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जालसाज शैलेंद्र के घर में नोट गिनने की मशीन
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 10 Jul 2015 02:07 AM IST
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जालसाजी में उस्तादों के उस्ताद निकले शैलेंद्र अग्रवाल ने धोखे दे देकर इतनी दौलत कमाई कि उसे नोट गिनने के लिए मशीन खरीदनी पड़ी। वह करोड़ों की काली कमाई में यह भी ध्यान रखता था कि कोई उसे नकली नोट न थमा जाए। उसके विभव नगर स्थित घर में मौजूद इस नोट गिनने की मशीन में ही नकली नोट पकड़ने का सिस्टम भी है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने छापे में इसे जब्त नहीं किया, जबकि चार्जशीट में इसकी जानकारी दी गई है।
उसके खिलाफ कायम हुए 32 केस में से सबसे पहला दर्ज कराने वाली श्वेता सिंह ने पुलिस को बताया कि वह जब 35 फीसदी सालाना ब्याज के लालच में आकर आलू में निवेश के लिए उसके विभव नगर स्थित घर पर पहुंची तो वहां नोट गिनने वाली मशीन लगी थी। शैलेंद्र ने दस लाख रुपये लेकर इसी मशीन से गिने। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह आलू में निवेश के नाम पर 10 लाख से कम नहीं लेता था।
उसकी जालसाजी के जाल में अफसरों के अलावा पुलिसवाले भी खूब फंसे। दरोगा और इंस्पेक्टर ही नहीं, डीआईजी तक उसके झांसे में आ गए। उसने किसी से भी दस लाख से कम नहीं लिए। कई ने तो आयकर के डर से रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कराई। कई ने कराई तो रकम कम बताई।
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वह इस बात का भी ख्याल रखता था कि कोई उसे नकली नोट न दे जाए। इसलिए नोट गिनने के साथ ही मशीन से नकली नोट भी चेक करता था। पुलिस ने जब उसके घर छापा मारा तो मोबाइल, लैपटॉप, हार्डडिस्क के अलावा नकली नोट की मशीन भी वहीं पर थी, लेकिन इसे जब्त नहीं किया गया। यह भी एक साक्ष्य हो सकता था।
कोर्ट तक नहीं पहुंची डायरी
जालसाज के कई राज उसकी डायरी में लिखे हैं। पुलिस ने यह उसके घर से बरामद की थी। इसमें अफसरों के साथ उसके लेनदेन का हिसाब भी है लेकिन इसे भी कोर्ट के सामने नहीं रखा गया है।
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उसके खिलाफ कायम हुए 32 केस में से सबसे पहला दर्ज कराने वाली श्वेता सिंह ने पुलिस को बताया कि वह जब 35 फीसदी सालाना ब्याज के लालच में आकर आलू में निवेश के लिए उसके विभव नगर स्थित घर पर पहुंची तो वहां नोट गिनने वाली मशीन लगी थी। शैलेंद्र ने दस लाख रुपये लेकर इसी मशीन से गिने। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह आलू में निवेश के नाम पर 10 लाख से कम नहीं लेता था।
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उसकी जालसाजी के जाल में अफसरों के अलावा पुलिसवाले भी खूब फंसे। दरोगा और इंस्पेक्टर ही नहीं, डीआईजी तक उसके झांसे में आ गए। उसने किसी से भी दस लाख से कम नहीं लिए। कई ने तो आयकर के डर से रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कराई। कई ने कराई तो रकम कम बताई।
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वह इस बात का भी ख्याल रखता था कि कोई उसे नकली नोट न दे जाए। इसलिए नोट गिनने के साथ ही मशीन से नकली नोट भी चेक करता था। पुलिस ने जब उसके घर छापा मारा तो मोबाइल, लैपटॉप, हार्डडिस्क के अलावा नकली नोट की मशीन भी वहीं पर थी, लेकिन इसे जब्त नहीं किया गया। यह भी एक साक्ष्य हो सकता था।
कोर्ट तक नहीं पहुंची डायरी
जालसाज के कई राज उसकी डायरी में लिखे हैं। पुलिस ने यह उसके घर से बरामद की थी। इसमें अफसरों के साथ उसके लेनदेन का हिसाब भी है लेकिन इसे भी कोर्ट के सामने नहीं रखा गया है।