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ताज को ‘तलैया’ बना देगा ताजगंज प्रोजेक्ट
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 12 May 2015 02:04 AM IST
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ताज कारीडोर की तरह ‘रहस्यमयी’ ताजगंज प्रोजेक्ट में फिर बड़ा बदलाव हुआ है। बदलाव भी ऐसा जो ताजगंज को खूबसूरत तो बनाएगा, लेकिन ताजमहल के अंदर और बाहर ‘तलैया’ बन जाएगी। ताजगंज प्रोजेक्ट में ग्रेनाइट कोवल स्टोन से सड़क बनाई जा रही है जो मौजूदा सड़क के बेस पर 11 इंच ऊंची है। ताजमहल के पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी प्रवेश द्वार से सड़क 17 इंच ऊपर हो जाएगी, जिससे ताजगंज का पानी ताज के अंदर पहुंचेगा। अभी दक्षिणी गेट से ताजगंज का पानी ताज में गिरकर नारकीय हालात बनाता है।
ताजमहल पूर्वी गेट पर अमर विलास होटल के सामने कोवल स्टोन का सैंपल तैयार किया जा रहा है। मौजूदा कोलतार की सड़क के ऊपर ही स्टोन डस्ट और सीमेंट के मिश्रण में चार इंच मोटाई का ग्रेनाइट स्टोन लगाया गया है। इससे रोड की ऊंचाई 11 इंच हो जाएगी। ताज परिसर से दोनों ओर की सड़कें पहले से ही 6 इंच ऊंची हैं। इससे ताजमहल तक यह रोड तकरीबन 17 इंच ऊंची हो जाएगी। ताज में पानी भरने पर पत्थरों को लोना लगने का डर है, जिससे स्मारक को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है।
कहां से कहां तक बनेगी स्टोन रोड
ताजमहल पूर्वी गेट से लेकर शिल्पग्राम तक, पश्चिमी गेट से अमरूद टीला पार्किंग तक और इन दोनों गेटों को जोड़ने वाले दक्षिणी गेट के प्रमुख रास्ते पर भी कोवल स्टोन लगाया जाएगा। कुत्ता पार्क, पाठक प्रेस, आर के स्टूडियो बैरियर वाली सड़क पर यह स्टोन रोड बनेगी।
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महाजन कमेटी लगा चुकी है फटकार
ताज के दक्षिणी गेट से बारिश के दिनों में पूरे ताजगंज का पानी ताजमहल में गिरता है। दक्षिणी गेट की ओर सीढ़ियों से गिरता हुआ पानी किसी झरने की तरह से नजर आता है। ताजमहल के इस गेट पर एक से तीन फीट तक पानी गलियों में भरता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ताजमहल के लिए बनाई गई महाजन कमेटी ने इस पर एएसआई, नगर निगम और एडीए को कई बार फटकार भी लगाई है। महाजन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सड़क का लेवल ताज के लेवल से नीचे रखने के निर्देश भी दिए हैं।
ककैया ईंटों की थी सड़क
1978 में ताज फोरकोर्ट मौजूदा तल से करीब 3 फीट नीचे था, ककैया ईंटों का खड़ंजा फोरकोर्ट में भी था, लेकिन बाद में इसे कंक्रीट के फर्श में दबा दिया गया। फोरकोर्ट की तीन सीढ़ियां इसमें दब गई हैं। उसी तरह ताजमहल पूर्वी गेट पर भी कभी ककैया ईंटों की सड़क थी जो कुछ साल पहले तक लोगों ने देखी भी थी। यह पूर्वी गेट से दशहरा घाट तक थी। लेकिन बाद में कोलतार की सड़क बनाने पर यह ईंटों का फर्श नीचे दब गया। ककैया ईंटों का लेवल ताजमहल के लेबर गेट के बराबर था, जबकि अब जो रोड बनाई गई है, वह लेबर गेट से काफी ऊंची है। बारिश के दिनों में पूर्वी गेट पर सुरक्षा जांच कतार में लगे लोग जलभराव से परेशान होते हैं।
वर्जन
ग्रेनाइट कोवल स्टोन की सड़क फिलहाल सैंपल के तौर पर है। 15 जून तक हम इसका सैंपल पूरी तरह से तैयार कर लेंगे। अगर अनुमति मिली तो तीनों प्रवेश द्वारों पर रोड बनाई जाएगी। ताज में पानी न भरे, उसे ध्यान में रखते हुए सड़क बनेगी।
अनिल कुमार
प्रोजेक्ट मैनेजर
राजकीय निर्माण निगम
ताज पूर्वी गेट का लेवल सड़क से नीचे है, जिससे पानी भरता है। एएसआई को पुराना ड्रेनेज सिस्टम बहाल करना है, लेकिन सड़क ऊंची होने से यह नहीं हो पाएगा। एएसआई ककैया ईंटों के पुराने फर्श को खोदाई कर निकालेगा और संरक्षित करेगा। लेबर गेट के पास मूल स्वरूप लाया जाएगा।
भुवन विक्रम
अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई
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ताजमहल पूर्वी गेट पर अमर विलास होटल के सामने कोवल स्टोन का सैंपल तैयार किया जा रहा है। मौजूदा कोलतार की सड़क के ऊपर ही स्टोन डस्ट और सीमेंट के मिश्रण में चार इंच मोटाई का ग्रेनाइट स्टोन लगाया गया है। इससे रोड की ऊंचाई 11 इंच हो जाएगी। ताज परिसर से दोनों ओर की सड़कें पहले से ही 6 इंच ऊंची हैं। इससे ताजमहल तक यह रोड तकरीबन 17 इंच ऊंची हो जाएगी। ताज में पानी भरने पर पत्थरों को लोना लगने का डर है, जिससे स्मारक को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है।
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कहां से कहां तक बनेगी स्टोन रोड
ताजमहल पूर्वी गेट से लेकर शिल्पग्राम तक, पश्चिमी गेट से अमरूद टीला पार्किंग तक और इन दोनों गेटों को जोड़ने वाले दक्षिणी गेट के प्रमुख रास्ते पर भी कोवल स्टोन लगाया जाएगा। कुत्ता पार्क, पाठक प्रेस, आर के स्टूडियो बैरियर वाली सड़क पर यह स्टोन रोड बनेगी।
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महाजन कमेटी लगा चुकी है फटकार
ताज के दक्षिणी गेट से बारिश के दिनों में पूरे ताजगंज का पानी ताजमहल में गिरता है। दक्षिणी गेट की ओर सीढ़ियों से गिरता हुआ पानी किसी झरने की तरह से नजर आता है। ताजमहल के इस गेट पर एक से तीन फीट तक पानी गलियों में भरता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ताजमहल के लिए बनाई गई महाजन कमेटी ने इस पर एएसआई, नगर निगम और एडीए को कई बार फटकार भी लगाई है। महाजन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सड़क का लेवल ताज के लेवल से नीचे रखने के निर्देश भी दिए हैं।
ककैया ईंटों की थी सड़क
1978 में ताज फोरकोर्ट मौजूदा तल से करीब 3 फीट नीचे था, ककैया ईंटों का खड़ंजा फोरकोर्ट में भी था, लेकिन बाद में इसे कंक्रीट के फर्श में दबा दिया गया। फोरकोर्ट की तीन सीढ़ियां इसमें दब गई हैं। उसी तरह ताजमहल पूर्वी गेट पर भी कभी ककैया ईंटों की सड़क थी जो कुछ साल पहले तक लोगों ने देखी भी थी। यह पूर्वी गेट से दशहरा घाट तक थी। लेकिन बाद में कोलतार की सड़क बनाने पर यह ईंटों का फर्श नीचे दब गया। ककैया ईंटों का लेवल ताजमहल के लेबर गेट के बराबर था, जबकि अब जो रोड बनाई गई है, वह लेबर गेट से काफी ऊंची है। बारिश के दिनों में पूर्वी गेट पर सुरक्षा जांच कतार में लगे लोग जलभराव से परेशान होते हैं।
वर्जन
ग्रेनाइट कोवल स्टोन की सड़क फिलहाल सैंपल के तौर पर है। 15 जून तक हम इसका सैंपल पूरी तरह से तैयार कर लेंगे। अगर अनुमति मिली तो तीनों प्रवेश द्वारों पर रोड बनाई जाएगी। ताज में पानी न भरे, उसे ध्यान में रखते हुए सड़क बनेगी।
अनिल कुमार
प्रोजेक्ट मैनेजर
राजकीय निर्माण निगम
ताज पूर्वी गेट का लेवल सड़क से नीचे है, जिससे पानी भरता है। एएसआई को पुराना ड्रेनेज सिस्टम बहाल करना है, लेकिन सड़क ऊंची होने से यह नहीं हो पाएगा। एएसआई ककैया ईंटों के पुराने फर्श को खोदाई कर निकालेगा और संरक्षित करेगा। लेबर गेट के पास मूल स्वरूप लाया जाएगा।
भुवन विक्रम
अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई