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जिला जेल में बंदी की मौत पर हंगामा
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 01 Feb 2016 02:05 AM IST
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जिला जेल में हत्या के मामले में निरुद्ध बंदी हेमंत पारासर की रविवार शाम को हालत बिगड़ गई। जेल अस्पताल के बाद उन्हें एसएन इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसकी जानकारी पर आए मृतक के परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने साजिश के तहत हत्या का आरोप लगाया। साथ ही जांच की मांग की।
बसई जगनेर निवासी हेमंत पाराशर (50) 16 फरवरी 2015 से जिला जेल में बंद थे। उन पर शाहगंज में मुरैना के सुनील दुबे की हत्या का आरोप था। इसी मामले में हेमंत के साथ ही उनके बेटे पिंटू, टीटू और रिश्तेदार बंटी भी बंद हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक, हेमंत और उनके बेटे को जेल कार्यालय में बायोमीट्रिक मशीन में डाटा फीडिंग के लिए लाया गया था। उनके साथ तकरीबन 40 कैदी और भी थे। शाम तकरीबन 4:45 बजे हेमंत की अचानक हालत बिगड़ गई। उन्हें जेल अस्पताल में ले जाया गया, जहां से एसएन इमरजेंसी रेफर कर दिया। इमरजेंसी में कुछ देर इलाज के बाद हेमंत की मौत हो गई। इसकी जानकारी पर आए बंदी के भाई लवकुश ने हत्या का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जेल में जाने के बाद से ही दूसरा पक्ष उनकी हत्या की साजिश रच रहा था। उन्होंने जहर देकर भाई की हत्या करने का आरोप लगाया। उधर, वरिष्ठ जेल अधीक्षक संत लाल यादव ने बताया कि हेमंत हृदय रोगी थे। जून 2015 में भी उन्हेें अटैक पड़ा था। तब एसएन इमरजेंसी में इलाज कराया गया था। यहां के बाद लखनऊ के केजीएमसी में भर्ती कराया गया। तब से उनका इलाज निरंतर कराया जा रहा था। हत्या का आरोप सरासर गलत है।
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बसई जगनेर निवासी हेमंत पाराशर (50) 16 फरवरी 2015 से जिला जेल में बंद थे। उन पर शाहगंज में मुरैना के सुनील दुबे की हत्या का आरोप था। इसी मामले में हेमंत के साथ ही उनके बेटे पिंटू, टीटू और रिश्तेदार बंटी भी बंद हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक, हेमंत और उनके बेटे को जेल कार्यालय में बायोमीट्रिक मशीन में डाटा फीडिंग के लिए लाया गया था। उनके साथ तकरीबन 40 कैदी और भी थे। शाम तकरीबन 4:45 बजे हेमंत की अचानक हालत बिगड़ गई। उन्हें जेल अस्पताल में ले जाया गया, जहां से एसएन इमरजेंसी रेफर कर दिया। इमरजेंसी में कुछ देर इलाज के बाद हेमंत की मौत हो गई। इसकी जानकारी पर आए बंदी के भाई लवकुश ने हत्या का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जेल में जाने के बाद से ही दूसरा पक्ष उनकी हत्या की साजिश रच रहा था। उन्होंने जहर देकर भाई की हत्या करने का आरोप लगाया। उधर, वरिष्ठ जेल अधीक्षक संत लाल यादव ने बताया कि हेमंत हृदय रोगी थे। जून 2015 में भी उन्हेें अटैक पड़ा था। तब एसएन इमरजेंसी में इलाज कराया गया था। यहां के बाद लखनऊ के केजीएमसी में भर्ती कराया गया। तब से उनका इलाज निरंतर कराया जा रहा था। हत्या का आरोप सरासर गलत है।
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