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साइबर अपराधियों ने बैंककर्मी का क्रेडिट कार्ड किया हैक, न लिंक आया और न ओटीपी, कर डाली खरीदारी
Wed, 22 Jan 2020 12:15 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 22 Jan 2020 12:15 AM IST
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डेमो
खंदारी स्थित केनरा बैंक शाखा में कर्मचारी अंकुर शर्मा के क्रेडिट कार्ड को हैक कर उससे 14,858 रुपये की शॉपिंग कर ली गई। उनके पास न रिक्वेस्ट मनी जैसा कोई लिंक आया, न ही ओटीपी पूछा गया। उन्हें इसकी जानकारी शॉपिंग करने का मैसेज मोबाइल पर आने पर हुई। उन्होंने साइबर सेल और हरीपर्वत थाना पुलिस से शिकायत की है।
कैलाशपुरी निवासी अंकुर ने बताया कि उनके क्रेडिट कार्ड को हैक कर यह शॉपिंग सोमवार की दोपहर की गई। उनके पास मैसेज आया। इसमें 11 बार में यह रकम खाते से निकली। इसका इस्तेमाल वेबसाइट से शॉपिंग करने में किया गया।
उनके पास आरएलबी का क्रेडिट कार्ड है। रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उन्होंने कार्ड ब्लॉक कराया और बैंक को सूचना दी। इंस्पेक्टर हरीपर्वत थाना ने बताया कि जांच साइबर सेल को सौंपी गई है।
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कैलाशपुरी निवासी अंकुर ने बताया कि उनके क्रेडिट कार्ड को हैक कर यह शॉपिंग सोमवार की दोपहर की गई। उनके पास मैसेज आया। इसमें 11 बार में यह रकम खाते से निकली। इसका इस्तेमाल वेबसाइट से शॉपिंग करने में किया गया।
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उनके पास आरएलबी का क्रेडिट कार्ड है। रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उन्होंने कार्ड ब्लॉक कराया और बैंक को सूचना दी। इंस्पेक्टर हरीपर्वत थाना ने बताया कि जांच साइबर सेल को सौंपी गई है।
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1. लिंक भेजकर चुरा लेते हैं डाटा
अंकुर ने पुलिस से पूछा कि ऐसा कैसे मुमकिन है कि बगैर किसी लिंक को क्लिक किए और ओटीपी बताए पैसा निकल जाए। उन्हें बताया गया कि यह जरूरी नहीं कि लिंक रिक्वेस्ट मनी (पैसा भेजने) का ही आए। कई बार शुभकामना संदेश आदि के लिंक भेजकर डाटा चोरी कर लिया जाता है।
2. लूट, डकैती से ज्यादा साइबर अपराध
2019 में आगरा जिले में डकैती के चार और लूट के 179 केस दर्ज किए गए जबकि साइबर अपराध के मामले 280 रहे। इस साल भी 20 दिनों में लूट और डकैती की घटनाएं 10 से कम हैं जबकि साइबर अपराध 22 आ चुके हैं।
यूं तो लूट, डकैती, चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराना भी इतना आसान नहीं, लेकिन साइबर अपराध का पंजीकरण कराने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है। सीधे केस दर्ज ही नहीं होता, पहले साइबर सेल जाता है, जांच होती है फिर थाने आता है। इसमें महीनाभर लग जाता है। कई केस तो सात महीने बाद दर्ज किए गए हैं।
अंकुर ने पुलिस से पूछा कि ऐसा कैसे मुमकिन है कि बगैर किसी लिंक को क्लिक किए और ओटीपी बताए पैसा निकल जाए। उन्हें बताया गया कि यह जरूरी नहीं कि लिंक रिक्वेस्ट मनी (पैसा भेजने) का ही आए। कई बार शुभकामना संदेश आदि के लिंक भेजकर डाटा चोरी कर लिया जाता है।
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