{"_id":"68f22b9a866adf7b5b0ebf9e","slug":"dap-is-facing-a-severe-shortage-at-cooperative-societies-and-farmers-are-unable-to-access-adequate-quantities-of-the-fertilizer-agra-news-c-285-1-sagr1008-104351-2025-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: सरकार की व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: सरकार की व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरा
विज्ञापन
सहकारी समितियों पर डीएपी की भारी किल्लत, किसानों को नहीं मिल रही पर्याप्त मात्रा में खाद
- रवि फसल की तैयारी में जुटे किसान, सरसों की बुवाई का समय, आलू व गेहूं की भी होनी है बुवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। डीएपी की भारी किल्लत से किसान दर-दर भटक रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती के लिए भरपूर डीएपी नहीं मिल रही है। रवि फसल की बुवाई के लिए किसान तैयारी में जुटे हैं, जहां सरसों की बुवाई का समय है लेकिन सहकारी समितियों पर पहुंची डीएपी किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।
किसानों को फसल में लगने वाली डीएपी के अनुपात में आधी मात्रा ही दी जा रही है। इससे किसान बाजार से ब्लैक में खरीदने को मजबूर हैं। आगे आलू और गेहूं की फसल की बुवाई भी होनी है। इसके लिए समितियों पर प्रति हेक्टेयर किसान को आलू के लिए 5 कट्टा तथा गेहूं के लिए चार तथा सरसों के लिए तीन कट्टा डीएपी देने का मानक बनाया गया है। जबकि दोनों ही फसलों के लिए यह काफी कम है। सचिव मानक का बहाना बनाकर किसानों को घुमा रहे हैं। सरकार की घोषणा के बावजूद किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। गुबरौठ के किसान देवकीनंदन शर्मा से बात करने पर बताया कि हर वर्ष हमें सहकारी समितियां के चक्कर लगाने पड़ते हैं लेकिन भरपूर मात्रा में डीएपी नहीं मिलती है।
विज्ञापन
- रवि फसल की तैयारी में जुटे किसान, सरसों की बुवाई का समय, आलू व गेहूं की भी होनी है बुवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। डीएपी की भारी किल्लत से किसान दर-दर भटक रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती के लिए भरपूर डीएपी नहीं मिल रही है। रवि फसल की बुवाई के लिए किसान तैयारी में जुटे हैं, जहां सरसों की बुवाई का समय है लेकिन सहकारी समितियों पर पहुंची डीएपी किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।
किसानों को फसल में लगने वाली डीएपी के अनुपात में आधी मात्रा ही दी जा रही है। इससे किसान बाजार से ब्लैक में खरीदने को मजबूर हैं। आगे आलू और गेहूं की फसल की बुवाई भी होनी है। इसके लिए समितियों पर प्रति हेक्टेयर किसान को आलू के लिए 5 कट्टा तथा गेहूं के लिए चार तथा सरसों के लिए तीन कट्टा डीएपी देने का मानक बनाया गया है। जबकि दोनों ही फसलों के लिए यह काफी कम है। सचिव मानक का बहाना बनाकर किसानों को घुमा रहे हैं। सरकार की घोषणा के बावजूद किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। गुबरौठ के किसान देवकीनंदन शर्मा से बात करने पर बताया कि हर वर्ष हमें सहकारी समितियां के चक्कर लगाने पड़ते हैं लेकिन भरपूर मात्रा में डीएपी नहीं मिलती है।
विज्ञापन