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सीआरपीएफ के एएसआई की बीमारी के चलते हुई मौत
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मृतक बलवीर सिंह यादव का फाइल फोटो
- फोटो : MAINPURI
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भोगांव (मैनपुरी)। गांव छिबकरिया निवासी सीआरपीएफ में एएसआई की लखनऊ पीजीआई में बीमारी के चलते मृत्यु हो गई। शुक्रवार को शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। शाम को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर पूर्व मंत्री, सीओ सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
गांव छिबकरिया निवासी बलराम सिंह वर्ष 1991 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती उड़ीसा के रायगढ़ की चतुर्थ बटालियन में तैनात थे। बृहस्पतिवार को पीजीआई लखनऊ में बलराम की बीमारी के चलते मौत हो गई। जानकारी मिलते ही घर में कोहराम मच गया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद बीएसएफ के शव को लेकर गांव पहुंचे तो घर में कोहराम मच गया। शाम करीब चार बजे शव का अंतिम संस्कार किया गया।
इससे पूर्व बटालियन ने गार्ड आफ ऑनर दिया। इसके बाद सीआरपीएफ के जवान ने ताबूत पर लिपटे तिरंगा को हटाने के बाद पुत्र को सौंपा। मौजूद लोगों ने पुष्प आदि अर्पित किए। बड़े पुत्र पंकज ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर पूर्व मंत्री आलोक शाक्य, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि कश्मीर सिंह लोधी, प्रभारी निरीक्षक रविंद्र बहादुर आदि मौजूद रहे।
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परिजनों ने बताया कि मिलनसार स्वभाव के बलराम सिंह बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए लखनऊ के गोमती नगर में मकान बना लिया था। 20 नवंबर को वह छुट्टी लेकर लखनऊ स्थित घर आए थे। एक सप्ताह पूर्व वह डेंगू की चपेट में आ गए थे। तभी से उनका इलाज चल रहा था।
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गांव छिबकरिया निवासी बलराम सिंह वर्ष 1991 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती उड़ीसा के रायगढ़ की चतुर्थ बटालियन में तैनात थे। बृहस्पतिवार को पीजीआई लखनऊ में बलराम की बीमारी के चलते मौत हो गई। जानकारी मिलते ही घर में कोहराम मच गया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद बीएसएफ के शव को लेकर गांव पहुंचे तो घर में कोहराम मच गया। शाम करीब चार बजे शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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इससे पूर्व बटालियन ने गार्ड आफ ऑनर दिया। इसके बाद सीआरपीएफ के जवान ने ताबूत पर लिपटे तिरंगा को हटाने के बाद पुत्र को सौंपा। मौजूद लोगों ने पुष्प आदि अर्पित किए। बड़े पुत्र पंकज ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर पूर्व मंत्री आलोक शाक्य, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि कश्मीर सिंह लोधी, प्रभारी निरीक्षक रविंद्र बहादुर आदि मौजूद रहे।
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परिजनों ने बताया कि मिलनसार स्वभाव के बलराम सिंह बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए लखनऊ के गोमती नगर में मकान बना लिया था। 20 नवंबर को वह छुट्टी लेकर लखनऊ स्थित घर आए थे। एक सप्ताह पूर्व वह डेंगू की चपेट में आ गए थे। तभी से उनका इलाज चल रहा था।