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शैलेंद्र के खिलाफ चार्जशीट, अफसरों का नाम नहीं
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 02 Jul 2015 02:20 AM IST
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जैसी आशंका थी, वैसा ही हुआ। जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ दर्ज 31 में
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से सबसे पहले मुकदमे में बुधवार को चुपचाप चार्जशीट दाखिल कर दी गई। लेकिन
इसमें किसी भी अधिकारी का नाम शामिल नहीं है। शैलेंद्र पर जांच के आधार पर
जालसाजी की दो धाराएं भी बढ़ाई गई है। इसी केस में कॉल स्पूफिंग का मामला
लिखवाया गया था। शैलेंद्र, अफसरों के फोन हैक करके उनके नाम से लोगों को
धमकाता था। लेकिन पुलिस ने न तो अधिकारियों की कॉल डिटेल निकलवाई और न ही
इस बारे में किसी अफसर का बयान दर्ज करना जरूरी समझा।
इसी केस की जांच के दौरान खुलासा हुआ था कि शैलेंद्र की मदद से दो पूर्व डीजीपी ने दरोगाओं की पोस्टिंग और प्रमोशन में बोली लगाई। शैलेंद्र की कॉल डिटेल में आगरा में तैनात रहे दो आईएस अधिकारियों का नाम भी आया था। उसने अधिकारियों को अपने बैंक एकाउंट से भी पैसे ट्रांसफर किए थे। उसके कनेक्शन एक आईजी और एक अन्य पूर्व डीजीपी से भी पाए गए।
इनकी जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम गठित की गई लेकिन हकीकत यह है कि जांच ठीक से शुरू ही नहीं हुई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि 20 दिन पहले पंचम तल से फोन आया था। एसआईटी से साफ कह दिया था कि शैलेंद्र को छोड़ना नहीं है और अफसरों को छेड़ना नहीं है। अब चार्जशीट ने इसे साबित कर दिया है।
सीओ सदर असीम चौधरी ने बताया कि थाना ताजगंज में दर्ज मुकदमे में शैलेंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और जालसाजी की धाराओं में चार्जशीट बुधवार को दाखिल कर दी गई है। इस केस मं एफआईआर सिर्फ उसके नाम दर्ज हुई थी। यह केस दरोगा विजय सिंह चक की पत्नी संध्या ने दर्ज कराया था। आरोप था कि उसने आलू में निवेश के नाम पर दो दरागाओं से दस लाख रूपये लिए और हड़प गया। इसके बाद उस पर 30 केस दर्ज और हुए हैं।
उधर, कॉल स्पूफिंग के जरिए शैलेंद्र ने अफसरों के फोन हैक किए। कानून के जानकारों का कहना है कि इसके मजबूत साक्ष्य देने के लिए पुलिस को अधिकारियों की कॉल डिटेल निकलवानी चाहिए थी। इसी से साफ होता कि फोन अधिकारियों के मोबाइल से नहीं किए गए।
:: पुलिस ने छुपा लिए सुबूत
पुलिस को शैलेंद्र केस की जांच के दौरान वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले। शैलेंद्र की कॉल डिटेल, एसएमएस, बैंक ट्रांजिक्शन में अधिकारी साफ फंस रहे हैं। लेकिन किसी भी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। न ही किसी से पूछताछ की गई है।
:: रिश्तेदार भी साफ बच गए
पहली चार्जशीट में शैलेंद्र के किसी रिश्तेदार को भी आरोपी नहीं बनाया गया है। इनके खिलाफ भी केस दर्ज हैं। इसके अलावा उसके ड्राइवर, सिक्योरिटी गार्ड, कोल्ड स्टोर के मैनेजर को आरोपी बनाए जाने की तैयारी चल रही थी लेकिन पहली चार्जशीट में सब बच गए।
इसी केस की जांच के दौरान खुलासा हुआ था कि शैलेंद्र की मदद से दो पूर्व डीजीपी ने दरोगाओं की पोस्टिंग और प्रमोशन में बोली लगाई। शैलेंद्र की कॉल डिटेल में आगरा में तैनात रहे दो आईएस अधिकारियों का नाम भी आया था। उसने अधिकारियों को अपने बैंक एकाउंट से भी पैसे ट्रांसफर किए थे। उसके कनेक्शन एक आईजी और एक अन्य पूर्व डीजीपी से भी पाए गए।
इनकी जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम गठित की गई लेकिन हकीकत यह है कि जांच ठीक से शुरू ही नहीं हुई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि 20 दिन पहले पंचम तल से फोन आया था। एसआईटी से साफ कह दिया था कि शैलेंद्र को छोड़ना नहीं है और अफसरों को छेड़ना नहीं है। अब चार्जशीट ने इसे साबित कर दिया है।
सीओ सदर असीम चौधरी ने बताया कि थाना ताजगंज में दर्ज मुकदमे में शैलेंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और जालसाजी की धाराओं में चार्जशीट बुधवार को दाखिल कर दी गई है। इस केस मं एफआईआर सिर्फ उसके नाम दर्ज हुई थी। यह केस दरोगा विजय सिंह चक की पत्नी संध्या ने दर्ज कराया था। आरोप था कि उसने आलू में निवेश के नाम पर दो दरागाओं से दस लाख रूपये लिए और हड़प गया। इसके बाद उस पर 30 केस दर्ज और हुए हैं।
उधर, कॉल स्पूफिंग के जरिए शैलेंद्र ने अफसरों के फोन हैक किए। कानून के जानकारों का कहना है कि इसके मजबूत साक्ष्य देने के लिए पुलिस को अधिकारियों की कॉल डिटेल निकलवानी चाहिए थी। इसी से साफ होता कि फोन अधिकारियों के मोबाइल से नहीं किए गए।
:: पुलिस ने छुपा लिए सुबूत
पुलिस को शैलेंद्र केस की जांच के दौरान वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले। शैलेंद्र की कॉल डिटेल, एसएमएस, बैंक ट्रांजिक्शन में अधिकारी साफ फंस रहे हैं। लेकिन किसी भी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। न ही किसी से पूछताछ की गई है।
:: रिश्तेदार भी साफ बच गए
पहली चार्जशीट में शैलेंद्र के किसी रिश्तेदार को भी आरोपी नहीं बनाया गया है। इनके खिलाफ भी केस दर्ज हैं। इसके अलावा उसके ड्राइवर, सिक्योरिटी गार्ड, कोल्ड स्टोर के मैनेजर को आरोपी बनाए जाने की तैयारी चल रही थी लेकिन पहली चार्जशीट में सब बच गए।