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अधिवक्ता हत्याकांड में दो को आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Fri, 07 Apr 2017 12:19 AM IST
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अदालत
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शांति नगर, भूड़ का बाग निवासी अधिवक्ता अजय गौतम की सरेआम की गई हत्या के दो आरोपियों उमेश गौतम निवासी गोंडा, अलीगढ़ और कमला नगर के श्रीराम को अपर जिला जज कृष्णचंद्र पांडेय ने उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 1.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।
घटना 31 मार्च 2003 की है। वादी दिनेशचंद्र गौतम (तत्कालीन पेशकार दीवानी कचहरी) अपने भतीजे अजय गौतम एडवोकेट, दिलीप कुमार उर्फ बंटू निवासी हाथरस और विजय गौतम के साथ रात दस बजे घर के गेट पर बातचीत कर रहा था। इसी दौरान दो मोटरसाइकिलों पर अभियुक्त उमेश गौतम, उसका भाई महेश उर्फ फौजी तथा श्रीराम आए। महेश उर्फ फौजी ने अजय गौतम की कनपटी पर तमंचा लगा दिया और यह कहकर गोली मार दी कि तू मेरी बीवी शशि गौतम की दहेज उत्पीड़न मामले में बहुत पैरवी कर रहा है। अभियुक्त का पत्नी के साथ अलीगढ़ कोर्ट में केस चल रहा था। शशि मृतक अजय की फुफेरी बहन है। पुलिस ने कुछ ही देर बाद अभियुक्त उमेश, श्रीराम, महेश और एक अन्य लाखन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।
नौ जून 2006 को जेल से पेशी पर लाते वक्त महेश उर्फ फौजी और लाखन पुलिसकर्मियों को चकमा देकर दीवानी कचहरी से फरार हो गए। पुलिस ने करीब छह साल बाद फौजी को गिरफ्तार किया मगर लाखन अभी तक फरार है। हत्याकांड के दोनों अभियुक्तों की अलग से सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख दी है। बता दें, अभियुक्तों के फरार होने के मामले में दीवानी हवालात के मुंशी समेत तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए थे। एडीजीसी दिनेश कुशवाह, अंजली वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर शर्मा ने कोर्ट में चश्मदीद गवाहों समेत 11 गवाह पेश किए।
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घटना 31 मार्च 2003 की है। वादी दिनेशचंद्र गौतम (तत्कालीन पेशकार दीवानी कचहरी) अपने भतीजे अजय गौतम एडवोकेट, दिलीप कुमार उर्फ बंटू निवासी हाथरस और विजय गौतम के साथ रात दस बजे घर के गेट पर बातचीत कर रहा था। इसी दौरान दो मोटरसाइकिलों पर अभियुक्त उमेश गौतम, उसका भाई महेश उर्फ फौजी तथा श्रीराम आए। महेश उर्फ फौजी ने अजय गौतम की कनपटी पर तमंचा लगा दिया और यह कहकर गोली मार दी कि तू मेरी बीवी शशि गौतम की दहेज उत्पीड़न मामले में बहुत पैरवी कर रहा है। अभियुक्त का पत्नी के साथ अलीगढ़ कोर्ट में केस चल रहा था। शशि मृतक अजय की फुफेरी बहन है। पुलिस ने कुछ ही देर बाद अभियुक्त उमेश, श्रीराम, महेश और एक अन्य लाखन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।
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नौ जून 2006 को जेल से पेशी पर लाते वक्त महेश उर्फ फौजी और लाखन पुलिसकर्मियों को चकमा देकर दीवानी कचहरी से फरार हो गए। पुलिस ने करीब छह साल बाद फौजी को गिरफ्तार किया मगर लाखन अभी तक फरार है। हत्याकांड के दोनों अभियुक्तों की अलग से सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख दी है। बता दें, अभियुक्तों के फरार होने के मामले में दीवानी हवालात के मुंशी समेत तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए थे। एडीजीसी दिनेश कुशवाह, अंजली वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर शर्मा ने कोर्ट में चश्मदीद गवाहों समेत 11 गवाह पेश किए।
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