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जेल में घेवर पर रोक से बहनों को आया गुस्सा
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:14 PM IST
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आगरा। सलाखों में बंद भाइयों को रक्षाबंधन पर ‘रक्षा का धागा’ बांधने पहुंची बहनों को जिला जेल में घेवर ले जाने से रोक दिया गया। इससे बहनों को गुस्सा आ गया। इस पर उन्होंने आक्रोश भी व्यक्त किया। मगर, जेल प्रशासन ने उनकी एक न सुनी। बाद में बिना घेवर के भाइयों को राखी बांधने पहुंची। उधर, सुबह से शाम तक जेल में मिलाई होती रही।
जिला जेल में भाई से मिलाई के लिए सुबह छह बजे से ही महिलाओं का आना शुरू हो गया था। पर्ची देने के बाद नौ बजे से महिलाओं को जेल के अंदर जाने दिया गया। महिलाओं को सोनपपड़ी, पेठा, फल ही ले जाने की इजाजत थी। उन्हें घेवर ले जाने से रोक दिया गया। महिलाओं का कहना था कि रक्षाबंधन के त्योहार पर भाई को घेवर खिलाने का सबसे ज्यादा महत्व होता है। उसको ही जेल कर्मी अंदर नहीं ले जाने दे रहे हैं।
अगर, घेवर पर प्रतिबंध था तो उसकी जानकारी पहले से क्यों नहीं दी गई। जेल के आसपास कोई बोर्ड आदि क्यों नहीं लगाया गया? बहनें निराश होकर भाई से मिलने गईं। मथुरा से आई एक बहन का कहना था कि उनके तीन भाई अलग-अलग जेल में बंद हैं। एक मथुरा की जेल में है, जबकि दो भाई आगरा की जिला और केंद्रीय जेल में बंद हैं। मथुरा की जेल में बंद भाई से मिलने पर घेवर ले जाने दिया गया।
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इसी वजह से वह यहां की जेल में भाई के लिए घेवर लेकर आई थी। मगर, जेल कर्मी घेवर नहीं ले जाने दे रहे हैं। दुकान का नाम बता रहे हैं। एक जेल में अलग नियम कैसे हो सकता है। जेल प्रशासन के मुताबिक, भाइयों को राखी बांधने के लिए आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, दिल्ली तक से महिलाएं आईं थीं। जेल में सुबह नौ बजे से लेकर शाम चार बजे तक 1303 महिलाओं की मिलाई कराई गई। 353 बच्चे भी महिलाओं के साथ अंदर आए। कुछ बंदियों से मिलने उनकी बहनों के साथ मां र्भी आईं।
महिलाओं के सामान की चेकिंग के बाद ही अंदर जाने दिया गया। जेल के मुख्य द्वार से लेकर अंदर के द्वार महिला कर्मियों को चेकिंग के लिए लगाया गया था। जेल में घेवर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। डीआईजी जेल शरद का कहना था कि जिला जेल में महिलाओं की संख्या अधिक रहती है। घेवर को चेक करने में दिक्कत आती है। सुरक्षा कारणों की वजह से घेवर को नहीं ले जाने दिया गया होगा।
भाई से मिली तो आंखों में भर आए आंसू
कितने ही जतन करके जेल में बंद भाइयों से मिलने आईं बहनें, लेकिन भाइयों से मिली तो उनकी आंखें भर्र आईं। भाई से गले लग गईं। जेल से बाहर आने पर भी उनके आंसू नहीं रुक रहे थे।
मुसलिम महिलाओं ने भी बांधी राखी
जेल में मुसलिम महिलाएं भी भाइयों को राखी बांधने के लिए पहुंची। उन्होंने भाइयों को राखी बांधी और मुंह मीठा भी किया। जेल प्रशासन ने बताया कि मुसलिम महिलाओं की संख्या तकरीबन 20 रही।
महिला ने कर्मियों को दिया पर्स
बोदला की साइना भी भाई से मिलने आई थी। जेल परिसर में एक पर्स उसे लावारिस पड़ा मिला। पर्स में रुपयों के अलावा अन्य सामान भी रखा हुआ था। उसने जेल कर्मी को यह पर्स दिया।
केंद्रीय कारागार में भी लगी लाइन
केंद्रीय कारागार में भी सुबह से ही बहनों का आना शुरू हो गया था। पर्ची देने के बाद मुहर लगाई गई। महिलाओं के साथ बच्चे भी आए। जेल प्रशासन के मुताबिक, 374 महिलाएं और 201 पुरुषों की मुलाकात कराई गई। यहां पर बहनों को मिठाई ले जाने पर कोई रोक नहीं थी। घेवर के साथ ही पेठा, फल आदि भी ले जाने दिए गए।
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जिला जेल में भाई से मिलाई के लिए सुबह छह बजे से ही महिलाओं का आना शुरू हो गया था। पर्ची देने के बाद नौ बजे से महिलाओं को जेल के अंदर जाने दिया गया। महिलाओं को सोनपपड़ी, पेठा, फल ही ले जाने की इजाजत थी। उन्हें घेवर ले जाने से रोक दिया गया। महिलाओं का कहना था कि रक्षाबंधन के त्योहार पर भाई को घेवर खिलाने का सबसे ज्यादा महत्व होता है। उसको ही जेल कर्मी अंदर नहीं ले जाने दे रहे हैं।
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अगर, घेवर पर प्रतिबंध था तो उसकी जानकारी पहले से क्यों नहीं दी गई। जेल के आसपास कोई बोर्ड आदि क्यों नहीं लगाया गया? बहनें निराश होकर भाई से मिलने गईं। मथुरा से आई एक बहन का कहना था कि उनके तीन भाई अलग-अलग जेल में बंद हैं। एक मथुरा की जेल में है, जबकि दो भाई आगरा की जिला और केंद्रीय जेल में बंद हैं। मथुरा की जेल में बंद भाई से मिलने पर घेवर ले जाने दिया गया।
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इसी वजह से वह यहां की जेल में भाई के लिए घेवर लेकर आई थी। मगर, जेल कर्मी घेवर नहीं ले जाने दे रहे हैं। दुकान का नाम बता रहे हैं। एक जेल में अलग नियम कैसे हो सकता है। जेल प्रशासन के मुताबिक, भाइयों को राखी बांधने के लिए आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, दिल्ली तक से महिलाएं आईं थीं। जेल में सुबह नौ बजे से लेकर शाम चार बजे तक 1303 महिलाओं की मिलाई कराई गई। 353 बच्चे भी महिलाओं के साथ अंदर आए। कुछ बंदियों से मिलने उनकी बहनों के साथ मां र्भी आईं।
महिलाओं के सामान की चेकिंग के बाद ही अंदर जाने दिया गया। जेल के मुख्य द्वार से लेकर अंदर के द्वार महिला कर्मियों को चेकिंग के लिए लगाया गया था। जेल में घेवर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। डीआईजी जेल शरद का कहना था कि जिला जेल में महिलाओं की संख्या अधिक रहती है। घेवर को चेक करने में दिक्कत आती है। सुरक्षा कारणों की वजह से घेवर को नहीं ले जाने दिया गया होगा।
भाई से मिली तो आंखों में भर आए आंसू
कितने ही जतन करके जेल में बंद भाइयों से मिलने आईं बहनें, लेकिन भाइयों से मिली तो उनकी आंखें भर्र आईं। भाई से गले लग गईं। जेल से बाहर आने पर भी उनके आंसू नहीं रुक रहे थे।
मुसलिम महिलाओं ने भी बांधी राखी
जेल में मुसलिम महिलाएं भी भाइयों को राखी बांधने के लिए पहुंची। उन्होंने भाइयों को राखी बांधी और मुंह मीठा भी किया। जेल प्रशासन ने बताया कि मुसलिम महिलाओं की संख्या तकरीबन 20 रही।
महिला ने कर्मियों को दिया पर्स
बोदला की साइना भी भाई से मिलने आई थी। जेल परिसर में एक पर्स उसे लावारिस पड़ा मिला। पर्स में रुपयों के अलावा अन्य सामान भी रखा हुआ था। उसने जेल कर्मी को यह पर्स दिया।
केंद्रीय कारागार में भी लगी लाइन
केंद्रीय कारागार में भी सुबह से ही बहनों का आना शुरू हो गया था। पर्ची देने के बाद मुहर लगाई गई। महिलाओं के साथ बच्चे भी आए। जेल प्रशासन के मुताबिक, 374 महिलाएं और 201 पुरुषों की मुलाकात कराई गई। यहां पर बहनों को मिठाई ले जाने पर कोई रोक नहीं थी। घेवर के साथ ही पेठा, फल आदि भी ले जाने दिए गए।