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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Crop failure and farmers claimed the lives of three

फसल की बर्बादी ने ली तीन और किसानों की जान

Fri, 17 Apr 2015 02:23 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Fri, 17 Apr 2015 02:23 AM IST
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 मजदूरी से जिंदगी की गाड़ी नहीं खिंची तो पिढ़ौरा के राटौटी गांव निवासी गंभीर सिंह (32) ने खेती पर दांव लगाया। अपनी ढाई बीघा और भेज पर ली 22 बीघा जमीन में आलू-गेहूं की फसल बोई। लागत के लिए लगभग 4.50 लाख रुपये का कर्ज लिया। आलू की फसल तैयार हुई तो मंडी ले गए लेकिन भाड़ा भी नहीं निकला। गेहूं की फसल बारिश ने तबाह कर दी। कर्ज का बोझ और तबाह फसल को लेकर गंभीर की 4-5 दिन से नींद उड़ गई थी। बुधवार रात उन्होंने घर में पंखे से लटक कर जान दे दी। घटना की जानकारी गुरुवार सुबह हुई तो पत्नी सीतू का रो-रोकर बुरा हाल है। गंभीर की दो बच्चों में बेटी पल्लवी (6) और बेटा करन (3) है। घटना से हर कोई परेशान है कि अब सीतू बेटियों को कैसे पालेगी। चाचा उमा सिंह ने बताया कि गंभीर के माता-पिता का बचपन में ही निधन हो गया था। बड़े होने के बाद वह मजदूरी करने लगा। बारिश से फसल तबाह होने के बाद अभी तक नुकसान का न तो सर्वे हुआ और न मुआवजा ही मिला। घटना की सूचना पर पहुंचे पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
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घटना - दो
बरहन। गांव नगला बरी निवासी कमल सिंह (45) ने अपने 13 बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई थी। बारिश ने कई बार फसल को बर्बाद किया। बुधवार शाम वह खेत में पानी से भीगे गेहूं के पूरों को इकट्ठा कर रहे थे। तभी उन्हें सदमा लग गया। वह शाम को घर आए तो खाना नहीं खाया। देर रात तबियत खराब हो गई। परिवारीजन इलाज के लिए आगरा ले जा रहे थे तभी रास्ते में मौत हो गई। कमल सिंह पांच बच्चों में दो बेटियों की शादी कर चुके थे। शेष तीन बच्चों में दो पुत्र नेमीचंद्र (12), बेटी कृष्णा (4), विश्ना (9) हैं। कमल सिंह ने बैंक से कर्ज भी ले रखा था। वह गेहूं बेचकर कर्जे को पाटना चाहते थे। घटना की सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
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घटना - तीन
बरहन। थाना क्षेत्र के गांव विरूनी निवासी रामखिलाडी के पास सात बीघा खेत था। दो वर्ष पहले उन्होंने आधा खेत कर्जे के कारण बेच दिया था। शेष खेत में लगभग 35000 रुपये का कर्ज बैंक से लेकर फसल में लागत डाली थी। फसल बेचकर कर्जा चुकाने की योजना थी। गेहूं की फसल खेत में कटी पड़ी थी तभी बारिश ने उसे बर्बाद कर दिया। इससे वह विचलित हो गए। बुधवार शाम को खेत पर शाम अपने बेटे रामवरन को समझाया कि अब हम कुछ दिन के मेहमान हैं तू संभल कर रहना। इसके बाद गुरुवार सुबह चार बजे वह उठे और एक बार फिर सो गए। इसके बाद नहीं उठे। मौत की जानकारी पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
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प्रशासन ने नहीं मानी सदमे से मौत
बरहन। एसडीएम ने किसानों की मौत को सदमा नहीं माना है। उनका कहना है कि नगला बरी में तहसीलदार जीतलाल सैनी ने जांच में पाया कि कमल सिंह कई दिन से डायरिया से पीड़ित थे। उनके परिवार के लिए राष्ट्रीय पारिवारिक योजना और किसान बीमा दुर्घटना के तहत मुआवजा दिलाने की संस्तुति की गई है। जबकि विरूनी के रामखिलाड़ी ने अपने खेत बंटाई पर दे रखा था। ऐसे में फसल में नुकसान होने का कोई औचित्य ही नहीं है।
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