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पुलिस की लापरवाही से हुआ विष्णु का कत्ल

Sat, 30 Jan 2016 01:37 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा/एत्मादपुर
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा/एत्मादपुर Updated Sat, 30 Jan 2016 01:37 AM IST
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Vishnu was killed ?due to police negligence
शेखपुरा के छात्र विष्णु धाकरे के अपहरण को पुलिस ने गंभीरता से लिया होता, तो उसकी जान बच सकती थी। उसकी तलाश में जुट जाना तो दूर पुलिस ने अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करने में ही 37 घंटे लगा दिए। उसका बैग मिल जाने पर ही अनहोनी की आशंका होने लगी थी, लेकिन पुलिस मामले को हलके में लेती रही।
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हद की बात तो यह है कि लाश मिल जाने के बाद कातिलों की तलाश करने के बजाय पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। पुलिस पहले पूरी तसल्ली कर लेना चाहती है कि उसकी हत्या की गई है या उसने आत्महत्या की है।
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हालांकि प्रथम दृष्टया मामला हत्या कर शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिए जाने का लग रहा है । माना जा रहा है कि कातिलों ने वारदात को आत्महत्या का रूप देने के लिए ऐसा किया।
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उसके पिता सूरज धाकरे का कहना है कि शव पर चोट के निशान साफ नजर आ रहे थे। उसकी हत्या पुलिस की लापरवाही से हुई है। वह डेढ़ दिन तक अपहृताओं के चंगुल में रहा। अगर पुलिस ने सक्रियता दिखाई होती तो शायद वे पकड़े जाने के डर से उसे छोड़ देते।
उधर, इंस्पेक्टर ब्रहम सिंह का कहना है कि इस घटना की छानबीन की जा रही है। परिजनों की तहरीर पर पहले ही अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से और जानकारी मिल सकेगी।
साइकिल कहां गई ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि विष्णु की साइकिल कहां गई? उसकी लाश मिलने के बाद भी यह बरामद नहीं हो सकी है।
पिपरिया कैसे पहुंचा बैग ?
विष्णु शेखपुर से कुबेरपुर साइकिल पर जाता था। पिपरिया गांव स्कूल के रास्ते से तीन किलोमीटर हटकर है। यहां उसका बैग कैसे पहुंच गया?
डेढ़ दिन तक कहां रखा?
विष्णु का अपहरण हुआ 27 की सुबह आठ बजे जबकि हत्या की गई 28 की रात लगभग दस बजे। इस दौरान डेढ़ दिन उसे कहां रखा गया?
एफआईआर में देरी क्यों ?
विष्णु के अपहरण को पुलिस ने गुमशुदगी में क्यों दर्ज किया। सवाल यह भी है कि लाश मिलने से कुछ दिन पहले ही केस अपहरण में तरमीम क्यों किया गया?

डाक्टर बनना चाहता था विष्णु
सूरज धाकरे ने बताया कि विष्णु पढ़ाई में होशियार था। वह डाक्टर बनना चाहता। उसे बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए ही उसका दाखिला कुबेरपुर के स्कूल में कराया था।

लाल के बिना जी नहीं पाउंगी मैं
विष्णु की मां रोते रोते उस दिन की बातें याद कर रही हैं,  ॅ मैंने उससे कहा विष्णु, आज तो बहुत कोहरा है। बोला, मां चिंता न करो, जब घर आउंगा, तो धूप निकली होगी, मगर वो तो लौटा ही नहीं, मैं अपने लाल के बिना जी नहीं पाउंगी।

भैय्या कहां चले गए, हमें कौन पढ़ाएगा
एत्मादपुर। सूरज सिंह की चार संतानों में तीन बेटियां हैं। सबसे बड़ा विष्णु था। तीन बेटियों में शालू (13), उपासना(11) और मोहिनी(8) है। शालू अपने पापा बार बार यही पूछे जा रही है, भैय्या कहां चले गए, अब हमें कौन पढा़एगा। परिवार के लोगों ने बताया कि विष्णु रोजाना अपनी तीनों बहनों को पढ़ाता था।

पुलिस से खुलासे की मांग
एत्मादपुर। गांव शेखपुरा पहुंचे बसपा विधायक डा. धर्मपाल सिंह, भाजपा प्रदेशमंत्री रामप्रताप सिंह, वरिष्ठ सपा नेता जगवीर सिंह तोमर और भाजपा जिला पंचायत सदस्य प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल ने पुलिस अधिकारियों से वार्ता करके जल्द से जल्द घटना के खुलासे की मांग की।
गढ़ी जगन्नाथ में है ननिहाल
एत्मादपुर। मृतक विष्णु की ननिहाल गांव गढ़ी जगन्नाथ में है। वहां से स्कूल की दूरी महज लगभग एक किलोमीटर है। मामा एवं अन्य लोागों की भी इच्छा था कि विष्णु अच्छे स्कूल में पढ़ाई करे। इसलिए जीएस पब्लिक हायर सैकेंडरी स्कूल में दाखिला दिलवाया था। इससे पहले कक्षा दस तक मितावली स्थित स्कूल में पढ़ाई की थी।

पढ़ाई में सामान्य था विष्णु
एत्मादपुर। स्कूल प्रबंधक सत्यप्रकाश यादव का कहना था कि इस घटना से विद्यालय आहत है। विष्णु ने इसी वर्ष 11वीं में प्रवेश लिया था। वह 25 और 26 जनवरी को स्क्ूल आया था। विष्णु का व्यवहार स्कूल में सामान्य था। वह पढ़ाई में भी सामान्य था।
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