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अधिकमास- तीर्थनगरी में पूरे माह प्रतिदिन होगा भगवान वराह का अभिषेक
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सोरों(कासगंज)। पितृ पक्ष समाप्त होने के बाद शुक्रवार से अधिक मास शुरू हो गया। इस मास को पुरुषोत्तम मास और मलमास भी कहते हैं। इस मास के पहले दिन तीर्थनगरी के संतों ने हरिपदी घाट पर गंगास्नान कर मंदिरों में पूजा अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा कल्पवास भी शुरू कर दिया। भगवान वराह का पंचाभिषेक कर नूतन वस्त्र धारण कराए। पूरे महीने भगवान वराह का प्रतिदिन पंचाभिषेक होगा।
शुक्रवार को अधिकमास शुरू होते ही मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाए। ढोलक, तबले की थाप पर श्रद्धालुओं ने ईश्वर का गुणगान किया। भगवान वराह मंदिर में सेवायत आचार्य पंडित नरेश त्रिगुणायत ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान वराह का पूजन कराया। छप्पन भोग लगाया गया और महाआरती उतारी गई। इस मौके पर मंदिर के महंत विदेहानंद गिरी, सुधीर यादव, रानू कोठेवार, रमेश यादव, सुनील तिवारी, रानू वर्मा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
भगवान विष्णु की महिमा का है विशेष महत्व
अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस महीने में शुभकार्य नहीं किए जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार अधिकमास में सवार्थसिद्ध योग भी बन रहा है। यह योग नक्षत्र तिथि और वार के संयोग से बनता है। इस योग को तरक्की का योग माना गया है।
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शुक्रवार को अधिकमास शुरू होते ही मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाए। ढोलक, तबले की थाप पर श्रद्धालुओं ने ईश्वर का गुणगान किया। भगवान वराह मंदिर में सेवायत आचार्य पंडित नरेश त्रिगुणायत ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान वराह का पूजन कराया। छप्पन भोग लगाया गया और महाआरती उतारी गई। इस मौके पर मंदिर के महंत विदेहानंद गिरी, सुधीर यादव, रानू कोठेवार, रमेश यादव, सुनील तिवारी, रानू वर्मा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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भगवान विष्णु की महिमा का है विशेष महत्व
अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस महीने में शुभकार्य नहीं किए जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार अधिकमास में सवार्थसिद्ध योग भी बन रहा है। यह योग नक्षत्र तिथि और वार के संयोग से बनता है। इस योग को तरक्की का योग माना गया है।
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