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जालमा के बर्खास्त कार्यालय सहायक को तीन साल की कैद 

Fri, 22 Apr 2016 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
अमर उजाला ब्यूरो आगरा Updated Fri, 22 Apr 2016 01:38 AM IST
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Office assistant Jalma sacked three years imprisonment
- फोटो : Demo
राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइक्रोबैक्टीरियल रोग संस्थान में कार्यालय सहायक पद पर तैनात रहे फ्रांसिस रोजारिया को तीन साल कैद की सजा सुनाई है। दस हजार रुपये अर्थदण्ड भी दिया है। उसने पदोन्नति के लिए डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट का सहारा लिया था। उन पर इसका दोष सिद्ध पाया गया। संस्थान से उसे वित्तीय अनियमितताओं में पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। उनके खिलाफ संस्थान के अधिकारी रामता सिंह ने थाना ताजगंज में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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मामला 2011 में प्रकाश में आया था। आरोप था कि उन्होंने पांच जुलाई 2010 को संस्थान में पदोन्नति के लिए आवेदन किया। इसके लिए स्नातक का अंकपत्र जमा कराया। लेकिन बाद में पता चला कि यह फर्जी है। 
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इस पर उनसे जवाब तलब किया गया, लेकिन उन्होंने उत्तर नहीं दिया। यह मार्कशीट 1983 में जारी बताई गई थी। संस्थान ने जांच कराई तो यह फर्जी पाई गई। यूनिवर्सिटी से रिपोर्ट मांगी गई। वहां से भी इसे फर्जी बताया गया। इसके बाद रोजारिया ने एक और अंकतालिका जमा कराई। इस बार बताया गया कि उसने 1984 में स्नातक किया है। इसकी जांच कराई गई, तो यह भी फर्जी मिली। इस पर उसके खिलाफ केस दर्ज कराया गया। 
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3500 शिक्षकों की बढ़ जाएंगी धड़कनें 
आगरा। जाली मार्कशीट में फ्रांसिस रोजारिया को मिली सजा से उन 3500 सहायक अध्यापकों की धड़कने बढ़ जाएंगी, जो एसआईटी की जांच में फंसे हैं। उनकी बीएड की मार्कशीट फर्जी पाई गई है। इनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस मामले में पिछले साल एफआईआर हो चुकी है। एक लिपिक के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। छह के वारंट जारी हैं। 82 कालेज संचालकों के एसआईटी में बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके बाद सहायक अध्यापकों को आरोपी बनाए जाने पर फैसला लिया जाना है। मार्कशीट की यह जालसजी 2004 से 2009 के मध्य की है। इनमें से 14 शिक्षक आगरा में तैनात हैं। 
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