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सत्ता के दबाव में झुकी पुलिस

Fri, 31 Jul 2015 01:16 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Fri, 31 Jul 2015 01:16 AM IST
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police on back foot
वजीरपुरा में हुए बवाल में पुलिस ने यू टर्न ले लिया है। सत्ता पक्ष के दबाव पर पुलिस अब जेल में बंद सात आरोपियों को क्लीन चिट देने जा रही है। बवाल के बाद इनकी गिरफ्तारी की गई थी। इनके खिलाफ पुलिस ने ही केस दर्ज किया था। अब खुद को गलत साबित करने जा रही है। शुक्रवार को इनकी रिहाई के लिए अदालत में बेगुनाही के साक्ष्य दिए जाएंगे।
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बता दें, 25 जुलाई को वजीरपुरा के लोगों ने टोरंट पावर के भूमिगत केबल डालने का विरोध किया था। जबरन केबल डालने पर लोगों ने पुलिस पर हमला बोला था। पथराव और फायरिंग की थी। बवाल में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस ने भीड़ को उकसाने के आरोप में कांग्रेस के शहर अध्यक्ष हाजी अबरार समेत 17 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया था। हाजी अबरार की गिरफ्तारी के बाद सपा नेताओं ने भी उन्हें थाने से छोड़ने का दबाव बनाया।
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आखिरकार हाजी अबरार को दूसरे दिन थाने से जमानत देनी पड़ी। जमानत का आधार तबियत बिगड़ने को बनाया। इसके बाद पुलिस ने बलवे में गिरफ्तार 16 लोगों को संगीन धाराओं में जेल भेज दिया। इसके बाद राजनीति चरम पर पहुंच गई।
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पुलिस सूत्रों की मानें तो पुलिस पर हमला करने वालों को अब पुलिस ही जेल से छुड़ाने पर मजबूर हो गई है। दबाव के चलते पुलिस ने जेल भेजे गए इमरान, कामरान, इरशाद, कुतुबउद्दीन, फरीद और दानिश समेत सात आरोपियों को क्लीन चिट देने जा रही है। सवाल उठता है कि क्या बगैर राजनीतिक दबाव के पुलिस किसी मामले में पुलिस की ओर से दर्ज कराए मुकदमे में आरोपियों को जेल से छुड़ाने को इतनी तत्परता से कार्रवाई करती है।

पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले: एसओ
थानाध्यक्ष शैलेश कुमार का कहना है कि  बलवे में जेल भेजे गए सात आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके हैं। इसके चलते उन्हें जेल से रिहा कराने के लिए धारा 169 की रिपोर्ट (बेगुनाही के साक्ष्य) भेजी जा रही है।   

जमानत पर सुनवाई तीन अगस्त को
जिला जज राजीव लोचन मेहरोत्रा की अदालत मेें गुरुवार को वजीरपुरा बलवे के मामले की सुनवाई हुई। आरोपियों की जमानत पर सुनवाई के लिए तीन अगस्त की तिथि तय की गई है। आरोपियों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अचल शर्मा, रमाशंकर शर्मा, रामदत्त दिवाकर ने वजीरपुरा में भीड़ के गुस्से को टोरंट पावर द्वारा आगरा में किए जा रहे उत्पीड़न का परिणाम बताया। कहा कि बलवे में पकड़े गए सभी आरोपी निर्दोष हैं। बेवजह संगीन धाराएं लगाई गई हैं।

पुलिस को हटानी पड़ीं डकैती की धाराएं
आगरा। लोकसेवा आयोग के चेयरमैन डा. अनिल यादव के भाई अरविंद यादव के साथ कार टकराने के विवाद में हुई मारपीट प्रकरण में दर्ज डकैती के मुकदमे को पुलिस ने बलवा, मारपीट और धमकाने की धाराओं में तरमीम कर दिया। तीनों आरोपियों को गुरुवार को जेल भेजा गया।

बता दें, लंगड़े की चौकी पर दो दिन पहले कार टकराने को लेकर अधिवक्ता अरविंद यादव का कार चालक पवन के साथ विवाद हुआ था। इसके बाद पवन ने अपने साथियों के साथ अरविंद के साथ मारपीट की थी। अनिल यादव के भाई से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने बड़ी तेजी दिखाई। आरोपियों के खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज किया। इस पर सवाल उठे तो पुलिस बैकफुट पर आ गई। पुलिस ने पवन और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया था। गुरुवार को तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया। एसओ हरीपर्वत ने बताया कि मामला डकैती की जगह बलवा, मारपीट, गाली गलोज और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में तरमीम कर लिया गया है।  मारपीट करने वाले चार अन्य हमलावरों की तलाश की जा रही है। उनकी पहचान नहीं हो सकी है।
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