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सिपाहियों की कायरता से लगी दरोगा को गोली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2015 02:17 AM IST
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बदमाश की ओर से गोली चलते ही जवाबी फायर करने के बजाय पांच सिपाही अपनी
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रायफलें लेकर भागने लगे। चार जीप लेकर भाग गए। एक जीप में नहीं बैठ पाया तो
पैदल भागकर खेत में जा छुपा। इनके अलावा बलवीर नाम के एक सिपाही ने विनोद
को पकड़ने की जरूर कोशिश की, लेकिन महिलाओं ने उसे घेर लिया और उसकी पिटाई
की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दबिश के दौरान वारंटी विनोद घर में सो रहा
था। पुलिस को देखते ही उसके परिवार की महिलाओं ने शोर मचाया। इस पर विनोद
के पड़ोसी हिस्ट्रीशीटर बिजेन्द्र अपने घर की छत से पुलिस पर फायरिंग शुरू
कर दी। गोलियां चलते ही सिपाही भागने लगे। अकेले दरोगा सुधीर सिंह डटे रहे।
दबिश में गए ड्राइवर बलराम सिंह, कम्बोद सिंह, राजपाल और भरत सिंह जीप में
जाकर बैठ गए।
कांस्टेबल मोहरपाल जान बचाकर खेत में जा छुपे। दो घंटे तक दुबके रहे। फोर्स के आने के बाद ही बाहर निकले। हमलावरों की ओर से गोलीबारी के बाद भी किसी सिपाही ने रायफल से गोली चलाना तो दूर लोड करके धमकाने की जहमत भी नहीं उठाई। एसएसपी का मानना है कि अगर सिपाही हवाई फायरिंग कर देते तो शायद हमलावरों का दुस्साहस इतना नहीं बढ़ता। सिपाहियों की इस लापरवाही की जांच कराई जा रही है। लापरवाही मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। पुलिस ने घरों की छतों से 12 बोर और 15 बोर के आठ खोखे बरामद किए हैं।
एसआई सुधीर सिंह ने खुद को घिरता देखकर पिस्टल को कॉक कर लिया था, लेकिन इसी बीच छत से चलाई गोली उनके सीने में दिल के पास जा लगी। उन्हें 315 बोर की गोली लगी है।
बार्डर का थाना और दस सिपाहियों पर जिम्मेदारी
आगरा। निबोहरा थाना क्षेत्र में राजस्थान की सीमा से लगे 80 गांव हैं। इस संवेदनशील थाने में सुरक्षा की जिम्मेदारी महज 10 सिपाहियों के ऊपर है। थाने में एसओ समेत केवल दो दरोगा हैं। कई गांव तो बीहड़ों में बसे हुए हैं। राजस्थान की सीमा लगे होने के कारण यहां शराब की तस्करी समेत कई अवैध धंधे होते हैं। यूं थाने में आठ अन्य पुलिसकर्मी भी हैं। इनमें दो मुंशी, एक पैरोकार, एक पहरा ड्यूटी है। कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने और गश्त के लिए महज दस सिपाही ही बचते हैं। एसओ समेत दो दरोगा हैं। इनमें से दरोगा सुधीर सिंह के घायल होने के बाद अब एसओ ही बचे हैं। रविवार को पुलिस टीम पर हमले के बाद थाने से मुंशी भी डंडे लेकर गांव पहुंच गए। इस संबंध में एसएसपी राजेश डी. मोदक का कहना है कि थाने में 18 सिपाही तैनात हैं। कुछ होमगार्ड भी रहते हैं।
कांस्टेबल मोहरपाल जान बचाकर खेत में जा छुपे। दो घंटे तक दुबके रहे। फोर्स के आने के बाद ही बाहर निकले। हमलावरों की ओर से गोलीबारी के बाद भी किसी सिपाही ने रायफल से गोली चलाना तो दूर लोड करके धमकाने की जहमत भी नहीं उठाई। एसएसपी का मानना है कि अगर सिपाही हवाई फायरिंग कर देते तो शायद हमलावरों का दुस्साहस इतना नहीं बढ़ता। सिपाहियों की इस लापरवाही की जांच कराई जा रही है। लापरवाही मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। पुलिस ने घरों की छतों से 12 बोर और 15 बोर के आठ खोखे बरामद किए हैं।
एसआई सुधीर सिंह ने खुद को घिरता देखकर पिस्टल को कॉक कर लिया था, लेकिन इसी बीच छत से चलाई गोली उनके सीने में दिल के पास जा लगी। उन्हें 315 बोर की गोली लगी है।
बार्डर का थाना और दस सिपाहियों पर जिम्मेदारी
आगरा। निबोहरा थाना क्षेत्र में राजस्थान की सीमा से लगे 80 गांव हैं। इस संवेदनशील थाने में सुरक्षा की जिम्मेदारी महज 10 सिपाहियों के ऊपर है। थाने में एसओ समेत केवल दो दरोगा हैं। कई गांव तो बीहड़ों में बसे हुए हैं। राजस्थान की सीमा लगे होने के कारण यहां शराब की तस्करी समेत कई अवैध धंधे होते हैं। यूं थाने में आठ अन्य पुलिसकर्मी भी हैं। इनमें दो मुंशी, एक पैरोकार, एक पहरा ड्यूटी है। कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने और गश्त के लिए महज दस सिपाही ही बचते हैं। एसओ समेत दो दरोगा हैं। इनमें से दरोगा सुधीर सिंह के घायल होने के बाद अब एसओ ही बचे हैं। रविवार को पुलिस टीम पर हमले के बाद थाने से मुंशी भी डंडे लेकर गांव पहुंच गए। इस संबंध में एसएसपी राजेश डी. मोदक का कहना है कि थाने में 18 सिपाही तैनात हैं। कुछ होमगार्ड भी रहते हैं।