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साइबर ठग का कारनामा: सेतु निगम से 17 लाख की ठगी..कर्मचारी की एक भूल पड़ी भारी, सीमेंट आपूर्ति के नाम पर फंसाया
Mon, 13 Oct 2025 02:09 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Mon, 13 Oct 2025 02:09 PM IST
सार
फ्लाईओवर निर्माण के लिए सेतु निगम को सीमेंट की जरूरत थी। इसके लिए कर्मचारी ने गूगल के जरिए सीमेंट कंपनी का नंबर तलाशा। इसके बाद 17 लाख रुपये की सेतु निगम को चपत लग गई।
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Cyber crime
- फोटो : Freepik
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विस्तार
आगरा में उत्तर प्रदेश सेतु निगम के कर्मचारी से साइबर अपराधियों ने 17 लाख की ठगी कर ली। निगम की ओर से फिरोजाबाद में निर्माणाधीन पुल के लिए सीमेंट की आपूर्ति करने वाली कंपनियों से ऑफर मांगे गए थे। एक फर्म का नंबर कर्मचारी ने गूगल से खोजकर निकाला मगर यह नंबर साइबर अपराधी का निकला। काॅल करने पर ठग ने कम कीमत पर आपूर्ति देने के लिए कहा। इसके बाद अपना खाता नंबर दे दिया। रकम जमा कराने के बाद बात करना बंद कर दिया। शक होने पर कर्मचारी ने जांच की। इसमें फर्जीवाड़े की बात सामने आ गई। इस पर साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया गया है।
सेतु निगम के लेखाकार धीरज कुमार सक्सेना ने बताया कि फिरोजाबाद में जैन मंदिर के पास फ्लाईओवर का निर्माण कार्य होना है। इसके लिए सीमेंट की जरूरत थी। इस पर सीमेंट की आपूर्ति करने वाली विभिन्न फर्मों से ऑफर प्राप्त करने के लिए पत्र भेजे गए थे। इस संबंध में फोन पर वार्ता भी की गई थी। इनमें से वंडर सीमेंट लिमिटेड का नंबर नहीं था।
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सेतु निगम के लेखाकार धीरज कुमार सक्सेना ने बताया कि फिरोजाबाद में जैन मंदिर के पास फ्लाईओवर का निर्माण कार्य होना है। इसके लिए सीमेंट की जरूरत थी। इस पर सीमेंट की आपूर्ति करने वाली विभिन्न फर्मों से ऑफर प्राप्त करने के लिए पत्र भेजे गए थे। इस संबंध में फोन पर वार्ता भी की गई थी। इनमें से वंडर सीमेंट लिमिटेड का नंबर नहीं था।
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इस पर फर्म का नंबर गूगल पर खोजा गया। इस पर एक नंबर मिल गया। 29 सितंबर को सुबह 11:53 बजे नंबर पर वार्ता की गई। काॅल पर बात करने वाले ने पहली बार 21 सेकेंड ही बात की। दूसरी बार 6 मिनट 46 सेकेंड तक बात की। इसके बाद दोपहर 12:08 बजे फिर से बात करने की कोशिश की, लेकिन इस बार वार्ता नहीं हो सकी।
नाै मिनट बाद एक व्यक्ति ने काॅल किया और अपना नाम अमित मिश्रा बताया। कहा कि वह वंडर सीमेंट लिमिटेड से बोल रहा है। उसने व्हाट्सएप पर ऑफर लेटर मांगा। कहा कि वह इसे भरकर निगम के पास भेज देगा। कुछ देर बाद बात करने वाले ने ऑफर भेज दिया। इसमें सीमेंट की आपूर्ति कम दर पर की गई थी। इस पर अधिकारियों से अनुमोदन लिया गया। इसके बाद कंपनी को 6 हजार बैग सीमेंट का ऑर्डर भेज दिया गया।
3 अक्तूबर को बताई गई फर्म के खाते में 17.09 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए मगर सीमेंट की आपूर्ति नहीं की गई। फोन किया गया तो काॅल रिसीव नहीं हुई। बाद में फर्म के प्रतिनिधियों से संपर्क किया तब पता चला कि जिस खाते में रकम जमा कराई है, वह वंडर सीमेंट का नहीं है। यह खाता रोहित कुमार के नाम से खुला हुआ था। इस पर बैंक से संपर्क कर खाते को फ्रीज करा दिया गया। साइबर क्राइम थाना पुलिस खातों की जांच कर रही है।