भयंकर संक्रमण मिला।

विज्ञापन
Delta infected up to 85 percent of the lungs patients admitted in sn medical college
delta - फोटो : istock

विस्तार

अप्रैल-मई में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने लोगों के फेफड़े संक्रमित कर दिए थे। एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे करीब 800 मरीजों में 95 फीसदी के फेफड़े 50 से 85 फीसदी तक संक्रमित मिले। मरीजों की मौत की यही सबसे बड़ी वजह भी रही। एसएन कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि अप्रैल-मई में एसएन के कोविड अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों में फेफड़ों में भयंकर संक्रमण मिला। यहां तक कि 30 से 40 साल के उम्र के मरीजों में भी 50 से 85 फीसदी तक फेफड़े खराब हो गए थे। इनको सांस लेने में परेशानी हो रही थी, हाई फ्लो ऑक्सीजन या फिर आईसीयू में रखना पड़ा। ऐसे मरीजों की मौत ज्यादा हुई। उस वक्त वायरस के वैरिएंट की पहचान नहीं हो पाई थी, लेकिन पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में मरीजों में निमोनिया और फेफड़ों में संक्रमण तीन से पांच गुना ज्यादा मिला। इसी के चलते यह तेजी से फैला और मौतें ज्यादा हुईं। पांच फीसदी ऐसे मरीज थे, जिनको मधुमेह, किडनी, कैंसर, टीबी, हृदय रोग जैसी अन्य गंभीर रोगों की वजह से हालत खराब हुई और दम तोड़ दिया। 

विज्ञापन


गंध-स्वाद प्रभावित वाले मरीज जल्द ठीक हुए
कोविड मरीजों का इलाज करने वाले एसएन के फिजीशियन डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि यह देखने में मिला, संक्रमित होने के बाद जिन मरीजों को गंध न आने, स्वाद का पता न चलने वाले मरीजों की हालत कम गंभीर मिली, वायरस का प्रभाव फेफड़ों पर कम पड़ा, जिस कारण वह जल्दी ठीक हुए और आईसीयू में भर्ती करने की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ी। 

विज्ञापन

डेल्टा पहली लहर के वायरस से 65 गुना खतरनाक
एसएन कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि जीनोम सीक्वेंसिंग में पता चला कि डेल्टा वैरिएंट पहली लहर के वायरस से लगभग 65 गुना ज्यादा खतरनाक मिला। यह वैरिएंट फेफड़ों तक तेजी से फैला, जिससे फेफड़े खराब हुए। इससे ऑक्सीजन का स्तर कम हुआ और मरीजों की हालत गंभीर होती गई।  

फेफड़ों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा 
एसएन के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल ने बताया कि दूसरी लहर में डेल्टा वैरिएंट उनके लिए ज्यादा खतरनाक रहा, जिनको गंध-स्वाद पहले की तरह ही रहा, वायरस नाक की नलिकाओं के रास्ते से फेफड़ों तक पहुंच गया था। तीसरी लहर में किस वैरिएंट का वायरस होगा, अभी बताया नहीं जा सकता, बस सावधानी जरूरी है।

यह बरतें सावधानी
- 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोग टीकाकरण कराएं। 
- बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने से बचें। 
- विशेष जरूरत पर ही घर से बाहर जाएं। 
- दो मास्क लगाकर जाएं तो बेहतर होगा।
- पौष्टिक भोजन करें, नियमित योग-व्यायाम करें। 
- हाथों की साफ-सफाई, एक मीटर दूरी का पालन करें।

आगरा डकैती कांड: एक लाख के इनामी लाला का साथी रेनू पंडित मुठभेड़ में गिरफ्तार, पुलिस की गोली लगने से हुआ घायल
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed