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स्कूल में छात्र की तबियत बिगड़ी, मौत
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Wed, 23 Dec 2015 02:15 AM IST
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देवरी रोड स्थित बलूनी पब्लिक स्कूल में मंगलवार को खेलकूद गतिविधि में हिस्सा लेने पहुंचे कक्षा नौ के छात्र निखिल की तबियत बिगड़ गई। उसे इलाज के लिए एसएन मेडिकल कालेज ले जाया गया तो डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पिता सुनील पाराशर का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की ओर से इलाज में देरी की गई। निखिल घर से निकला तो पूरी तरह स्वस्थ था, उसके कोई बीमारी भी नहीं थी।
स्कूल प्रशासन के मुताबिक, दोपहर करीब दो स्कूल में खेलकूद गतिविधि चल रही थी। जिमनास्टिक के छात्र-छात्राएं प्रदर्शन कर रहे थे। निखिल कक्षा नौ और आठ के बाकी बच्चों के साथ बॉल ड्रिल खेल में हिस्सा लेने के लिए खड़ा था। उसे कमजोरी महसूस हुई और जमीन पर बैठ गया। स्कूल में विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में अभिभावक भी मौजूद थे। उसमें एक डाक्टर भी थे, उन्होंने निखिल को देखा और पल्स धीमी चलने की बात कही और तत्काल अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
स्कूल के एकेडमिक इंचार्ज ललितेश यादव के मुताबिक, निखिल को पहले एसआर हास्पिटल ले जाया गया, वहां डाक्टरों ने जवाब दे दिया। इसके बाद एसएन मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे, यहां डाक्टरों ने उसे मृत बताया। वहीं पिता सुनील पाराशर जो कि शमसाबाद ब्लाक में परिषदीय बेसिक स्कूल में शिक्षक हैं, का कहना है कि स्कूल से उनको ढाई से तीन बजे निखिल के बेहोश होने की सूचना दी गई। उन्होंने छुट्टी ले रखी थी, सूचना पर मोटरसाइकिल से एसआर हास्पिटल पहुंचे। उनका कहना है कि स्कूल वालों ने जरूर इलाज में देरी की, नहीं तो बच्चे की मौत नहीं होती। खुद को बचाने के लिए बाद में अस्पताल ले गए।
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कभी बुखार भी नहीं आता था
आगरा। सुनील पाराशर ने बताया कि निखिल को बचपन में भले बीमार पड़ा हो, स्कूल जाने लगा तो उसे कभी बुखार भी नहीं आया। यदि बच्चे को बुखार आया होता तो उसे घर से नहीं जाने दिया जाता। खेलकूद गतिविधि के नाम पर तीन दिन से बुलाया जा रहा था।
परिवारवालाें का रो-रोकर बुरा हाल
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज में पिता के अलावा मां-दादा और आसपास के लोग पहुंच गए। सभी का रो-रोकर बुला हाल था। सभी यही कह रहे थे कि यह गजब हो गया। निखिल न तो शरीर से कमजोर था और न ही कोई बीमारी थी। निखिल का बड़ा भाई जीएलए में पढ़ाई करा रहा है।
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स्कूल प्रशासन के मुताबिक, दोपहर करीब दो स्कूल में खेलकूद गतिविधि चल रही थी। जिमनास्टिक के छात्र-छात्राएं प्रदर्शन कर रहे थे। निखिल कक्षा नौ और आठ के बाकी बच्चों के साथ बॉल ड्रिल खेल में हिस्सा लेने के लिए खड़ा था। उसे कमजोरी महसूस हुई और जमीन पर बैठ गया। स्कूल में विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में अभिभावक भी मौजूद थे। उसमें एक डाक्टर भी थे, उन्होंने निखिल को देखा और पल्स धीमी चलने की बात कही और तत्काल अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
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स्कूल के एकेडमिक इंचार्ज ललितेश यादव के मुताबिक, निखिल को पहले एसआर हास्पिटल ले जाया गया, वहां डाक्टरों ने जवाब दे दिया। इसके बाद एसएन मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे, यहां डाक्टरों ने उसे मृत बताया। वहीं पिता सुनील पाराशर जो कि शमसाबाद ब्लाक में परिषदीय बेसिक स्कूल में शिक्षक हैं, का कहना है कि स्कूल से उनको ढाई से तीन बजे निखिल के बेहोश होने की सूचना दी गई। उन्होंने छुट्टी ले रखी थी, सूचना पर मोटरसाइकिल से एसआर हास्पिटल पहुंचे। उनका कहना है कि स्कूल वालों ने जरूर इलाज में देरी की, नहीं तो बच्चे की मौत नहीं होती। खुद को बचाने के लिए बाद में अस्पताल ले गए।
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कभी बुखार भी नहीं आता था
आगरा। सुनील पाराशर ने बताया कि निखिल को बचपन में भले बीमार पड़ा हो, स्कूल जाने लगा तो उसे कभी बुखार भी नहीं आया। यदि बच्चे को बुखार आया होता तो उसे घर से नहीं जाने दिया जाता। खेलकूद गतिविधि के नाम पर तीन दिन से बुलाया जा रहा था।
परिवारवालाें का रो-रोकर बुरा हाल
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज में पिता के अलावा मां-दादा और आसपास के लोग पहुंच गए। सभी का रो-रोकर बुला हाल था। सभी यही कह रहे थे कि यह गजब हो गया। निखिल न तो शरीर से कमजोर था और न ही कोई बीमारी थी। निखिल का बड़ा भाई जीएलए में पढ़ाई करा रहा है।