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हाउस टैक्स में करोड़ों की हेराफेरी
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा।
Updated Fri, 17 Jul 2015 02:03 AM IST
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प्रॉपर्टी के असिस्मेंट में नगर निगम का कर विभाग जमकर खेल कर रहा है। कर्मचारी आंखों में धूल झोंककर हर साल करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं। मल्टीस्टोरी भवनों के साथ-साथ होटलों से गृहकर वसूली में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है।
नगर निगम की सबसे बड़ी आय का जरिया गृहकर वसूली है। इसी में कर विभाग के कर्मचारी धांधली कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक नगर निगम सीमा में ढाई लाख से ज्यादा भवन हैं। इसके अलावा मल्टीस्टोरी, होटल और कामर्शियल भवन भी सैकड़ों की संख्या में हैं। निगम सूत्रों की मानें तो यदि ठीक से इन सभी की प्रॉपर्टी का असिस्मेंट किया जाए तो नगर निगम हर साल 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर सकता है। लेकिन इस साल निगम ने लगभग 22 करोड़ ही गृहकर वसूले हैं। जबकि पिछले साल लगभग 17 करोड़ और इससे पहले 14 करोड़ की वसूली हुई थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हर साल कर विभाग के कर्मचारी मनचाहा प्रॉपर्टी का असिस्मेंट कर लगभग 28 करोड़ का नगर निगम को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मल्टीस्टोरी भवनों के कर
निर्धारण में हो रहा खेल
गृहकर वसूली में सबसे बड़ा खेल कामर्शियल भवन और मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों के असिस्मेंट में हो रहा है। दरअसल, अधिकांश ने शहर में अधिक क्षेत्रफल वाले पुराने भवन खरीदकर इन पर मल्टीस्टोरी बना दी। जिस प्रॉपर्टी पर कभी एक भवन था, उसमें कई फ्लैट बन गए। मगर कर विभाग के कर्मचारी कागजों में खेल कर इन तमाम फ्लैटों की बजाय सिर्फ एक ही भवन दिखाकर गृहकर जमा कर रिकॉर्ड मेटेंन कर रहे हैं। इससे हर साल लाखों रुपये का खेल हो रहा है।
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इनसेट
.. कर से संबंधित कई फाइलें गायब
होटलों के कर निर्धारण में कर विभाग के कर्मचारियों का खेल उजागर हो गया है। कम वसूली होने पर नगर आयुक्त इंद्रविक्रम सिंह ने सबसे पहले बड़े बकायादार माने जाने वाले होटलों के रिकॉर्ड को ही खंगाला। उन्होंने सबसे पहले उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग से नगर निगम सीमा में होटलों की संख्या मांगी। जो 471 बताई गई। इस मामले में कर्मचारियों को जब पोल खुलने का डर हुआ तो उन्होंने होटलों से वसूले गए कर से संबंधित कई फाइलें कर गायब कर दीं। गुरुवार को नगर आयुक्त ने होटलों से कर वसूली से संबंधित फाइल तलब कर कर वसूली की समीक्षा की। इसमें काफी गड़बड़ी मिलने पर नगर आयुक्त ने संबंधित कर्मचारियों को 30 जुलाई तक होटलों का पुन: असिस्मेंट कर कर निर्धारण की चेतावनी दी है। इसके बाद इसकी फिर से समीक्षा करेंगे। गड़बड़ी मिलती है तो जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए संस्तुति की जाएगी।
वर्जन
नगर आयुक्त ने होटलों से कर वसूली की समीक्षा की है। 30 जुलाई तक का समय दिया है। मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों के भी असिस्मेंट में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं। पता चला है कि मल्टीस्टोरी के तमाम फ्लैटों की बजाय एक ही भवन की कर वसूली की शिकायतें हैं।
- अनिल कुमार, उपनगर आयुक्त
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नगर निगम की सबसे बड़ी आय का जरिया गृहकर वसूली है। इसी में कर विभाग के कर्मचारी धांधली कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक नगर निगम सीमा में ढाई लाख से ज्यादा भवन हैं। इसके अलावा मल्टीस्टोरी, होटल और कामर्शियल भवन भी सैकड़ों की संख्या में हैं। निगम सूत्रों की मानें तो यदि ठीक से इन सभी की प्रॉपर्टी का असिस्मेंट किया जाए तो नगर निगम हर साल 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर सकता है। लेकिन इस साल निगम ने लगभग 22 करोड़ ही गृहकर वसूले हैं। जबकि पिछले साल लगभग 17 करोड़ और इससे पहले 14 करोड़ की वसूली हुई थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हर साल कर विभाग के कर्मचारी मनचाहा प्रॉपर्टी का असिस्मेंट कर लगभग 28 करोड़ का नगर निगम को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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मल्टीस्टोरी भवनों के कर
निर्धारण में हो रहा खेल
गृहकर वसूली में सबसे बड़ा खेल कामर्शियल भवन और मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों के असिस्मेंट में हो रहा है। दरअसल, अधिकांश ने शहर में अधिक क्षेत्रफल वाले पुराने भवन खरीदकर इन पर मल्टीस्टोरी बना दी। जिस प्रॉपर्टी पर कभी एक भवन था, उसमें कई फ्लैट बन गए। मगर कर विभाग के कर्मचारी कागजों में खेल कर इन तमाम फ्लैटों की बजाय सिर्फ एक ही भवन दिखाकर गृहकर जमा कर रिकॉर्ड मेटेंन कर रहे हैं। इससे हर साल लाखों रुपये का खेल हो रहा है।
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.. कर से संबंधित कई फाइलें गायब
होटलों के कर निर्धारण में कर विभाग के कर्मचारियों का खेल उजागर हो गया है। कम वसूली होने पर नगर आयुक्त इंद्रविक्रम सिंह ने सबसे पहले बड़े बकायादार माने जाने वाले होटलों के रिकॉर्ड को ही खंगाला। उन्होंने सबसे पहले उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग से नगर निगम सीमा में होटलों की संख्या मांगी। जो 471 बताई गई। इस मामले में कर्मचारियों को जब पोल खुलने का डर हुआ तो उन्होंने होटलों से वसूले गए कर से संबंधित कई फाइलें कर गायब कर दीं। गुरुवार को नगर आयुक्त ने होटलों से कर वसूली से संबंधित फाइल तलब कर कर वसूली की समीक्षा की। इसमें काफी गड़बड़ी मिलने पर नगर आयुक्त ने संबंधित कर्मचारियों को 30 जुलाई तक होटलों का पुन: असिस्मेंट कर कर निर्धारण की चेतावनी दी है। इसके बाद इसकी फिर से समीक्षा करेंगे। गड़बड़ी मिलती है तो जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए संस्तुति की जाएगी।
वर्जन
नगर आयुक्त ने होटलों से कर वसूली की समीक्षा की है। 30 जुलाई तक का समय दिया है। मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों के भी असिस्मेंट में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं। पता चला है कि मल्टीस्टोरी के तमाम फ्लैटों की बजाय एक ही भवन की कर वसूली की शिकायतें हैं।
- अनिल कुमार, उपनगर आयुक्त