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चार घंटे कठघरे में खड़े रहे डाक्टर महेंद्रू
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 17 Sep 2015 01:51 AM IST
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महिला अधिकारी के साथ अश्लील हरकत करने के संगीन मामले में आरोपी छावनी बोर्ड के उपाध्यक्ष डा. पंकज महेंद्रू ने बुधवार दोपहर अदालत में सरेंडर कर दिया। उन्हें शाम को 21 सितंबर तक के लिए अंतरिम जमानत तो मिल गई लेकिन इससे पहले चार घंटे कठघरे में खड़ा रहना पड़ा।
उनके अधिवक्ता ने उन्हें हृदय रोगी बताते हुए अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें कुर्सी पर बैठने की इजाजत दी जाए लेकिन महिला अधिकारी के वकील ने इसका विरोध किया। इस पर जज ने उन्हें बैठने की अनुमति नहीं दी। इससे पूर्व पंकज महेंद्रू ने दोपहर को सीजेएम संध्या चौधरी के सामने सरेंडर किया।
उन पर इसी साल 20 जनवरी को छावनी बोर्ड की महिला अधिकारी के साथ अश्लील हरकत करने, जाति सूचक शब्द कहने और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज हुआ था। उन्होंने महिला अधिकारी के फोटो सोशल साइट पर अपलोड भी कर दिए थे।
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पुलिस ने 28 मार्च को चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसमें समन जारी होने पर पंकज महेंद्रू हाईकोर्ट गए। वहां से सात सितंबर को उन्हें इस मामले में शीघ्र सुनवाई का आदेश मिला। बुधवार को सीजेएम कोर्ट में पेश होकर उन्होंने जमानत अर्जी दी। इसे खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के चलते स्पेशल जज (एसटी-एसटी) अश्वनी कुमार त्रिपाठी ने बुधवार को ही सुनवाई की। उन्हें 21 सितंबर तक के लिए 20-20 हजार के दो जमानती और इतनी ही राशि के निजी मुचलकों पर रिहा करने के आदेश दिए। उनकी ओर से पैरवी अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह भैया और महिला अधिकारी की तरफ से अचल शर्मा व डाक्टर हरिदत्त शर्मा ने की।
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उनके अधिवक्ता ने उन्हें हृदय रोगी बताते हुए अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें कुर्सी पर बैठने की इजाजत दी जाए लेकिन महिला अधिकारी के वकील ने इसका विरोध किया। इस पर जज ने उन्हें बैठने की अनुमति नहीं दी। इससे पूर्व पंकज महेंद्रू ने दोपहर को सीजेएम संध्या चौधरी के सामने सरेंडर किया।
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उन पर इसी साल 20 जनवरी को छावनी बोर्ड की महिला अधिकारी के साथ अश्लील हरकत करने, जाति सूचक शब्द कहने और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज हुआ था। उन्होंने महिला अधिकारी के फोटो सोशल साइट पर अपलोड भी कर दिए थे।
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पुलिस ने 28 मार्च को चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसमें समन जारी होने पर पंकज महेंद्रू हाईकोर्ट गए। वहां से सात सितंबर को उन्हें इस मामले में शीघ्र सुनवाई का आदेश मिला। बुधवार को सीजेएम कोर्ट में पेश होकर उन्होंने जमानत अर्जी दी। इसे खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के चलते स्पेशल जज (एसटी-एसटी) अश्वनी कुमार त्रिपाठी ने बुधवार को ही सुनवाई की। उन्हें 21 सितंबर तक के लिए 20-20 हजार के दो जमानती और इतनी ही राशि के निजी मुचलकों पर रिहा करने के आदेश दिए। उनकी ओर से पैरवी अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह भैया और महिला अधिकारी की तरफ से अचल शर्मा व डाक्टर हरिदत्त शर्मा ने की।