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पैरामिल्ट्री फोर्स की पहली पसंद है बेरेटा कार्बाइन
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Fri, 03 Mar 2017 11:36 PM IST
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इटली में बनता है दस लाख कीमत का यह हथियार
- फोटो : अमर उजाला
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जिन बेरेटा नाइन एमएम कार्बाइन को चंद्रपाल चोरी कर लाया, वह बेहद खतरनाक किस्म का हथियार है। पूरी तरह ऑटोमेटिक है। चलाने में बहुत आसान है। अर्द्धसैनिक बलों को हाल ही में दिया गया है। उनकी यह पहली पसंद है। पुलिस को अभी नहीं मिला है। अगर यह अपराधियों के हाथ लग जाए तो कहर बरपा सकता है। यह भी एक वजह रही कि दो कार्बाइन चोरी होते ही बीएसएफ के आला अफसर तक टेंशन में आ गए।
एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्बाइन शॉर्ट रेंज गन है। इटली में बनी है। बेरेटा की पिस्टल भी काफी मशहूर है। यह पिस्टल बनाने वाली सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। बेरेटा ने और भी कई हथियार बनाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा पसंद यही कार्बाइन की गई है। कुछ हथियार दाहिने हाथ से चलाने में आसान होते हैं। कुछ बाएं हाथ से। जैसे एमपी-5 गन दाहिने हाथ से चलाने में आसान है। लेकिन बेरेटा कार्बाइन दोनों में एक जैसी है। जवान राइटी हो या लेफ्टी, बेरेटा चलाने में आसानी ही रहती है।
गांववालों ने खोला राज
आगरा। चंद्रपाल पर कार्बाइन चोरी का शक यूं ही नहीं गया। उसने छुट्टी 18 फरवरी से ली थी। लेकिन 19 तक बीएसएफ की पश्चिम बंगाल की खेताबार कुट्टी स्थित सीमा चौकी के आस-पास रहा। वह रेलवे स्टेशन तक के लिए टैक्सी करने गांववालों के पास गया था। जब कार्बाइन चोरी की पड़ताल हुई तो उन कर्मचारियों की लिस्ट बनी जो छुट्टी पर हैं। इनमें चंद्रपाल का भी नाम आया। इसी दौरान गांववालों से पता चला कि वह 19 को वहीं पर था। इसी से उस पर शक गया।
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डीजीपी ने पीठ थपथपाई
आगरा। डीजीपी जावीद अहमद ने इस गुडवर्क में शामिल रही टीम को पुरस्कार देने की घोषणा की है। टीम में एटीएस के डिप्टी एसपी मनीष सोनकर, इंस्पेक्टर आलोक सिंह, एसआई यतींद्र सिंह, अनिरुद्ध दुबे, कांस्टेबल निरभाल और संजय रहे। पुलिस से सिकंदरा थाना के इंस्पेक्टर ब्रजेश पांडे और रुनकता चौकी के प्रभारी मुनेश शामिल हैं।
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एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्बाइन शॉर्ट रेंज गन है। इटली में बनी है। बेरेटा की पिस्टल भी काफी मशहूर है। यह पिस्टल बनाने वाली सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। बेरेटा ने और भी कई हथियार बनाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा पसंद यही कार्बाइन की गई है। कुछ हथियार दाहिने हाथ से चलाने में आसान होते हैं। कुछ बाएं हाथ से। जैसे एमपी-5 गन दाहिने हाथ से चलाने में आसान है। लेकिन बेरेटा कार्बाइन दोनों में एक जैसी है। जवान राइटी हो या लेफ्टी, बेरेटा चलाने में आसानी ही रहती है।
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गांववालों ने खोला राज
आगरा। चंद्रपाल पर कार्बाइन चोरी का शक यूं ही नहीं गया। उसने छुट्टी 18 फरवरी से ली थी। लेकिन 19 तक बीएसएफ की पश्चिम बंगाल की खेताबार कुट्टी स्थित सीमा चौकी के आस-पास रहा। वह रेलवे स्टेशन तक के लिए टैक्सी करने गांववालों के पास गया था। जब कार्बाइन चोरी की पड़ताल हुई तो उन कर्मचारियों की लिस्ट बनी जो छुट्टी पर हैं। इनमें चंद्रपाल का भी नाम आया। इसी दौरान गांववालों से पता चला कि वह 19 को वहीं पर था। इसी से उस पर शक गया।
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डीजीपी ने पीठ थपथपाई
आगरा। डीजीपी जावीद अहमद ने इस गुडवर्क में शामिल रही टीम को पुरस्कार देने की घोषणा की है। टीम में एटीएस के डिप्टी एसपी मनीष सोनकर, इंस्पेक्टर आलोक सिंह, एसआई यतींद्र सिंह, अनिरुद्ध दुबे, कांस्टेबल निरभाल और संजय रहे। पुलिस से सिकंदरा थाना के इंस्पेक्टर ब्रजेश पांडे और रुनकता चौकी के प्रभारी मुनेश शामिल हैं।