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दागियों पर मेहरबान अंबेडकर विश्वविद्यालय
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 25 Oct 2015 01:37 AM IST
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डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन बीएड घोटालबाजों पर पूरी तरह मेहरबान रहा है। तत्कालीन अधिकारियों के बाद वर्तमान में भी उनको मनचाहे विभाग में तैनाती दी गई है। बीएड घोटाले के आरोपी महीपाल सिंह अभी भी चार्ट रूम में तैनात हैं। दूसरे आरोपी हरीश कसाना विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ का अध्यक्ष हैं और खंदारी कैंपस के भौतिक विभाग में नियुक्त है। तत्कालीन कुलसचिव शिवपूजन सिंह अभी गायब चल रहे हैं। इनका तबादला गोरखपुर विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव के पद पर हुआ था। साल भर गुजरने के बाद भी इन्होंने विश्वविद्यालय में ज्वाइनिंग नहीं की है। तो शिवदत्त पांच साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
बता दें, स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) बीएड 2005-06 की फर्जी मार्कशीट की जांच कर रही है। एसआईटी ने इस मामले में शिवपूजन (तत्कालीन कुलसचिव), शिवदत्त शर्मा (तत्कालीन सहायक रजिस्ट्रार), हरीश कसाना (तत्कालीन चार्ट रूम प्रभारी) और महीपाल सिंह (तत्कालीन बीएड सेक्शन प्रभारी) के खिलाफ लखनऊ स्थित अपने थाने में केस दर्ज किया है। इन पर दस कालेजों के 450 से अधिक छात्रों को बीएड की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बांटने और इसका विवरण विश्वविद्यालय के गोपनीय चार्ट में दर्ज कराने का संगीन आरोप है।
एक आरोपी की तबियत बिगड़ी
- इस मामले में शुक्रवार को पांच लोगों पर एफआईआर होने के तुरंत बाद एक आरोपी की तबियत बिगड़ गई है। विश्वविद्यालय के सूत्रों ने बताया कि एसआईटी की जांच की जद में आने के बाद से ही उनकी हालत खराब है। बीते साल दिसंबर में उसे एसआईटी का नोटिस मिला था, तब उन्होंने खुद को किडनी की गंभीर बीमारी बताकर एसआईटी से राहत देने की अपील की थी। शनिवार को खबर पढ़ने के बाद उन्होंने चिकित्सकीय परामर्श लिया।
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भाईसाहब मेरा नाम तो नहीं है...
- खबर के बाद शिक्षा माफिया खबराए हुए हैं। पहली बार कठोर कार्रवाई की शुरूआत होते ही विश्वविद्यालय और इससे जुड़े कॉकस में कोहराम की स्थिति है। हालत यह कि पूरे दिन एकदूसरे से फोन कर स्थिति का पता लगाते रहे। यहां तक कि लखनऊ में भी सही स्थिति पता लगाने की भरसक कोशिश की। प्रकरण के बारे में विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों से जानकारी चाही तो भयभीत हो गए। बोले भाई...मेरा नाम तो नहीं है। हो तो मत छापना। तुम्हें मेरे परिवार का वास्ता।
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बता दें, स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) बीएड 2005-06 की फर्जी मार्कशीट की जांच कर रही है। एसआईटी ने इस मामले में शिवपूजन (तत्कालीन कुलसचिव), शिवदत्त शर्मा (तत्कालीन सहायक रजिस्ट्रार), हरीश कसाना (तत्कालीन चार्ट रूम प्रभारी) और महीपाल सिंह (तत्कालीन बीएड सेक्शन प्रभारी) के खिलाफ लखनऊ स्थित अपने थाने में केस दर्ज किया है। इन पर दस कालेजों के 450 से अधिक छात्रों को बीएड की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बांटने और इसका विवरण विश्वविद्यालय के गोपनीय चार्ट में दर्ज कराने का संगीन आरोप है।
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एक आरोपी की तबियत बिगड़ी
- इस मामले में शुक्रवार को पांच लोगों पर एफआईआर होने के तुरंत बाद एक आरोपी की तबियत बिगड़ गई है। विश्वविद्यालय के सूत्रों ने बताया कि एसआईटी की जांच की जद में आने के बाद से ही उनकी हालत खराब है। बीते साल दिसंबर में उसे एसआईटी का नोटिस मिला था, तब उन्होंने खुद को किडनी की गंभीर बीमारी बताकर एसआईटी से राहत देने की अपील की थी। शनिवार को खबर पढ़ने के बाद उन्होंने चिकित्सकीय परामर्श लिया।
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भाईसाहब मेरा नाम तो नहीं है...
- खबर के बाद शिक्षा माफिया खबराए हुए हैं। पहली बार कठोर कार्रवाई की शुरूआत होते ही विश्वविद्यालय और इससे जुड़े कॉकस में कोहराम की स्थिति है। हालत यह कि पूरे दिन एकदूसरे से फोन कर स्थिति का पता लगाते रहे। यहां तक कि लखनऊ में भी सही स्थिति पता लगाने की भरसक कोशिश की। प्रकरण के बारे में विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों से जानकारी चाही तो भयभीत हो गए। बोले भाई...मेरा नाम तो नहीं है। हो तो मत छापना। तुम्हें मेरे परिवार का वास्ता।